Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर लोक निर्माण विभाग (PWD) ने सख्त रुख अपनाया है। कबीरधाम जिले में परफॉर्मेंस गारंटी अवधि के दौरान सड़क के क्षतिग्रस्त होने और निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी खामियां सामने आने के बाद विभाग ने संबंधित ठेकेदार और अभियंताओं को नोटिस जारी किया है। मामला कबीरधाम जिले के ग्राम बानौ से कान्हाभैरा तक निर्मित 6.70 किलोमीटर लंबी सड़क का है। विभागीय निरीक्षण में सड़क के कई हिस्सों में धंसाव और निर्माण के दौरान
पर्याप्त कम्पेक्शन
नहीं होने की बात सामने आई है। इसके बाद विभाग ने ठेकेदार को सात दिनों के भीतर क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत करने और संबंधित अभियंताओं को तीन दिनों के भीतर कम्पेक्शन टेस्ट की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, लोक निर्माण विभाग को ग्राम बानौ से कान्हाभैरा मार्ग के विभिन्न हिस्सों में सड़क क्षतिग्रस्त होने की शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने 27 अक्टूबर को सड़क का संयुक्त निरीक्षण कराया। निरीक्षण में कवर्धा संभाग के कार्यपालन अभियंता, बोड़ला उप संभाग के अनुविभागीय अधिकारी और उप अभियंता शामिल थे।

निरीक्षण में कई स्थानों पर धंसी मिली सड़क
विभागीय अधिकारियों ने सड़क की स्थिति और निर्माण गुणवत्ता का निरीक्षण किया। इस दौरान मार्ग के विभिन्न स्थानों पर पूरी चौड़ाई में सड़क धंसी हुई पाई गई। इसके अलावा कुछ स्थानों पर सड़क के बाईं ओर के हिस्से में भी धंसाव मिला। तकनीकी निरीक्षण के बाद अधिकारियों ने पाया कि क्षतिग्रस्त हिस्सों की सामान्य मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। इन हिस्सों को उखाड़कर ग्रेन्युलर सब-बेस (GSB) सतह से निर्धारित तकनीकी मापदंडों के अनुसार दोबारा सुधार करने की आवश्यकता है। विभाग का कहना है कि सड़क को निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप बनाने के लिए क्षतिग्रस्त हिस्सों का उचित तरीके से पुनर्निर्माण कराया जाना आवश्यक है।

ठेकेदार को सात दिन का अल्टीमेटम
लोक निर्माण विभाग ने सड़क निर्माण करने वाली फर्म मेसर्स कन्हैया लाल अग्रवाल को नोटिस जारी किया है। नोटिस में ठेकेदार को निर्देश दिया गया है कि वह सात दिनों के भीतर सड़क के सभी क्षतिग्रस्त हिस्सों का निर्धारित मापदंडों के अनुसार सुधार कार्य पूरा करे। इसके साथ ही मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद संबंधित हिस्सों के फोटोग्राफ्स कार्यपालन अभियंता को प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में सुधार कार्य पूरा नहीं किए जाने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मरम्मत नहीं की तो ठेकेदार के खर्च पर होगा काम
लोक निर्माण विभाग ने नोटिस में चेतावनी दी है कि यदि ठेकेदार सात दिनों के भीतर सड़क का सुधार कार्य नहीं करता है, तो विभाग अनुबंध के अनुसार रिस्क एंड कॉस्ट के आधार पर मरम्मत कराएगा। इस स्थिति में सुधार कार्य का भुगतान ठेकेदार की रोकी गई परफॉर्मेंस गारंटी राशि से किया जाएगा। इसके लिए संबंधित ठेकेदार स्वयं जिम्मेदार होगा। विभाग की इस कार्रवाई का उद्देश्य परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव से संबंधित अनुबंध की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना है।

फरवरी में बनी सड़क, 2031 तक है परफॉर्मेंस गारंटी
उल्लेखनीय है कि ग्राम बानौ से कान्हाभैरा तक 6.70 किलोमीटर लंबे मार्ग का निर्माण मेसर्स कन्हैया लाल अग्रवाल द्वारा कराया गया था। इस सड़क में पुल-पुलियों का निर्माण भी शामिल है। विभागीय जानकारी के अनुसार, सड़क निर्माण का कार्य फरवरी 2026 में पूरा हुआ था। निर्माण पूरा होने के बाद सड़क पांच वर्षों की परफॉर्मेंस गारंटी अवधि में है, जो फरवरी 2031 तक प्रभावी रहेगी। ऐसे में निर्माण पूरा होने के कुछ ही महीनों के भीतर सड़क के विभिन्न हिस्सों में धंसाव सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर सवाल उठे हैं।

दो अभियंताओं को भी नोटिस, तीन दिन में मांगी रिपोर्ट
लोक निर्माण विभाग ने केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है। निरीक्षण के दौरान निर्माण अवधि में मार्ग का पर्याप्त कम्पेक्शन नहीं होने की बात सामने आने पर विभाग ने इसे कार्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता का मामला माना है। इसके आधार पर तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी उमाप्रसाद जोशी और उप अभियंता एल.आर. छत्तरे को नोटिस जारी किया गया है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सड़क निर्माण के दौरान किए गए कम्पेक्शन टेस्ट की विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर कार्यपालन अभियंता के समक्ष प्रस्तुत करें।

रिपोर्ट नहीं दी तो विभागीय जांच की कार्रवाई
लोक निर्माण विभाग ने दोनों अभियंताओं को चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में कम्पेक्शन टेस्ट की रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने पर इसे कर्तव्य के प्रति लापरवाही और उदासीनता माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी कर विभागीय जांच प्रस्तावित की जाएगी। इसके लिए दोनों अधिकारी स्वयं जिम्मेदार होंगे। विभाग की इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता में कमी पाए जाने पर ठेकेदार के साथ संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। फिलहाल ठेकेदार को सात दिनों में सड़क सुधारने और अभियंताओं को तीन दिनों में तकनीकी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। अब निर्धारित समयसीमा में सुधार कार्य और रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के आधार पर विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।
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