बिलासपुर : छत्तीसगढ़ में सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने अंबिकापुर के राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के 448 पदों पर भर्ती रद्द करने के फैसले को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने भर्ती प्रक्रिया को उसी चरण से दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया है, जहां इसे रोका गया था। जस्टिस बिभू दत्ता गुरु की एकलपीठ ने 28 अक्टूबर 2026 को दिए फैसले में राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पात्रता, दस्तावेजों और मेरिट का परीक्षण कर नियमों के अनुसार योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने को कहा है।
448 पदों पर भर्ती का रास्ता साफ
मामला अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर वर्ष 2022 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है। महाविद्यालय ने 20 जुलाई 2022 को भर्ती विज्ञापन जारी किया था। इसके बाद वर्ष 2023 में संशोधित विज्ञापन भी जारी किए गए। भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने के बाद अभ्यर्थियों की मेरिट सूची तैयार की गई थी। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, उम्मीदवारों को 23 अगस्त 2023 को दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया था। हालांकि, बाद में प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद 23 अप्रैल 2025 को आयोजित सामान्य सभा की बैठक में भर्ती प्रक्रिया रद्द करने और छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम के माध्यम से नई भर्ती कराने का फैसला लिया गया।
अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
भर्ती रद्द होने से प्रभावित आदित्य सैनी, युवराज लिंगम, टिकेश्वर राम, सुभद्रा पैंकरा, खेल साय, गौरव गोंड, दिलेश्वर राम, सोनम सिदार, प्रमोद जायसवाल और वृंदावती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पवन श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि चयन प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी। ऐसे में बिना ठोस कारण के पूरी भर्ती रद्द करना उचित नहीं था। याचिकाकर्ताओं ने यह भी आशंका जताई कि नई भर्ती शुरू होने पर पहले आवेदन कर चुके कई उम्मीदवार आयु सीमा के कारण पात्रता से बाहर हो सकते हैं।
एक लाख आवेदन का दावा

सुनवाई के दौरान, आवेदनों की संख्या को लेकर एक बड़ा अंतर भी सामने आया। भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के फैसले में एक लाख से अधिक आवेदन प्राप्त होने और चयन प्रक्रिया में बहुत अधिक समय लगने का हवाला दिया गया था। इसके विपरीत, 19 जून 2025 को कॉलेज के डीन द्वारा चिकित्सा शिक्षा आयुक्त को भेजे गए एक पत्र में आंकड़े कुछ अलग थे। इस आधिकारिक पत्र के अनुसार, क्लास III के 63 पदों के लिए 10,374 आवेदन और क्लास IV के 385 पदों के लिए 44,961 आवेदन प्राप्त हुए थे। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि भर्ती रद्द करने के आधार के रूप में बताई गई आवेदन संख्या और महाविद्यालय के रिकॉर्ड में बड़ा अंतर है।हाईकोर्ट ने भी पाया कि राज्य शासन इस अंतर का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। हालांकि, न्यायालय ने यह निष्कर्ष नहीं निकाला कि बैठक में जानबूझकर गलत आंकड़ा दिया गया था।

हाईकोर्ट ने भर्ती रद्द करने के फैसले को बताया मनमाना
राज्य शासन की ओर से तर्क दिया गया कि भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने या दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाए जाने मात्र से किसी अभ्यर्थी को नियुक्ति का निश्चित अधिकार नहीं मिल जाता। सरकार प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर भर्ती का तरीका बदल सकती है। हाईकोर्ट ने इस कानूनी सिद्धांत को स्वीकार किया, लेकिन स्पष्ट किया कि चल रही भर्ती प्रक्रिया को बिना उचित और ठोस कारण के रद्द नहीं किया जा सकता। न्यायालय के अनुसार, संबंधित अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पहले से चल रही भर्ती प्रक्रिया में ऐसी कौन-सी खामी थी, जिसके कारण उसे समाप्त करना आवश्यक हो गया था। यह भी साबित नहीं किया गया कि पुरानी प्रक्रिया को पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। अदालत ने माना कि भर्ती रद्द करने का फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 में निहित निष्पक्षता, समानता और मनमानी से संरक्षण के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं था।
तीन महीने में भर्ती पूरी करने का निर्देश
हाईकोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 की सामान्य सभा की बैठक में लिए गए भर्ती रद्द करने संबंधी फैसले और उससे जुड़े 19 जून 2025 के पत्र को निरस्त कर दिया है। अदालत ने राज्य शासन और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि 20 जुलाई 2022 के मूल विज्ञापन और बाद के संशोधित विज्ञापनों के आधार पर भर्ती वहीं से आगे बढ़ाई जाए, जहां प्रक्रिया रोकी गई थी। अधिकारियों को उम्मीदवारों की पात्रता और दस्तावेजों की जांच करनी होगी। इसके बाद तुलनात्मक मेरिट निर्धारित कर लागू भर्ती नियमों के अनुसार नियुक्ति के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति आदेश दिए जाएंगे। न्यायालय ने यह पूरी प्रक्रिया आदेश की प्रति प्राप्त होने के तीन महीने के भीतर पूरी करने को कहा है।
क्या सभी आवेदकों को मिलेगी नौकरी?
हाईकोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि आवेदन करने वाले सभी उम्मीदवारों की नियुक्ति हो जाएगी। अदालत ने केवल पुरानी भर्ती प्रक्रिया को बहाल करने और नियमानुसार पूरा करने के निर्देश दिए हैं। नियुक्ति उम्मीदवारों की पात्रता, दस्तावेज सत्यापन, उपलब्ध पदों, मेरिट और लागू भर्ती नियमों के अनुसार ही होगी। इस फैसले से वर्षों से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को महत्वपूर्ण राहत मिली है। अब संबंधित विभागों द्वारा आदेश के पालन और चयन प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर अभ्यर्थियों की नजर रहेगी।
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