शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और दूसरी शादी करने वाले SI को 15 साल की सजा
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Jagdalpur. जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के जगदलपुर में पुलिस विभाग की छवि को प्रभावित करने वाले मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के दोषी सब इंस्पेक्टर विकेश चौहान को फास्ट ट्रैक कोर्ट (FTC) ने 15 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने पुलिसकर्मी के कृत्य को गंभीर, अनैतिक और घृणित अपराध मानते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि लोक सेवक के पद पर रहते हुए इस तरह का अपराध और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि ऐसे मामलों से समाज में गलत संदेश जाता है।
फेसबुक से हुई थी पहचान
अभियोजन के अनुसार आरोपी विकेश चौहान की पीड़िता से पहचान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के माध्यम से हुई थी। आरोपी ने खुद को तलाकशुदा बताया और पीड़िता को शादी करने का भरोसा दिलाया। इसके बाद आरोपी पीड़िता को अपने साथ जगदलपुर ले आया। अभियोजन पक्ष के मुताबिक आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में दोनों ने मंदिर में विवाह भी किया। कुछ समय बाद पीड़िता को जानकारी मिली कि आरोपी की पहली पत्नी जीवित है और दोनों के बीच तलाक नहीं हुआ है। इसके बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई।
साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने आरोपी को दुष्कर्म और पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने के मामले में दोषी पाया। अदालत ने दुष्कर्म के अपराध में आरोपी को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। वहीं दूसरी शादी करने के मामले में 5 साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा दी गई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इसके अलावा न्यायालय ने आरोपी पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
लोक सेवक होने के कारण अपराध अधिक गंभीर
फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि पुलिस विभाग में पदस्थ व्यक्ति से समाज कानून और नैतिक जिम्मेदारी की उम्मीद करता है। ऐसे पद पर रहते हुए इस तरह का अपराध करना अधिक गंभीर माना जाता है। अदालत ने कहा कि आरोपी ने विश्वास का दुरुपयोग करते हुए पीड़िता को धोखा दिया और कानून व्यवस्था बनाए रखने वाले विभाग की गरिमा को नुकसान पहुंचाया। इस मामले ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के आचरण को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। अदालत के फैसले के बाद पुलिस विभाग की ओर से भी ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और अनुशासन बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद आरोपी को सजा भुगतनी होगी। न्यायालय के इस फैसले को महिलाओं से जुड़े अपराधों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।