रायपुर में राशन की दुकानों से शक्कर गायब, 719 दुकानों के लिए सिर्फ 60 टन सप्लाई
हजारों हितग्राही परेशान
रायपुर : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन लेने वाले हितग्राहियों की परेशानी बढ़ गई है। जिले की उचित मूल्य दुकानों में चावल का वितरण तो हो रहा है, लेकिन शक्कर की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से बड़ी संख्या में राशन कार्डधारियों को अक्टूबर महीने का निर्धारित कोटा नहीं मिल पाया है। स्थिति यह है कि जिले की 719 उचित मूल्य दुकानों के लिए हर महीने लगभग 470 टन शक्कर की आवश्यकता होती है, जबकि अक्टूबर में केवल 60 टन शक्कर की आपूर्ति हो सकी। इससे अधिकांश राशन दुकानों में शक्कर का संकट बना रहा और हजारों परिवारों को बाजार से शक्कर खरीदनी पड़ी।
जरूरत के मुकाबले शक्कर की आपूर्ति कम
जानकारी के अनुसार अक्टूबर महीने में रायपुर जिले की कुल जरूरत के मुकाबले शक्कर की आपूर्ति बेहद कम रही। जिले को आवश्यक 470 टन के मुकाबले केवल 60 टन शक्कर मिली। इस हिसाब से लगभग 12.8 प्रतिशत आवश्यकता ही पूरी हो सकी, जबकि करीब 87.2 प्रतिशत की कमी रही। शक्कर की सीमित आपूर्ति के कारण अनेक हितग्राहियों को उनका निर्धारित कोटा नहीं मिल पाया। राशन दुकानों में शक्कर की कमी से विशेष रूप से उन परिवारों को परेशानी हो रही है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाली रियायती दर की शक्कर पर निर्भर रहते हैं। इन परिवारों के लिए सरकारी राशन घरेलू खर्च को नियंत्रित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में शक्कर नहीं मिलने से उन्हें बाजार से अधिक कीमत पर खरीदारी करनी पड़ रही है।
व्यवस्था में आई रुकावट
शक्कर की किल्लत उचित मूल्य दुकान संचालकों की लापरवाही के कारण नहीं, बल्कि आपूर्ति व्यवस्था में आई रुकावट से पैदा हुई है। सहकारी शक्कर कारखानों से पर्याप्त मात्रा में शक्कर उपलब्ध नहीं होने के कारण नागरिक आपूर्ति निगम जिले की जरूरत के अनुसार भंडारण नहीं कर सका। नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के अनुसार करीब 10 दिन पहले कारखाने से दो ट्रकों के माध्यम से कुल 60 टन शक्कर रायपुर भेजी गई थी। इस शक्कर को रायपुर और आरंग क्षेत्र की उचित मूल्य दुकानों में भंडारित कर हितग्राहियों को वितरित कराया गया। हालांकि, जिले की कुल मांग के मुकाबले यह मात्रा बहुत कम थी। ऐसी स्थिति में अधिक से अधिक दुकानों तक सीमित मात्रा में शक्कर पहुंचाने की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद बड़ी संख्या में हितग्राहियों को शक्कर नहीं मिल सकी।
रायपुर में 470 टन की जरूरत और पहुंची सिर्फ 60 टन
नागरिक आपूर्ति निगम रायपुर के जिला प्रबंधक त्रिनाथ रेड्डी ने बताया कि कारखाने से 60 टन शक्कर प्राप्त हुई थी। इसे रायपुर और आरंग की उचित मूल्य दुकानों में भंडारण कराकर हितग्राहियों को वितरित किया गया है। शक्कर की आपूर्ति में रुकावट अक्टूबर महीने की शुरुआत से ही सामने आने लगी थी। सामान्य व्यवस्था के अनुसार राशन दुकानों के लिए अगले महीने का आवंटन पिछले महीने ही जारी किया जाता है। अक्टूबर के लिए सितंबर में शक्कर का आवंटन होना था, लेकिन सहकारी शक्कर कारखानों में स्टॉक समाप्त होने के कारण समय पर आपूर्ति नहीं हो सकी।
719 उचित मूल्य दुकानों के हितग्राही परेशान
इसका असर अक्टूबर के शुरुआती दिनों से ही राशन दुकानों में दिखाई देने लगा। जानकारी के अनुसार महीने की शुरुआत से करीब 20 अक्टूबर तक अनेक दुकानों में शक्कर वितरण प्रभावित रहा। बाद में सीमित मात्रा में शक्कर पहुंचने के बावजूद आपूर्ति सामान्य नहीं हो सकी। रायपुर जिले की 719 उचित मूल्य दुकानों में हर महीने बड़ी संख्या में हितग्राही राशन लेने पहुंचते हैं। इनमें ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जिनके घरेलू बजट में सरकारी राशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। चावल मिलने के बावजूद शक्कर नहीं मिलने से उन्हें राशन की पूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है।
शक्कर संकट केवल रायपुर जिले तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी सहकारी शक्कर कारखानों से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण उचित मूल्य दुकानों में पर्याप्त भंडारण नहीं हो पाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कुछ जिलों में बड़ी संख्या में कार्डधारी अक्टूबर महीने की शक्कर से वंचित रह गए हैं। इस स्थिति ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली की आपूर्ति व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। राशन दुकानों तक आवश्यक सामग्री समय पर नहीं पहुंचने का सीधा असर उन परिवारों पर पड़ता है, जो सरकारी वितरण व्यवस्था के माध्यम से खाद्यान्न और अन्य आवश्यक वस्तुएं प्राप्त करते हैं।
सबसे बड़ी चिंता उन हितग्राहियों को लेकर है, जिन्हें अक्टूबर महीने की शक्कर अब तक नहीं मिली है। सामान्यतः महीने की समाप्ति के बाद राशन वितरण पोर्टल पर पिछले महीने के कोटे से संबंधित विकल्प बंद हो जाता है। ऐसे में अक्टूबर का बचा हुआ शक्कर कोटा नवंबर में मिलेगा या नहीं, इस संबंध में अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। यदि पिछले महीने का कोटा आगे देने की विशेष व्यवस्था नहीं की जाती है, तो प्रभावित हितग्राहियों को अक्टूबर की शक्कर से वंचित रहना पड़ सकता है। हालांकि, इस संबंध में खाद्य विभाग या संबंधित प्रशासन की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
नवंबर की आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता
नवंबर महीने की आपूर्ति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नवंबर के लिए शक्कर का आवंटन अब तक नहीं होने की बात सामने आई है। यदि आपूर्ति में जल्द सुधार नहीं होता है, तो राशन दुकानों में शक्कर की कमी आगे भी बनी रह सकती है। राशन कार्डधारियों के सामने यह समस्या इसलिए भी गंभीर है क्योंकि अक्टूबर का कोटा नहीं मिलने के बाद नवंबर की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को लगातार दूसरे महीने परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
रायपुर में शक्कर संकट ने यह स्पष्ट किया है कि राशन दुकानों की व्यवस्था केवल आवंटन पर नहीं, बल्कि समय पर आपूर्ति और पर्याप्त भंडारण पर भी निर्भर करती है। शक्कर कारखानों से आपूर्ति बाधित होने पर इसका असर सीधे उचित मूल्य दुकानों और वहां पहुंचने वाले हितग्राहियों पर पड़ता है। फिलहाल राशन कार्डधारियों को अक्टूबर के शेष कोटे और नवंबर के आवंटन को लेकर स्पष्ट जानकारी का इंतजार है। संबंधित विभागों द्वारा शक्कर की आपूर्ति सामान्य करने और लंबित वितरण के संबंध में निर्णय लिए जाने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।