रायपुर में नाबालिग वाहन चालकों पर यातायात पुलिस की सख्ती, 196 मामलों में कार्रवाई

छग

Update: 2026-07-30 14:51 GMT
Raipur. रायपुर। राजधानी रायपुर में सड़क सुरक्षा को लेकर यातायात पुलिस का विशेष अभियान लगातार जारी है। "सुरक्षित विद्यार्थी – सुरक्षित भविष्य" अभियान के तहत नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ जागरूकता, जांच और काउंसलिंग अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों को सड़क दुर्घटनाओं से बचाना और अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यातायात एवं प्रोटोकॉल डीसीपी डॉ. अर्चना झा के निर्देशन में यह अभियान लगातार संचालित किया जा रहा है। यातायात पुलिस का कहना है कि अभियान का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि बच्चों के जीवन को सुरक्षित बनाना और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

अभियान की शुरुआत चरणबद्ध तरीके से की गई। पहले चरण में शहर के विभिन्न विद्यालयों के प्राचार्यों की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में स्कूल प्रबंधन को नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा वाहन चलाने से होने वाले खतरों और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। साथ ही विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए सहयोग की अपील की गई। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन के साथ समन्वय बनाकर स्कूलों के बाहर विशेष जांच अभियान शुरू किया गया। अभियान के दौरान यातायात पुलिस की टीमों द्वारा स्कूल आने-जाने वाले विद्यार्थियों पर नजर रखी जा रही है। नाबालिग वाहन चालकों की पहचान कर उनके अभिभावकों को यातायात मुख्यालय बुलाकर काउंसलिंग की जा रही है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

यातायात पुलिस के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को विभिन्न विद्यालयों के बाहर चलाए गए विशेष अभियान में 29 नाबालिग वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। वहीं अभियान शुरू होने से अब तक कुल 196 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। अभियान के तहत आयोजित अभिभावक काउंसलिंग में एसीपी श्रीमती सीमा अहिरवार ने अभिभावकों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने देना केवल यातायात नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह बच्चों और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने अभिभावकों को मोटरयान अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि कम उम्र में वाहन चलाना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।

कई बार बच्चे वाहन चलाना सीख लेते हैं, लेकिन सड़क पर सही निर्णय लेने की क्षमता और अनुभव उनमें पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही कारण है कि नाबालिग वाहन चालकों के कारण दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। यातायात पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को वाहन देकर स्कूल भेजने के बजाय सुरक्षित परिवहन साधनों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करें। स्कूल बस, सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या अन्य सुरक्षित माध्यम बच्चों की यात्रा के लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा परिवार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। सड़क सुरक्षा नियमों का पालन केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। जब लोग यातायात नियमों को अपनी आदत का हिस्सा बनाएंगे, तभी सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकेगी। रायपुर यातायात पुलिस ने कहा है कि "सुरक्षित विद्यार्थी – सुरक्षित भविष्य" अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन के बीच लगातार संवाद स्थापित किया जा रहा है। पुलिस का लक्ष्य है कि हर विद्यार्थी सुरक्षित तरीके से स्कूल पहुंचे और सुरक्षित घर लौटे।
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