छत्तीसगढ़ में फर्जी डॉक्टरों पर कब कसेगा शिकंजा!
राजकोट की कार्रवाई के बाद सतर्क रहे छग स्वास्थ्य विभाग
Raipur. रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में बिना मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज करने वालों को लेकर चिंता बढ़ रही है। झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा गलत दवाएं देने और बिना पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता के उपचार करने से मरीजों की सेहत को गंभीर खतरा हो सकता है। इसी बीच गुजरात के राजकोट जिले में 17 कथित फर्जी डॉक्टरों की गिरफ्तारी ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अब रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे प्रमुख जिलों में भी अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों की जांच और चिकित्सकों की योग्यता की पुष्टि के लिए विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में भी जांच की जरूरत
गुजरात की कार्रवाई के बाद छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों में संचालित निजी क्लीनिकों और बिना पंजीकरण इलाज करने वालों की निगरानी का सवाल उठ रहा है। राजधानी रायपुर के अलावा बिलासपुर, दुर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में भी यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि मरीजों का उपचार करने वाले व्यक्तियों के पास मान्य चिकित्सकीय योग्यता और आवश्यक पंजीकरण हो। बिना अधिकृत डिग्री और लाइसेंस के इलाज करने वालों की वास्तविक संख्या का कोई ताजा सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में व्यापक निरीक्षण से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गलत इलाज से मरीजों की जान को खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के इलाज करना गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है। गलत दवाएं देने, आवश्यकता के बिना एंटीबायोटिक इस्तेमाल करने, असुरक्षित इंजेक्शन लगाने या बीमारी की सही पहचान नहीं होने से मरीज की स्थिति बिगड़ सकती है। कई गंभीर बीमारियों में समय पर विशेषज्ञ उपचार नहीं मिलने से जान जाने का खतरा भी बढ़ जाता है। हालांकि, किसी विशेष मरीज की मृत्यु को झोलाछाप डॉक्टर के इलाज से जोड़ने के लिए चिकित्सकीय जांच और ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।
रायपुर में पहले भी हुई कार्रवाई
छत्तीसगढ़ में अवैध चिकित्सा अभ्यास के खिलाफ कार्रवाई के उदाहरण सामने आ चुके हैं। फरवरी 2026 में रायपुर के धरसींवा क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग ने शिकायत मिलने पर एक कथित अवैध क्लीनिक को सील किया था। यह कार्रवाई बताती है कि शिकायतों की जांच और स्वास्थ्य विभाग की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है। हालांकि, एक मामले के आधार पर पूरे प्रदेश में अवैध क्लीनिकों की संख्या का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।
स्वास्थ्य विभाग को चलाना चाहिए विशेष अभियान
स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से क्लीनिकों का निरीक्षण करें। जांच में चिकित्सकों की डिग्री, पंजीकरण, उपलब्ध दवाओं, इंजेक्शन के उपयोग और उपचार संबंधी नियमों के पालन की पुष्टि की जानी चाहिए। बिना वैध योग्यता के इलाज करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होने से मरीजों को असुरक्षित चिकित्सा से बचाने में मदद मिलेगी।
गुजरात में 17 फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार
गुजरात के राजकोट जिले में पुलिस ने 23 अक्टूबर 2026 को बिना वैध मेडिकल डिग्री के एलोपैथिक इलाज करने के आरोप में 17 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। राजकोट ग्रामीण पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप टीम ने अलग-अलग इलाकों में अभियान चलाकर यह कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, आरोपी बिना आवश्यक योग्यता के क्लीनिक संचालित कर रहे थे। इनके कब्जे से दवाएं, इंजेक्शन, एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड और चिकित्सा उपकरण सहित लगभग 3.05 लाख रुपये की सामग्री जब्त की गई।
मरीज भी रहें सतर्क
लोगों को इलाज कराने से पहले डॉक्टर की मान्यता प्राप्त योग्यता और पंजीकरण की जानकारी जांचनी चाहिए। गंभीर बीमारी की स्थिति में अधिकृत अस्पताल या योग्य चिकित्सक से उपचार लेना जरूरी है। गुजरात में हुई कार्रवाई के बाद अब सवाल यह है कि छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य विभाग कब व्यापक जांच अभियान चलाकर अवैध चिकित्सा अभ्यास पर प्रभावी रोक लगाएगा।