गोवा राजनीति को बड़ा झटका, जेनिफर मोन्सेरेट के निधन के बाद बदला विधानसभा का गणित

गोवा विधानसभा में बदला सियासी समीकरण, जेनिफर मोन्सेरेट के निधन से भाजपा की संख्या घटी

Update: 2026-07-20 08:00 GMT

Goa: गोवा की वरिष्ठ भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री जेनिफर मोन्सेरेट के निधन के बाद राज्य की राजनीतिक तस्वीर में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या अब 38 रह गई है, जबकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों की संख्या घटकर 26 हो गई है।

जेनिफर मोन्सेरेट तालेगांव विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती थीं। लंबे समय से अस्वस्थ चल रही 56 वर्षीय नेता का रविवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन पर मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया।
विधानसभा की संख्या कैसे हुई 38?
गोवा विधानसभा में कुल 40 सीटें हैं। जेनिफर मोन्सेरेट के निधन से तालेगांव सीट रिक्त हो गई। इससे पहले भी एक अन्य सीट खाली होने के कारण अब सदन की प्रभावी सदस्य संख्या 38 रह गई है। इसी के साथ भाजपा का आंकड़ा भी 27 से घटकर 26 पर पहुंच गया।
सरकार पर क्या पड़ेगा असर?
हालांकि भाजपा की संख्या में कमी आई है, लेकिन इससे राज्य सरकार के बहुमत पर तत्काल कोई संकट नहीं माना जा रहा है। भाजपा के पास अभी भी स्पष्ट बहुमत है और उसे सहयोगी दलों व निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है। ऐसे में सरकार की स्थिरता पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
कौन थीं जेनिफर मोन्सेरेट?
जेनिफर मोन्सेरेट गोवा की प्रमुख महिला नेताओं में शामिल थीं। वह लगातार तीन बार तालेगांव विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। वर्ष 2019 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने प्रमोद सावंत सरकार में राजस्व, सूचना प्रौद्योगिकी, श्रम एवं रोजगार मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली थी।
उपचुनाव होगा या नहीं?
गोवा में अगला विधानसभा चुनाव 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित है। चुनाव नजदीक होने और कानूनी प्रावधानों के कारण तालेगांव सीट पर तत्काल उपचुनाव होने की संभावना कम मानी जा रही है। ऐसे में यह सीट सामान्य विधानसभा चुनाव तक रिक्त रह सकती है।
राजनीतिक महत्व
जेनिफर मोन्सेरेट का निधन केवल भाजपा के लिए ही नहीं, बल्कि गोवा की राजनीति के लिए भी एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। वह राज्य की प्रभावशाली महिला नेताओं में गिनी जाती थीं और तालेगांव क्षेत्र में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़ थी। उनके निधन के बाद भविष्य में इस सीट पर चुनावी मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
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