गांधीनगर। गुजरात के ऐतिहासिक लोथल में विकसित किए जा रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (National Maritime Heritage Complex) को लेकर राज्य सरकार ने निर्माण कार्यों की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने परियोजना स्थल का दौरा कर विभिन्न निर्माण कार्यों और प्रस्तावित सुविधाओं की प्रगति का जायजा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकास भी, विरासत भी' के दृष्टिकोण के अनुरूप तैयार की जा रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य भारत के हजारों वर्ष पुराने समुद्री इतिहास, व्यापारिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है।मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने निरीक्षण के दौरान राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर के पहले और दूसरे चरण में विकसित की जा रही सुविधाओं के बारे में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परियोजना से जुड़े निर्माण कार्यों और विभिन्न व्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।
सिंधु घाटी सभ्यता की विरासत को मिलेगी नई पहचान
गुजरात का लोथल सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। यह प्राचीन भारत की व्यापारिक और समुद्री गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।यहां पुरातात्विक खुदाई के दौरान प्राचीन नगर नियोजन, व्यापारिक गतिविधियों और जलमार्गों के उपयोग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण मिले थे।इसी ऐतिहासिक महत्व को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर विकसित करने की योजना बनाई है।इस परिसर के माध्यम से लोगों को हड़प्पा सभ्यता से लेकर आधुनिक भारत तक के समुद्री इतिहास की जानकारी मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्यों की समीक्षा की
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने परियोजना स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्यों और विकसित की जा रही सुविधाओं का निरीक्षण किया।उन्होंने अधिकारियों से पहले और दूसरे चरण की परियोजनाओं के बारे में जानकारी ली।इस दौरान संग्रहालय, प्रदर्शनी दीर्घाओं और पर्यटकों के लिए प्रस्तावित सुविधाओं से जुड़े कार्यों की स्थिति की समीक्षा की गई।इस महत्वाकांक्षी परिसर को भविष्य में देश-विदेश के पर्यटकों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बनाने की योजना है।
पहले चरण में बनेंगी आधुनिक संग्रहालय दीर्घाएं
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर का विकास अलग-अलग चरणों में किया जा रहा है।परियोजना के पहले चरण के अंतर्गत आधुनिक संग्रहालय और विभिन्न विषयों पर आधारित दीर्घाएं विकसित की जाएंगी।पहले चरण के भाग 1A में छह संग्रहालय दीर्घाएं प्रस्तावित हैं। इनमें भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल से संबंधित विशेष दीर्घा भी शामिल होगी।इसके अलावा प्राचीन लोथल नगर का प्रतिरूप, जल आधारित प्रदर्शनी क्षेत्र और जेटी वॉकवे जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।भाग 1B में आठ अतिरिक्त दीर्घाओं, लाइटहाउस संग्रहालय और अन्य पर्यटक सुविधाओं की योजना है।
दूसरे चरण में विकसित होंगे थीम पार्क
परियोजना के दूसरे चरण में पर्यटकों के लिए कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।इनमें तटीय राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के विशेष मंडप, समुद्री विषय पर आधारित रिसॉर्ट, मनोरंजन पार्क और प्राचीन लोथल नगर का पुनर्निर्मित स्वरूप शामिल है।इसके अलावा समुद्री अनुसंधान एवं प्रशिक्षण से जुड़े संस्थान तथा अन्य सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है।परिसर में समुद्री और नौसैनिक थीम पार्क, जलवायु परिवर्तन थीम पार्क, स्मारक पार्क और मनोरंजन पार्क प्रस्तावित हैं।इन सुविधाओं के माध्यम से पर्यटक भारत के समुद्री इतिहास को आधुनिक तकनीक और प्रदर्शनी के जरिए समझ सकेंगे।
परियोजना से रोजगार और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
केंद्र सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।परियोजना के विकास से लगभग 22 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान व्यक्त किया गया है।इसमें करीब 15 हजार प्रत्यक्ष और सात हजार अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल हैं।परिसर के विकसित होने से स्थानीय व्यापारियों, पर्यटन सेवाओं और अन्य संबंधित गतिविधियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।
निर्माण कार्यों में दर्ज हुई महत्वपूर्ण प्रगति
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय की सितंबर 2026 की जानकारी के अनुसार, परियोजना के पहले चरण के भाग 1A में 82 प्रतिशत से अधिक भौतिक प्रगति दर्ज की गई थी।इस परियोजना में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी बढ़ाया जा रहा है। सितंबर तक 13 देशों के साथ सहयोग समझौते किए जा चुके थे।इन प्रयासों का उद्देश्य भारतीय समुद्री विरासत के संरक्षण और प्रदर्शन में अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को मजबूत करना है।
विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी
राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को भारत के प्रमुख सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में विकसित करने की योजना है।परियोजना पूरी होने के बाद यहां आने वाले पर्यटक प्राचीन समुद्री व्यापार, जहाज निर्माण, नौवहन तकनीक और आधुनिक भारतीय समुद्री विकास से जुड़ी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा निर्माण कार्यों की समीक्षा को इस परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।यह परिसर भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी को देश के समृद्ध इतिहास से परिचित कराने का माध्यम बनेगा।