अहमदाबाद। गुजरात में एक बार फिर चांदीपुरा वायरस (Chandipura Virus - CHPV) का खतरा बढ़ता नजर आ रहा है। पिछले दो महीने से भी कम समय में राज्य में इस जानलेवा वायरस से 14 साल से कम उम्र के 25 बच्चों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा कई संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 10 अगस्त तक गुजरात में चांदीपुरा वायरस के 225 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से कई मामलों की जांच की जा रही है। पड़ोसी राज्य राजस्थान से भी कुछ मामले सामने आए हैं, जिससे दोनों राज्यों में निगरानी बढ़ा दी गई है।

चांदीपुरा वायरस एक दुर्लभ लेकिन गंभीर संक्रमण है, जो खासतौर पर बच्चों को प्रभावित करता है। यह वायरस तेजी से बढ़ सकता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, शुरुआती लक्षणों की पहचान और तुरंत चिकित्सा सहायता मिलने से खतरे को कम किया जा सकता है।

गुजरात में इस वायरस की वापसी ने स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया है। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध मरीजों की पहचान करने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2024 में भी चांदीपुरा वायरस ने गुजरात में गंभीर स्थिति पैदा कर दी थी। उस दौरान राज्य में कम से कम 60 बच्चों की मौत हुई थी, जबकि राजस्थान में भी तीन बच्चों की जान गई थी। 2024 का यह प्रकोप पिछले दो दशकों में सबसे घातक घटनाओं में से एक माना गया था।

दो साल के अंतराल के बाद वायरस की दोबारा सक्रियता ने चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के दौरान मच्छरों और कीटों की संख्या बढ़ने से इस तरह के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई यानी बालू मक्खी और कुछ अन्य कीड़ों के जरिए फैल सकता है। यह वायरस बच्चों के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। इसके संक्रमण में तेज बुखार, उल्टी, दौरे पड़ना, बेहोशी और मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बच्चों में बुखार या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज मिलने से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

गुजरात सरकार ने प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य टीमों को सक्रिय किया है। संदिग्ध मरीजों की जांच, निगरानी और इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। अस्पतालों में भी जरूरी तैयारियां रखने के निर्देश दिए गए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि चांदीपुरा वायरस के मामलों में बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। माता-पिता को बच्चों की साफ-सफाई, आसपास के वातावरण और कीड़ों से बचाव के उपायों का ध्यान रखना चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। लोगों को घरों के आसपास साफ-सफाई रखने, पानी जमा न होने देने और कीटों से बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है।

राजस्थान में भी स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है, क्योंकि गुजरात से सटे इलाकों में संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है और संदिग्ध मामलों पर नजर रखी जा रही है।

चांदीपुरा वायरस को लेकर सबसे बड़ी चुनौती इसका तेजी से गंभीर रूप लेना है। कई मामलों में बच्चों की हालत अचानक बिगड़ सकती है, इसलिए शुरुआती पहचान बेहद जरूरी मानी जाती है।

फिलहाल गुजरात में स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। संदिग्ध मामलों की जांच और प्रभावित क्षेत्रों में रोकथाम के उपाय जारी हैं। आने वाले दिनों में वायरस के प्रसार को रोकना प्रशासन और स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होगी।

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