जामनगर। गुजरात का जामनगर शहर आयुर्वेदिक शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। यहां स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टीचिंग एंड रिसर्च इन आयुर्वेद (ITRA) भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्थान में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ रूस और जापान जैसे देशों से भी विद्यार्थी आयुर्वेद का अध्ययन करने पहुंच रहे हैं। इसके अलावा प्राकृतिक और पारंपरिक उपचार पद्धतियों में रुचि रखने वाले विदेशी मरीज भी यहां उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।
राष्ट्रीय महत्व का संस्थान बना आयुर्वेद की पहचान
जामनगर स्थित ITRA को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा प्राप्त है। यह संस्थान आयुर्वेदिक चिकित्सा शिक्षा, वैज्ञानिक अनुसंधान और उपचार सुविधाओं के लिए जाना जाता है। यहां विद्यार्थियों को आयुर्वेद के प्राचीन सिद्धांतों के साथ आधुनिक अनुसंधान पद्धतियों की जानकारी भी दी जाती है।संस्थान का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने के साथ उसे वैज्ञानिक अध्ययन और शोध के माध्यम से आगे बढ़ाना है। यहां आयुर्वेदिक औषधियों, जीवनशैली, खान-पान और विभिन्न उपचार पद्धतियों से जुड़े विषयों पर अध्ययन किया जाता है।
पंचकर्म और कायाकल्प चिकित्सा की विशेष सुविधाएं
ITRA में पंचकर्म और कायाकल्प चिकित्सा जैसी आयुर्वेदिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध हैं। पंचकर्म आयुर्वेद की एक पारंपरिक उपचार पद्धति है, जिसमें व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार विभिन्न प्रक्रियाओं का उपयोग किया जाता है।वहीं कायाकल्प चिकित्सा में स्वस्थ जीवनशैली, आहार-विहार और शरीर की देखभाल से जुड़े उपायों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। संस्थान में इन उपचार पद्धतियों के बारे में विद्यार्थियों को सैद्धांतिक और व्यावहारिक जानकारी दी जाती है।हालांकि विशेषज्ञों की उचित सलाह के बिना किसी भी आयुर्वेदिक उपचार को अपनाना सही नहीं माना जाता। उपचार का चयन व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकताओं के आधार पर किया जाना चाहिए।
रूस और जापान के विद्यार्थियों में बढ़ रही दिलचस्पी
जामनगर का यह संस्थान अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रहा है। रूस और जापान जैसे देशों से आने वाले छात्र भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं।विदेशी विद्यार्थियों की दिलचस्पी केवल आयुर्वेदिक उपचार सीखने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे इसके पीछे मौजूद पारंपरिक ज्ञान और स्वास्थ्य संबंधी अवधारणाओं को भी समझने का प्रयास कर रहे हैं।कुछ विद्यार्थी यह जानने में भी रुचि दिखा रहे हैं कि आयुर्वेद के सिद्धांतों और उपयुक्त उपचार पद्धतियों का उपयोग अपने देशों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में किस प्रकार किया जा सकता है।
रूसी छात्रा ने बताया खान-पान का महत्व
संस्थान में अध्ययन कर रहीं रूस की छात्रा डॉ. नान्या ज़ैतान ने आयुर्वेद में खान-पान और स्वास्थ्य के बीच संबंध को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से मरीजों को रोजमर्रा के भोजन और उसके गुणों के बारे में जागरूक किया जा सकता है।उनके अनुसार, जब लोगों को अपने खान-पान की आदतों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की बेहतर जानकारी मिलती है, तो वे अपनी जीवनशैली से जुड़े अधिक समझदारी भरे फैसले ले सकते हैं।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने में आहार की जानकारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
भारतीय पारंपरिक चिकित्सा को मिल रही वैश्विक पहचान
आयुर्वेद में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि भारतीय पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान के प्रति वैश्विक आकर्षण को दर्शाती है। जामनगर का ITRA इस ज्ञान को शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सा प्रशिक्षण के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का अवसर प्रदान कर रहा है।इससे विदेशी विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक स्वास्थ्य संबंधी दृष्टिकोण को समझने का अवसर भी मिल रहा है।जामनगर में आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान गतिविधियों का विस्तार भारत की पारंपरिक चिकित्सा विरासत को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, वैज्ञानिक अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग के जरिए आयुर्वेद की विभिन्न पद्धतियों की प्रभावशीलता और सुरक्षा को बेहतर ढंग से समझने की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं।संस्थान की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार, इसके अंतरराष्ट्रीय आयुर्वेद अध्ययन केंद्र में 43 देशों के 174 विद्यार्थी तीन महीने का परिचयात्मक पाठ्यक्रम पूरा कर चुके हैं। वहीं, अलग-अलग देशों के विद्यार्थी स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों से भी जुड़े हैं। यह आंकड़े आयुर्वेदिक शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय विस्तार को रेखांकित करते हैं।