कूच : गुजरात के कच्छ जिले में स्थित कांडला स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZ) में दो अलग-अलग औद्योगिक इकाइयों में भीषण आग लगने की घटनाओं से हड़कंप मच गया। आग की लपटें और आसमान में उठता धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दिया। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई टीमें मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। इन घटनाओं ने औद्योगिक क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।कच्छ। गुजरात के कच्छ जिले के गांधीधाम स्थित कांडला स्पेशल इकोनॉमिक जोन (KASEZ) में अलग-अलग दिनों में दो कंपनियों में आग लगने की घटनाएं सामने आईं। पहली घटना 25 मार्च 2026 को एक गारमेंट कंपनी में हुई, जबकि दूसरी घटना 4 अप्रैल 2026 को टेक्सटाइल से जुड़ी एक औद्योगिक इकाई में हुई। दोनों घटनाओं के दौरान दमकल विभाग को आग पर काबू पाने के लिए अभियान चलाना पड़ा। अप्रैल की घटना में चार दमकल गाड़ियों की मदद से आग पर नियंत्रण पाया गया। प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई थी।
टेक्सटाइल कंपनी में अचानक भड़की भीषण आग
जानकारी के अनुसार, 4 अप्रैल की शाम कांडला SEZ में स्थित टेक्सटाइल कंपनी की एक इकाई में अचानक आग लग गई। रिपोर्टों में इस कंपनी की पहचान टेक्सवूल और टेक्स पॉलीमर के नाम से की गई है। बताया गया कि संबंधित इकाई में पुराने कपड़ों से जुड़ा काम किया जाता था।आग लगने के बाद परिसर से धुएं का गुबार उठने लगा। आग की गंभीरता को देखते हुए तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी गई। कपड़ा उद्योग से जुड़ी सामग्री के कारण आग फैलने की आशंका को ध्यान में रखते हुए अग्निशमन कर्मचारियों ने तेजी से कार्रवाई शुरू की।औद्योगिक क्षेत्र में मौजूद अन्य इकाइयों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण थी। दमकलकर्मियों ने आग को सीमित रखने के साथ आसपास की संपत्तियों को संभावित नुकसान से बचाने पर ध्यान केंद्रित किया।
चार दमकल गाड़ियों ने संभाला मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही कांडला SEZ, स्थानीय नगर निगम और दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) की दमकल टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। आग की भयावहता को देखते हुए चार दमकल गाड़ियों को अभियान में लगाया गया।दमकलकर्मियों ने लगातार पानी की बौछार कर आग पर काबू पाने का प्रयास किया। विभिन्न विभागों की टीमों ने समन्वय बनाकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया।अधिकारियों के मुताबिक, दमकल विभाग की तत्परता के कारण आग को नियंत्रित कर लिया गया और बड़ी दुर्घटना टल गई। हालांकि, घटना में कितनी संपत्ति को नुकसान पहुंचा, इसकी सटीक जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं हो सकी।
मार्च में भी गारमेंट कंपनी में लगी थी आग
कांडला SEZ में आग लगने की यह पहली घटना नहीं थी। इससे पहले 25 मार्च 2026 को इसी औद्योगिक क्षेत्र की एक गारमेंट कंपनी में भीषण आग लगी थी।उस दौरान आग लगने के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई थी। घटनास्थल से उठता काला धुआं काफी दूर तक दिखाई दिया था। आग की सूचना मिलने पर दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने की कार्रवाई शुरू की गई।इस घटना की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए थे, जिनमें औद्योगिक परिसर से धुआं उठता दिखाई दिया था। मार्च की घटना में आग लगने के वास्तविक कारण और नुकसान को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं थी।
आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं
दोनों घटनाओं में आग लगने के वास्तविक कारणों की स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई थी।औद्योगिक इकाइयों में आग लगने के संभावित कारणों में बिजली का शॉर्ट सर्किट, मशीनरी में तकनीकी खराबी, ज्वलनशील सामग्री का अनुचित भंडारण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी शामिल हो सकते हैं। हालांकि, कांडला की इन घटनाओं में इनमें से किसी कारण की पुष्टि नहीं हुई है।आग लगने के पीछे की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच और घटनास्थल पर मौजूद परिस्थितियों का विश्लेषण महत्वपूर्ण होता है।
औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
कांडला स्पेशल इकोनॉमिक जोन गुजरात के प्रमुख औद्योगिक और निर्यात क्षेत्रों में शामिल है। यहां विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित होती हैं।कम समय के अंतराल में दो कंपनियों में आग लगने की घटनाओं ने औद्योगिक सुरक्षा उपायों की समीक्षा की आवश्यकता को सामने रखा है।कपड़ा उद्योग से जुड़ी इकाइयों में बड़ी मात्रा में कच्चा माल, तैयार उत्पाद और पैकेजिंग सामग्री रखी जाती है। ऐसी सामग्री में आग लगने पर स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।इसलिए औद्योगिक इकाइयों में नियमित फायर ऑडिट, अग्निशमन उपकरणों की जांच और कर्मचारियों को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने का प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी है।
आर्थिक नुकसान का आकलन भी महत्वपूर्ण
आग लगने से प्रभावित औद्योगिक इकाइयों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मशीनरी, कच्चे माल, तैयार उत्पाद और भवन को नुकसान होने पर उत्पादन गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।इसके अतिरिक्त आपूर्ति व्यवस्था और कर्मचारियों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है।हालांकि, कांडला SEZ की इन दोनों घटनाओं में कुल आर्थिक नुकसान का प्रमाणित आंकड़ा सामने नहीं आया था। किसी कंपनी में उत्पादन कितने समय तक प्रभावित रहा, इस बारे में भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।
भविष्य में ऐसे हादसों को रोकना बड़ी चुनौती
कांडला SEZ में हुई आग की घटनाओं ने एक बार फिर औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत को उजागर किया है।विशेषज्ञों के अनुसार, कंपनियों में पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, पानी की उपलब्धता और सुरक्षित निकासी मार्ग होना आवश्यक है। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए नियमित मॉक ड्रिल और आपातकालीन प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण है।फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर अप्रैल की घटना में आग पर काबू पा लिया गया था और किसी जनहानि की पुष्टि नहीं हुई थी। औद्योगिक सुरक्षा के लिहाज से दोनों घटनाएं भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए सतर्कता बरतने की जरूरत का संकेत देती हैं।