गांधीनगर। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार, 14 अक्टूबर को विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने विपक्ष के नेताओं पर मतदाता सूची में सुधार को लेकर विरोधाभासी रुख अपनाने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन राजनीतिक नेताओं ने पहले मतदाता सूची से फर्जी नाम और डुप्लीकेट प्रविष्टियां हटाने की मांग की थी, वही नेता अब भारत निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का विरोध कर रहे हैं।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए भूपेंद्र पटेल ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सही और त्रुटिरहित मतदाता सूची का होना आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष से सवाल किया कि जब मतदाता सूची की खामियां दूर करने की मांग पहले से की जा रही थी, तो अब उसी उद्देश्य से संचालित प्रक्रिया का विरोध क्यों किया जा रहा है।
विपक्ष के रवैये पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि विपक्षी नेताओं ने कई अवसरों पर मतदाता सूची में गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया है। इनमें डुप्लीकेट नामों, फर्जी प्रविष्टियों और मतदाता रिकॉर्ड में मौजूद अन्य त्रुटियों को दूर करने की मांग शामिल रही है।उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अब उसी प्रक्रिया का विरोध कर रहा है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है।पटेल ने कहा कि एक तरफ त्रुटिरहित मतदाता सूची की मांग करना और दूसरी तरफ उसे तैयार करने के लिए अपनाई जा रही कानूनी प्रक्रिया का विरोध करना विरोधाभासी स्थिति है।उन्होंने विपक्षी दलों से मतदाता सूची संशोधन को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की आवश्यकता जताई।
SIR को बताया कानूनी प्रक्रिया
भूपेंद्र पटेल ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि यह चुनाव आयोग की वैधानिक प्रक्रिया है।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में मृत व्यक्तियों, स्थानांतरित मतदाताओं और एक से अधिक बार दर्ज नामों की पहचान करना आवश्यक है।मुख्यमंत्री के अनुसार, मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाताओं की सही जानकारी दर्ज होने से चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलती है।उन्होंने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य बताया। हालांकि, उन्होंने विपक्ष के विरोध को राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित बताया है, जो उनका राजनीतिक आरोप है।
गुजरात में मतदाता सूची से हटाए गए नामों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने हाल ही में गुजरात में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान हटाए गए नामों से संबंधित आंकड़ों का भी उल्लेख किया था।उन्होंने दावा किया था कि राज्य में करीब 14.5 प्रतिशत मतदाता प्रविष्टियां हटाई गई हैं। उनके अनुसार, इनमें अधिकांश प्रविष्टियां मृत व्यक्तियों, दूसरे स्थानों पर जा चुके मतदाताओं और डुप्लीकेट नामों से संबंधित थीं।उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया था, जिनमें मतदाता सूची से चुनिंदा लोगों के नाम हटाए जाने की बात कही गई थी।हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए इन आंकड़ों और उनके आधार पर किए गए दावों को चुनाव आयोग के विस्तृत रिकॉर्ड के साथ समझना आवश्यक है
SIR के खिलाफ विपक्ष का विरोध जारी
दूसरी ओर, कांग्रेस और विपक्षी INDIA गठबंधन विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में सुधार जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाना चाहिए।कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने आरोप लगाया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में गरीब, प्रवासी और आवश्यक दस्तावेजों की कमी का सामना करने वाले मतदाताओं को कठिनाइयां हो सकती हैं।विपक्ष ने चुनाव आयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हटाए गए नामों की समीक्षा के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की है।इस मुद्दे पर विपक्षी दलों की ओर से विरोध प्रदर्शन भी किए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मतदाता सूची विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विरोध के साथ कानूनी प्रक्रिया भी जारी है।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।विपक्षी नेताओं की याचिका में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की प्रक्रिया, पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 15 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना है।
चुनावी पारदर्शिता को लेकर दोनों पक्षों के अलग तर्क
भूपेंद्र पटेल का कहना है कि मतदाता सूची की त्रुटियां दूर करना चुनावी व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने विपक्ष पर इस उद्देश्य को लेकर अपना रुख बदलने का आरोप लगाया है।वहीं, विपक्ष का तर्क है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के साथ पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही जरूरी है।फिलहाल SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन जारी हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री की ताजा प्रतिक्रिया के बाद मतदाता सूची संशोधन के उद्देश्य, प्रक्रिया और उसके प्रभाव को लेकर सत्तापक्ष तथा विपक्ष के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं।