हरियाणा के सरकारी कॉलेजों से 2020 बैच के MBBS ग्रेजुएट्स पोस्टग्रेजुएट (PG) एडमिशन को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्य की 'बॉन्ड पॉलिसी' के तहत उनके ओरिजिनल शैक्षणिक दस्तावेज अभी भी कॉलेजों के पास ही हैं।
PGIMS, रोहतक और अन्य सरकारी कॉलेजों के कुछ ग्रेजुएट्स ने हरियाणा के 'डायरेक्टोरेट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च' (DMER) और रोहतक स्थित 'पंडित बीडी शर्मा यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज' को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने ओरिजिनल दस्तावेज वापस दिलाने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है, क्योंकि NEET-PG काउंसलिंग के 'ऑल-इंडिया कोटा' के जरिए PG कोर्सेज में एडमिशन लेने के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत है।
उम्मीदवारों ने चेतावनी दी है कि अगर यह मुद्दा हल नहीं हुआ, तो वे तुरंत राहत पाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उनका कहना है कि वे अपनी कड़ी मेहनत से हासिल की गई सीटों को खोने का जोखिम नहीं उठा सकते।
PGIMS, रोहतक के एक MBBS ग्रेजुएट, अक्षत मित्तल ने बताया, "काउंसलिंग का पहला राउंड पूरा हो चुका है। इसमें 2020 बैच के लगभग 150 MBBS ग्रेजुएट्स को अलग-अलग राज्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 'ऑल-इंडिया कोटा' के तहत PG सीटें मिली हैं। अब इन चुने गए उम्मीदवारों से कहा गया है कि वे अपना एडमिशन पक्का करने के लिए 25 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच अपने ओरिजिनल दस्तावेज जमा करें।