अमेरिका से गिरोह चलाने का आरोप, हिमांशु भाऊ के खिलाफ 64 मामलों का उल्लेख
फर्जी पहचान से विदेश पहुंचा हिमांशु भाऊ
रोहतक: अमेरिका में पकड़े गए हरियाणा के वांछित आरोपी हिमांशु उर्फ भाऊ के विदेश भागने और वहां से आपराधिक नेटवर्क संचालित करने से जुड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से प्रकाशित विवरण के मुताबिक, उसने उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद निवासी कुनाल सिंह के नाम पर कथित तौर पर फर्जी पासपोर्ट हासिल किया था। हिमांशु पर विदेश में रहकर भारत में हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी जैसे अपराधों का नेटवर्क चलाने का आरोप है। उसके खिलाफ 64 मामले दर्ज होने का उल्लेख किया गया है।
हिमांशु भाऊ और एक अन्य वांछित आरोपी नीरज फरीदपुरिया को अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने लास वेगास में पकड़ा है। हरियाणा विशेष कार्य बल से मिली जानकारी के आधार पर कार्रवाई किए जाने की सूचना सामने आई है। आकाशवाणी के विवरण के अनुसार, दोनों को 22 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया और इस कार्रवाई में अमेरिकी आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन एजेंसी की मदद मिली। भारतीय एजेंसियां अब दोनों को भारत वापस लाने के लिए संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं।
हिमांशु हरियाणा के रोहतक जिले के रिटौली गांव का रहने वाला है। उसके कथित नेटवर्क की गतिविधियां दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के कई जिलों तक फैली होने की जानकारी है। पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित ताजा विवरण में गिरोह से करीब 181 सहयोगियों के जुड़े होने का दावा किया गया है। हालांकि, गिरोह से संबंध का आरोप और प्रत्येक व्यक्ति की आपराधिक भूमिका अलग विषय हैं। संबंधित मामलों में जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।
दूसरे नाम से पासपोर्ट हासिल करने का आरोप
जांच संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, हिमांशु ने अगस्त 2022 में जाली पहचान दस्तावेजों की मदद से बरेली से पासपोर्ट हासिल किया था। आरोप है कि उसके नाम पर लुकआउट सर्कुलर जारी होने से पहले वह भारत छोड़ चुका था। पासपोर्ट के लिए कुनाल सिंह की पहचान इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में कुनाल सिंह की किसी आपराधिक संलिप्तता की पुष्टि नहीं है। पहचान के कथित इस्तेमाल को संबंधित व्यक्ति की मिलीभगत का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
देश छोड़ने के बाद हिमांशु के पहले पुर्तगाल पहुंचने और बाद में अमेरिका जाने की जानकारी प्रकाशित हुई है। भारतीय पुलिस को संदेह रहा है कि विदेश में रहने के दौरान भी वह स्थानीय सहयोगियों के माध्यम से अपराधों के निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों ने उसके कथित नेटवर्क को धमकी, जबरन वसूली और गोलीबारी की घटनाओं से जोड़ा है। अमेरिका में पकड़े जाने के बाद उसकी पहचान, यात्रा दस्तावेज और दूसरे आरोपियों से संपर्क जांच के महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं।
सुधार गृह से भागने के बाद बढ़ी तलाश
हिमांशु का नाम हिसार के किशोर सुधार गृह से भागने की घटना में भी सामने आया था। वर्ष 2020 की इस घटना के बाद वह लंबे समय तक फरार रहा। उसके खिलाफ विभिन्न थानों में मामले दर्ज होते गए और पुलिस उसकी तलाश करती रही। अगस्त 2023 में इंटरपोल का रेड नोटिस जारी होने की जानकारी भी है। इसके बाद विदेश में उसका ठिकाना तलाशने के लिए भारतीय एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वय किया। अमेरिकी हिरासत तक पहुंचने में भारतीय अधिकारियों द्वारा साझा सूचनाओं की भूमिका बताई गई है।
दर्ज मामलों के आंकड़ों में अंतर
हिमांशु के खिलाफ दर्ज मामलों की संख्या को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े दिए गए हैं। ताजा विवरण में 64 मामलों का उल्लेख है, जबकि अन्य खबरों में 61 मामले अथवा कुछ जिलों में दर्ज 18 मामलों की जानकारी दी गई है। इन संख्याओं का समय, क्षेत्र और गणना का आधार समान होने की पुष्टि नहीं है। इसलिए 64 मामलों के आंकड़े को संबंधित पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित प्रकाशित जानकारी के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए। सभी मामलों की एकीकृत आधिकारिक सूची सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।
नीरज फरीदपुरिया भी पकड़ा गया
हिमांशु के साथ पकड़े गए नीरज फरीदपुरिया पर भी हत्या, हत्या के प्रयास और रंगदारी से जुड़े आरोप हैं। पुलिस फाइलों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, उसने कपिल शर्मा के नाम पर कथित तौर पर हासिल किए गए पासपोर्ट से विदेश यात्रा की थी। उसका नाम वर्ष 2019 में कांग्रेस नेता विकास चौधरी की हत्या की साजिश से जुड़ी जांच में भी आया था। भारतीय अधिकारियों का आरोप है कि दोनों विदेश में रहकर मिलकर काम कर रहे थे। अमेरिका में हिरासत में लिया जाना और भारत वापस लाया जाना अलग चरण हैं। दोनों की वापसी अमेरिकी आव्रजन कार्यवाही, संबंधित आदेशों और लागू कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी। अभी भारत पहुंचने की निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं है। भारतीय एजेंसियों के लिए उनकी वापसी विभिन्न मामलों की जांच आगे बढ़ाने का अवसर हो सकती है। फिलहाल हत्या और रंगदारी के आरोपों के साथ फर्जी पहचान से यात्रा दस्तावेज हासिल करने का मामला भी महत्वपूर्ण है।