गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम जिले के पटौदी क्षेत्र के गांव लोकरा निवासी सीआरपीएफ के सब-इंस्पेक्टर बिक्रम यादव का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। 57 वर्षीय बिक्रम यादव का इलाज शहर के एक निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन के बाद गांव लोकरा में शोक की लहर दौड़ गई।

सीआरपीएफ के जवानों और अधिकारियों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, परिजन और सीआरपीएफ के अधिकारी मौजूद रहे। बिक्रम यादव के बेटे आशीष कुमार ने उन्हें मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी।

सीआरपीएफ जवानों ने दी सशस्त्र सलामी

बिक्रम यादव के पार्थिव शरीर को सीआरपीएफ के जवानों की टुकड़ी गांव लोकरा लेकर पहुंची। सीआरपीएफ के डीआईजी परमा शिवन जवानों के साथ पार्थिव शरीर लेकर पहुंचे।

श्मशान घाट पर सीआरपीएफ की टुकड़ी ने अपने साथी जवान को सशस्त्र सलामी दी। सैन्य सम्मान के साथ हुए अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद भावुक हो गया। मौजूद लोगों ने नम आंखों से बिक्रम यादव को अंतिम विदाई दी।

सीआरपीएफ के अधिकारियों ने उनके सेवा कार्यों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

डेढ़ वर्ष से चल रहा था इलाज

परिजनों के अनुसार, बिक्रम यादव पिछले करीब डेढ़ वर्ष से बीमारी से जूझ रहे थे। उनका लगातार इलाज चल रहा था। बीमारी के कारण उनकी तबीयत काफी समय से खराब थी।

लंबे उपचार के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका और शहर के निजी अस्पताल में उनका निधन हो गया।

उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार और गांव में शोक का माहौल छा गया। रिश्तेदार और ग्रामीण बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार में शामिल हुए।

सीआरपीएफ के समूह केंद्र कादरपुर में थे तैनात

सीआरपीएफ डीआईजी परमा शिवन ने बताया कि बिक्रम यादव सीआरपीएफ के समूह केंद्र कादरपुर में तैनात थे। उन्होंने लंबे समय तक बल में अपनी सेवाएं दीं और अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से पालन किया।

सुरक्षा बलों में सेवा करना चुनौतीपूर्ण होता है। बिक्रम यादव ने अपने कार्यकाल के दौरान देश की सेवा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी सेवा और समर्पण को सीआरपीएफ के अधिकारियों और जवानों ने याद किया।

परिवार में पत्नी और दो बच्चे

परिजनों के अनुसार, बिक्रम यादव के परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी हैं। दोनों बच्चों की शादी हो चुकी है।

बड़े बेटे आशीष कुमार ने पिता को अंतिम विदाई देते हुए मुखाग्नि दी। इस दौरान परिवार के सदस्यों की आंखें नम थीं।

परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय है। रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें सांत्वना देने पहुंच रहे हैं।

छोटा भाई भी सीआरपीएफ में एएसआई

बिक्रम यादव का परिवार देश सेवा से जुड़ा रहा है। उनके छोटे भाई केयर सिंह भी सीआरपीएफ में एएसआई के पद पर कार्यरत हैं। वर्तमान में वह दिल्ली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

दोनों भाइयों ने सुरक्षा बल में रहकर देश की सेवा की। परिवार के लोगों का कहना है कि बिक्रम यादव हमेशा अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित रहे।

गांव में शोक का माहौल

बिक्रम यादव के निधन से गांव लोकरा में शोक का माहौल है। ग्रामीणों ने उन्हें एक शांत स्वभाव और जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में याद किया।

लोगों ने कहा कि बिक्रम यादव ने गांव और परिवार का नाम गौरवान्वित किया। देश सेवा में उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।

अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों ने भारत माता की जय और बिक्रम यादव अमर रहें के नारों के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी।

सीआरपीएफ ने जताया सम्मान

सीआरपीएफ की ओर से भी बिक्रम यादव के निधन पर सम्मान व्यक्त किया गया। अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने बल में रहते हुए पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपनी जिम्मेदारियां निभाईं।

सशस्त्र बलों में कार्यरत जवानों और अधिकारियों के लिए हर साथी का योगदान महत्वपूर्ण होता है। बिक्रम यादव का जाना बल के लिए भी एक क्षति है।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई

देश की सेवा करने वाले जवानों को विशेष सम्मान के साथ विदाई दी जाती है। इसी परंपरा के तहत बिक्रम यादव का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

सीआरपीएफ की टुकड़ी ने उन्हें अंतिम सलामी देकर सम्मान प्रकट किया। यह दृश्य मौजूद लोगों के लिए भावुक कर देने वाला था।

बिक्रम यादव ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा देश की सुरक्षा में समर्पित किया। अब परिवार और साथी जवान उनकी यादों को संजोकर आगे बढ़ेंगे।

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