हमीरपुर के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज में कंप्यूटर इंजीनियरिंग के पांचवें सेमेस्टर के छात्र सर्वेश शर्मा के कॉलेज हॉस्टल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद, पुलिस जांच शुरू हो गई है। साथ ही, इस दावे पर भी सवाल उठने लगे हैं कि उसने एक स्वदेशी ड्रोन विकसित करने के लिए 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट (अनुदान) हासिल की थी। कॉलेज ने कथित तौर पर इस प्रोजेक्ट को एक बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रचारित किया था, और हाल ही में इस क्षेत्र के दौरे पर आए गवर्नर कविंदर गुप्ता ने सर्वेश शर्मा को सम्मानित भी किया था। इस कथित उपलब्धि का विवरण 23 सितंबर को गवर्नर सचिवालय की वेबसाइट पर भी दिखाई दिया था। हालांकि, रक्षा अधिकारियों द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के बाद कि छात्र को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर या जारी नहीं की गई थी, इस दावे की जांच शुरू हो गई है।
दावा निकला ऑनलाइन धोखाधड़ी
हमीरपुर के गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल चंद्र शेखर की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि छात्र सर्वेश शर्मा को फर्जी डिजिटल संचार (digital communications) के जरिए धोखा दिया गया, जिसमें 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट मंजूर होने का दावा किया गया था। यह कथित फंडिंग 'रुद्र एज टी-1 (स्पेक्ट्रा)' (Rudra Edge T-1 (Spectra)) नामक एक प्रोजेक्ट से जुड़ी थी। हालांकि, डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (Defence Innovation Organisation) ने स्पष्ट किया है कि छात्र या उससे जुड़े किसी भी स्टार्टअप को ऐसी कोई ग्रांट मंजूर या प्रदान नहीं की गई थी। यह मामला सदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(2), 319 और 336(3), तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act), 2000 की धाराओं 66C और 66D के तहत दर्ज किया गया है।
28 अक्टूबर को, डिफेंस इनोवेशन ऑर्गनाइजेशन (DIO) के तहत एक पहल, 'इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस' (iDEX) ने अपने आधिकारिक X (ट्विटर) हैंडल के जरिए एक स्पष्टीकरण जारी किया, जिसमें 3.5 करोड़ रुपये की ग्रांट वाली खबरों को खारिज कर दिया गया। चंडीगढ़ स्थित रक्षा जनसंपर्क अधिकारी (Defence Public Relations Officer) शैलेश फेय ने भी इन खबरों को मनगढ़ंत बताते हुए स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्रालय ने ड्रोन विकास के लिए शर्मा को ऐसी कोई राशि नहीं दी थी। इस गड़बड़ी ने प्रोजेक्ट के समर्थन में पेश किए गए दस्तावेजों की प्रमाणिकता और उन परिस्थितियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें इस कथित उपलब्धि का प्रचार किया गया था। गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज के प्रिंसिपल चंद्र शेखर ने बताया कि संस्थान को रक्षा अधिकारियों की ओर से होने का दावा करने वाले कुछ ईमेल मिले थे, और छात्र के पास ऐसे दस्तावेज थे जिनके बारे में दावा किया गया था कि वे रक्षा मंत्रालय से आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट की मंजूरी कितनी वैध है, यह अब जांच का विषय है। इस बीच, गिरने के बाद शर्मा का इलाज चंडीगढ़ के पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER) में चल रहा है।
हमीरपुर पुलिस इस घटना से जुड़ी परिस्थितियों और विवादित ग्रांट (अनुदान) के दावे की जांच कर रही है। पुलिस अधीक्षक बलबीर ठाकुर ने कहा कि मामला जांच के दायरे में है और जांच पूरी होने के बाद ही इस पर आगे कुछ कहा जा सकेगा। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि विवादित ड्रोन प्रोजेक्ट का छात्र के गिरने से कोई संबंध है या नहीं। अब तक ऐसा कोई संबंध सामने नहीं आया है, और घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता लगाया जाना अभी बाकी है। इस घटना ने कॉलेज प्रशासन द्वारा इस कथित प्रोजेक्ट को संभालने के तरीके पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दस्तावेजों, फंडिंग के दावों और छात्र के गिरने से पहले हुई घटनाओं को लेकर कई अहम सवाल हैं, जिनके जवाब चल रही जांच से मिलने की उम्मीद है।
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