हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम और नूंह में एक निजी कंपनी को 25 साल के लिए बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले के विरोध में, फतेहाबाद जिले के बिजली कर्मचारियों ने गुरुवार से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों ने फतेहाबाद, भट्टू कलां और रतिया में बिजली विभाग के कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किया और सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की।
यह हड़ताल 'बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा' द्वारा बुलाई गई है। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि निजीकरण से बिजली की दरें बढ़ सकती हैं, नौकरियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। उनकी मांगों में निजीकरण के फैसले को वापस लेना, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना, संविदा कर्मचारियों को नियमित करना और स्मार्ट मीटर योजना को रद्द करना शामिल है। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर 24 अक्टूबर तक उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो इस आंदोलन को अनिश्चित काल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
इस विरोध प्रदर्शन को कई किसान और कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला है, जिनमें संयुक्त किसान मोर्चा, सरपंच एसोसिएशन, पटवारी एवं कानूनगो एसोसिएशन, किसान सभा, सेवानिवृत्त कर्मचारी संघ और शहीद भगत सिंह नौजवान सभा शामिल हैं। भट्टू कलां में कर्मचारियों ने उप-विभागीय अधिकारी (SDO) के कार्यालय के बाहर धरना दिया, जबकि रतिया में भी कर्मचारियों ने प्रस्तावित निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस बीच, जिला प्रशासन ने हड़ताल के दौरान बिजली से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए इंतजाम किए हैं। फतेहाबाद में उपायुक्त (DC) कार्यालय की पहली मंजिल पर कमरा नंबर 45 में एक कंट्रोल रूम बनाया गया है। शिकायतों पर नजर रखने और बिजली की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहे, यह सुनिश्चित करने के लिए कर्मचारियों को तीन शिफ्टों में तैनात किया गया है। उपभोक्ता 01667-230018 नंबर पर कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। सुरेश कुमार सरदाना को इसका ओवरऑल इंचार्ज नियुक्त किया गया है।
जिला मजिस्ट्रेट डॉ. विवेक भारती ने BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध भी लागू कर दिए हैं। इन आदेशों के अनुसार, बिजली विभाग के कार्यालयों और अन्य सरकारी परिसरों के 200 मीटर के दायरे में प्रदर्शन करने, नारेबाजी करने, जुलूस निकालने और पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी गई है। ये पाबंदियां 21 अक्टूबर की रात 10 बजे से लागू हो गईं और अगले आदेश तक जारी रहेंगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।