हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक समान भर्ती नीति लागू करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि निर्धारित कट-ऑफ तारीख पर योग्यता रखने वाले उम्मीदवार, ऑनलाइन आवेदन फॉर्म या अपलोड किए गए दस्तावेजों में मौजूद ऐसी कमियों के कारण सरकारी नौकरी से बाहर न हो जाएं, जिन्हें सुधारा जा सकता है। कोर्ट ने राज्य द्वारा भविष्य में की जाने वाली भर्तियों के लिए कुछ सुरक्षा उपाय भी सुझाए हैं। इनमें आवेदन की अंतिम तारीख के बाद सुधार के लिए पर्याप्त समय देना, जहां जरूरी विवरण दिए गए हों वहां आधिकारिक डेटाबेस के जरिए प्रमाणपत्रों का सत्यापन करना, और अनंतिम रूप से आवेदन खारिज होने के नोटिस मिलने पर उम्मीदवारों को जवाब देने के लिए कम से कम सात दिन का समय देना शामिल है।
जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने निर्देश दिया, "हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव तीन महीने के भीतर एक ऐसी नीति तैयार करेंगे, जो भविष्य की सभी भर्तियों में HPSC और HSSC पर लागू होगी।" बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी उम्मीदवार के पास निर्धारित कट-ऑफ तारीख पर आवश्यक योग्यता है, तो वह केवल दस्तावेजों को अपलोड करने या ऑनलाइन फॉर्म भरने में हुई ऐसी गलतियों के कारण सरकारी नौकरी से बाहर नहीं किया जा सकता, जिन्हें सुधारा जा सकता है। शर्त यह है कि उम्मीदवार ने अपने आवेदन में योग्यता का दावा किया हो और उस गलती को ठीक किया जा सकता हो।
हालांकि, यह सुरक्षा उन मामलों में नहीं मिलेगी जहां धोखाधड़ी या गलत जानकारी देने का मामला हो, या जहां उम्मीदवार ने गलती सुधारने का मौका मिलने के बावजूद उसका लाभ न उठाया हो, या समय रहते संबंधित अधिकारियों से संपर्क न किया हो। 145 रिट याचिकाओं पर एक साथ फैसला सुनाते हुए, जस्टिस बरार ने 'योग्यता होने' और 'योग्यता का दस्तावेजी सबूत पेश करने' के बीच स्पष्ट अंतर बताया।
निर्धारित योग्यता का कट-ऑफ तारीख पर होना अनिवार्य है और इसमें कोई छूट नहीं दी जा सकती, लेकिन दस्तावेजी सबूत में कोई कमी होने मात्र से उम्मीदवार की दावेदारी खत्म नहीं हो जाती। जस्टिस बरार ने कहा, "दस्तावेजों की जांच का उद्देश्य केवल यह सत्यापित करना है कि क्या परीक्षा में अपनी योग्यता साबित करने वाले उम्मीदवार के पास वास्तव में वह योग्यता है जिसका उसने दावा किया है। इसका मकसद न तो उम्मीदवार की डिजिटल दक्षता (पोर्टल पर दस्तावेज अपलोड करने की क्षमता) को परखना है, और न ही यह किसी पद के लिए दावेदारों की संख्या कम करने का कोई जरिया है।"
जस्टिस बरार का यह फैसला हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) और हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) से जुड़े भर्ती विवादों के संदर्भ में आया है। मुख्य मामले में, मेवात कैडर में प्राथमिक शिक्षक पद के एक उम्मीदवार ने अपने BC-B प्रमाण पत्र का विवरण तो सही दर्ज किया, लेकिन साइबर कैफे संचालक की गलती के कारण उसने कोई पुराना प्रमाण पत्र अपलोड कर दिया। उसे BC-B की 70.30 की कट-ऑफ के मुकाबले 72.2 अंक मिले थे, लेकिन 24 जुलाई को अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही उसे पता चला कि उसे बाहर कर दिया गया है।
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