पानीपत: हरियाणा के पानीपत जिले की मतलौडा अनाज मंडी में बारिश से धान भीगने और जलभराव का मामला मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी तक पहुंच गया। स्वीडन दौरे पर मौजूद मुख्यमंत्री ने मंडी की अव्यवस्थाओं का वीडियो देखने के बाद उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ को फोन किया। उन्होंने स्थिति पर नाराजगी जताते हुए तत्काल व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए। इसके बाद शुक्रवार, 16 अक्टूबर को उपायुक्त प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मंडी के औचक निरीक्षण पर पहुंचे और खरीद, उठान तथा किसानों की सुविधाओं का जायजा लिया। 
बारिश से भीगा धान, पानी में डूबीं बोरियां
गुरुवार को हुई तेज बारिश के कारण मतलौडा मंडी में जलभराव हो गया था। सामने आई जानकारी के अनुसार, करीब सात हजार क्विंटल धान भीग गया और लगभग दो हजार बोरियां पानी की चपेट में आ गईं। मंडी के निचले हिस्सों में पानी भरने से किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई। फसल बचाने के लिए तिरपाल डाले गए, लेकिन नीचे से पानी पहुंचने के कारण कई जगह यह उपाय पर्याप्त साबित नहीं हुआ। बारिश के चलते मंडी में धान की बोली भी प्रभावित हुई। 
किसानों ने जल निकासी की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि निकासी के रास्तों की समय पर सफाई होती तो पानी जल्दी निकल सकता था। सुबह शुरू हुई बारिश दोपहर तक जारी रहने से खुले में रखी ढेरियों और बोरियों को सुरक्षित करना मुश्किल हो गया। किसानों तथा आढ़तियों ने कहा कि मंडी में फसल की सुरक्षा के लिए तिरपाल के साथ बेहतर निकासी और सुरक्षित जगह की व्यवस्था भी जरूरी है। उन्होंने जलभराव के कारण हुए नुकसान को लेकर चिंता जताई। 
उपायुक्त ने खुद जांची धान की नमी
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद मंडी पहुंचे उपायुक्त ने धान की ढेरियों के पास जाकर मॉइश्चर मीटर से नमी की जांच की। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार खरीद प्रक्रिया चलाने और किसानों को अनावश्यक इंतजार से बचाने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान फसल की खरीद से लेकर उसके उठान तक की व्यवस्था देखी गई। उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि खरीद में लापरवाही, बेवजह देरी या किसानों को परेशान करने की शिकायत सामने नहीं आनी चाहिए। अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से निभाने के लिए कहा गया। 
फसल भीगी तो तय होगी जवाबदेही
उपायुक्त ने चेतावनी दी कि मंडी की अव्यवस्था या अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसानों का धान भीगता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने फसल को बारिश से बचाने को प्रशासन की जिम्मेदारी बताया। खरीद एजेंसियों और मंडी अधिकारियों को उठान में तेजी लाने तथा व्यवस्था दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए। फिलहाल सामने आई जानकारी में कार्रवाई की चेतावनी और सुधार के निर्देश हैं; किसी अधिकारी के निलंबन या दंड का आदेश घोषित होने की पुष्टि नहीं हुई है। 
धीमे उठान से भी बढ़ी किसानों की परेशानी
बारिश के अगले दिन भी जिले की मंडियों में किसान भीगा धान सुखाने और उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में जुटे रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले की मंडियों में 11,050.8 मीट्रिक टन धान की आवक के मुकाबले 8,924.4 मीट्रिक टन की खरीद हुई थी, जबकि उठान 2,235.6 मीट्रिक टन हुआ था। खरीदी गई फसल का बड़ा हिस्सा मंडियों में मौजूद रहने से बारिश के दौरान सुरक्षा की चुनौती बढ़ी। किसानों और आढ़तियों ने जल निकासी सुधारने के साथ उठान तेज करने की मांग की। 
कैंटीन के रिकॉर्ड की भी होगी जांच
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने अटल किसान-मजदूर कैंटीन की व्यवस्था भी देखी। उन्होंने भोजन करने वाले किसानों और मजदूरों की संख्या से संबंधित रजिस्टर जांचा। दर्ज विवरण का सत्यापन कराने के लिए रजिस्टर अपने साथ ले लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सरकारी सुविधा का लाभ वास्तविक किसानों और मजदूरों तक पहुंचना चाहिए तथा संचालन में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। मंडी निरीक्षण में फसल की सुरक्षा के साथ किसानों को उपलब्ध सुविधाओं की निगरानी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर भी जोर दिया गया।
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