भगवान किसी को न दे ऐसे माता-पिता! 4 साल की बेटी से दुष्कर्म; मां ने भी दिया भरपूर साथ
दोनों गिरफ्तार
रोहतक : हरियाणा के रोहतक जिले से चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) की जांच में बच्ची के पिता पर ही तीन बार यौन उत्पीड़न करने का आरोप सामने आया है। इससे पहले बच्ची की मां ने स्कूल के एक छात्र पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, करीब एक महीने की जांच और बच्ची की काउंसिलिंग के बाद मामला नया मोड़ ले गया। पुलिस ने आरोपी पिता के साथ मां को भी गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को पांच दिन के पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस के अनुसार, बच्ची की मां पर घटना की जानकारी होने के बावजूद अपने पति को बचाने और स्कूल के छात्र पर गलत आरोप लगाने का आरोप है। अब जांच टीम घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करने में लगी है।
स्कूल के छात्र पर लगाया गया था आरोप
इस मामले की शुरुआत 16 सितंबर 2026 को हुई थी, जब बच्ची की मां ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। महिला का आरोप था कि उसकी चार साल की बेटी के साथ स्कूल के शौचालय में पढ़ने वाले लगभग 10 से 12 साल के एक छात्र ने यौन उत्पीड़न किया है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की जांच के दौरान स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से पूछताछ की गई। पुलिस ने स्कूल परिसर के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। लेकिन जांच में स्कूल के किसी छात्र के खिलाफ आरोप की पुष्टि करने वाले साक्ष्य नहीं मिले।
एक महीने की जांच के बाद बदली पूरी कहानी
स्कूल में घटना से संबंधित साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाया। रोहतक पुलिस ने महम के डीएसपी तनुज शर्मा के नेतृत्व में विशेष जांच टीम का गठन किया था। एसआईटी ने स्कूल से जुड़े लोगों के अलावा बच्ची के परिवार और करीबी व्यक्तियों की गतिविधियों की भी पड़ताल शुरू की। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान बच्ची के पिता की गतिविधियां संदेह के घेरे में आईं। इसके बाद जांच टीम ने पारिवारिक परिस्थितियों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की।
पिता के मोबाइल की जांच से बढ़ा शक
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, जांच के दौरान बच्ची के पिता के मोबाइल फोन से अश्लील सामग्री देखने से संबंधित जानकारी सामने आई। इस जानकारी के आधार पर पुलिस ने पिता से पूछताछ की और अन्य साक्ष्यों के साथ इसका मिलान किया। हालांकि, केवल मोबाइल पर ऐसी सामग्री देखने से अपराध साबित नहीं होता। पुलिस की जांच में बच्ची की काउंसिलिंग, उसके बयान और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे। इन तथ्यों के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच को परिवार के भीतर कथित यौन उत्पीड़न की दिशा में आगे बढ़ाया।
काउंसिलिंग में बच्ची ने पिता पर लगाया आरोप
मामले में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ बच्ची की काउंसिलिंग के दौरान आया। बाल कल्याण समिति की मौजूदगी में हुई काउंसिलिंग में बच्ची ने अपने पिता पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। जांच से संबंधित रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची ने बताया कि उसके पिता ने तीन अलग-अलग अवसरों पर उसका उत्पीड़न किया था। बच्ची ने यह भी बताया कि स्कूल के छात्र पर आरोप लगाने की बात उसे माता-पिता की ओर से कही गई थी। पुलिस के अनुसार, बच्ची का बयान न्यायालय के समक्ष भी दर्ज कराया गया है। इन बयानों और अन्य जांच संबंधी तथ्यों के आधार पर पुलिस ने माता-पिता के खिलाफ कार्रवाई की।
मां पर सच्चाई छिपाने और गलत शिकायत का आरोप
इस मामले में बच्ची की मां की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। पुलिस का आरोप है कि महिला को अपने पति द्वारा किए गए कथित यौन उत्पीड़न की जानकारी थी, लेकिन उसने घटना की वास्तविक परिस्थितियां पुलिस को नहीं बताईं। इसके बजाय स्कूल के एक छात्र पर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई। जांच अधिकारियों के अनुसार, महिला ने कथित तौर पर अपने पति को बचाने का प्रयास किया। हालांकि, मां की आपराधिक जिम्मेदारी और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
माता-पिता पांच दिन के पुलिस रिमांड पर
एसआईटी की जांच में नए तथ्य सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची के माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया। शनिवार, 17 अक्टूबर को दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पांच दिन के पुलिस रिमांड पर भेजा गया। रिमांड के दौरान पुलिस दोनों आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ कर रही है। जांच टीम घटना से संबंधित स्थानों का निरीक्षण करने और आसपास के लोगों से पूछताछ करने की तैयारी में है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य आरोपों की पुष्टि करने वाले साक्ष्य जुटाना तथा घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट करना है।
DSP तनुज शर्मा ने बताया, जांच जारी
महम के डीएसपी तनुज शर्मा के अनुसार, दोनों आरोपियों से पूछताछ जारी है। पुलिस रिमांड के दौरान सामने आने वाली जानकारी के आधार पर मामले की आगे की जांच की जाएगी। डीएसपी के मुताबिक, जांच टीम आरोपियों को संबंधित घटनास्थल पर ले जाकर आवश्यक तथ्यों का सत्यापन करेगी। इसके अलावा ग्रामीणों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाएगी। पुलिस का कहना है कि रिमांड की अवधि पूरी होने और साक्ष्यों की जांच के बाद मामले की विस्तृत जानकारी सामने आएगी।
पॉक्सो कानून के तहत मामले की जांच
नाबालिग बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से निपटने के लिए देश में लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो कानून लागू है। इस कानून के तहत बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराधों के लिए विशेष कानूनी प्रावधान हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चे की पहचान गोपनीय रखना आवश्यक होता है। बच्चे के बयान दर्ज करने और जांच की प्रक्रिया में भी विशेष संवेदनशीलता बरतने का प्रावधान है। रोहतक मामले में बच्ची की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगा पूरा सच
चार साल की बच्ची से कथित यौन उत्पीड़न के मामले में पुलिस की जांच ने शुरुआती शिकायत से अलग परिस्थितियां सामने रखी हैं। पहले स्कूल के छात्र को आरोपी बताया गया था, लेकिन जांच में उसके खिलाफ आरोप की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद बच्ची की काउंसिलिंग और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पिता को आरोपी बनाया तथा मां के खिलाफ भी कार्रवाई की। फिलहाल आरोपी माता-पिता पुलिस रिमांड पर हैं। एसआईटी उनसे पूछताछ कर रही है और मामले में अतिरिक्त साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि अदालत की प्रक्रिया के अधीन होगी।