अवैध खनन और अतिक्रमण पर सरकार की डिजिटल नजर, ड्रोन मैपिंग से बनेगा डेटा बैंक

Update: 2026-08-03 14:10 GMT

चंडीगढ़ :  हरियाणा सरकार अब सुशासन और प्रशासनिक निगरानी को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए ड्रोन तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने जा रही है। प्रदेश में अवैध निर्माण, अवैध खनन, नागरिक अवसंरचना, पुराने कचरा स्थलों और प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की निगरानी के लिए हाई रेजोल्यूशन ड्रोन इमेजरी और भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) मैपिंग तकनीक को अपनाया जाएगा। सरकार का उद्देश्य तकनीक के माध्यम से निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और कार्रवाई को अधिक पारदर्शी बनाना है।

सोमवार को चंडीगढ़ में ड्रोन इमेजिंग एंड इंफॉर्मेशन सर्विसेज ऑफ हरियाणा (दृश्या) के निदेशक मंडल की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने की। इस दौरान उन्होंने ड्रोन आधारित विभिन्न तकनीकी परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में एआई आधारित चेंज डिटेक्शन एप्लीकेशन की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई। यह एप्लीकेशन हाई रेजोल्यूशन ड्रोन इमेजरी के माध्यम से अवैध निर्माण और अतिक्रमण की स्वत: पहचान करने के लिए तैयार किया गया है। इसके जरिए प्रशासन को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किसी क्षेत्र में नए निर्माण, बदलाव या अतिक्रमण जैसी गतिविधियां कहां और कब हुई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि फरीदाबाद, हिसार, करनाल, पानीपत और यमुनानगर जिलों में लगभग 800 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का डिजिटल मैपिंग कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके साथ ही राज्य में एक बड़े भू-स्थानिक डाटाबेस का निर्माण किया जा रहा है, जो शहरी नियोजन, विकास कार्यों की निगरानी और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई में मददगार साबित होगा।

मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने गुरुग्राम में नगर निगम की संपत्तियों की डिजिटल मैपिंग परियोजना की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना के तहत शहर की विभिन्न नागरिक सुविधाओं और संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे भविष्य में योजना बनाने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिलेगी।

क्रिड के आयुक्त एवं सचिव जे. गणेशन ने बैठक में जानकारी दी कि परियोजना के अंतर्गत सड़क नेटवर्क, फुटपाथ, सेंट्रल वर्ज और बर्म का डिजिटलीकरण किया गया है। इसके अलावा करीब 60 हजार मैनहोल और गली ट्रैप का सेंटीमीटर स्तर की सटीकता के साथ भू-अंकन यानी जियो-रेफरेंसिंग किया जा रहा है। इससे नगर निकायों को जल निकासी व्यवस्था और रखरखाव कार्यों में बड़ी मदद मिलेगी।

बैठक में खानक स्टोन माइंस में ड्रोन आधारित मासिक निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खनन क्षेत्र की निगरानी के लिए अब तक ड्रोन सर्वेक्षण के आठ चरण पूरे किए जा चुके हैं। इनमें से छह चरणों की वॉल्यूमेट्रिक एसेसमेंट रिपोर्ट भी तैयार कर ली गई है। इससे खनन गतिविधियों पर नजर रखने और नियमों के उल्लंघन को रोकने में सहायता मिलेगी।

इसके अलावा प्रदेश के 16 नगर परिषद क्षेत्रों में पुराने कचरा स्थलों का ड्रोन सर्वे पूरा कर लिया गया है। संबंधित अधिकारियों को रिपोर्ट सौंप दी गई है। इन रिपोर्टों के आधार पर पुराने कचरा स्थलों के वैज्ञानिक उपचार और लैंडफिल प्रबंधन को बेहतर बनाया जाएगा।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लिए भी ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रमुख नालों के सर्वेक्षण, थर्मल इमेजिंग और वीडियो रिकॉर्डिंग का काम शुरू किया गया है। कई प्रमुख नालों का सर्वे पूरा हो चुका है, जबकि अन्य क्षेत्रों में काम जारी है।

सरकार का मानना है कि ड्रोन और एआई आधारित निगरानी व्यवस्था से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। आने वाले समय में हरियाणा में तकनीक आधारित शासन व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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