हरियाणा बैंक घोटाला: रिभव ने ऐसे लगाया 657 करोड़ का चूना

Update: 2026-07-11 14:35 GMT

पंचकूला। हरियाणा में सामने आए करीब 657 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी को बताया गया है। जांच में सामने आया है कि बैंक अधिकारियों ने मिलकर नकली दस्तावेजों, फर्जी चेक और अनधिकृत लेनदेन के जरिए सरकारी खातों से करोड़ों रुपये निकाल लिए।

सीबीआई की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव रिषी और रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार ने चार अन्य लोगों के साथ मिलकर इस घोटाले को अंजाम दिया। आरोप है कि इन लोगों ने नकली डेबिट नोट, फर्जी हस्ताक्षर वाले चेक और बिना अनुमति के किए गए डेबिट ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल किया।

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपितों ने बैंक के इंटरनल "मेकर-चेकर" वर्कफ्लो का गलत इस्तेमाल किया। इसी प्रक्रिया के जरिए फर्जी लेनदेन को मंजूरी दी गई और बैंकिंग सिस्टम को धोखा दिया गया।

सीबीआई रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपित बैंक अधिकारियों ने सरकारी विभागों के खातों से रकम निकालने के लिए कई तरह के फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसमें नकली फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें, बैंक अकाउंट स्टेटमेंट और ब्याज प्रमाण पत्र शामिल थे। इन दस्तावेजों को असली दिखाकर सरकारी विभागों में जमा कराया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में भी बदलाव किया गया। आरोप है कि पहले खातों से जुड़े संपर्क विवरण बदले गए और बाद में उन्हें ऐसे नंबरों और ईमेल से जोड़ा गया, जिनका नियंत्रण आरोपितों के पास था। इसके जरिए बैंक खातों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां उनके पास पहुंचती रहीं।

सीबीआई के अनुसार, सरकारी खातों से धोखाधड़ी के लिए कॉल वेरिफिकेशन प्रक्रिया का भी दुरुपयोग किया गया। सरकारी विभागों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं से पुष्टि करने का दावा किया गया, लेकिन जांच में पता चला कि यह प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हुई। बैंक की ओर से इन कॉल की रिकॉर्डिंग भी सुरक्षित नहीं रखी गई थी।

जांच रिपोर्ट में एक बड़े ट्रांजेक्शन का भी जिक्र किया गया है। सीबीआई के मुताबिक, 5 मई 2025 को हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते से चेक नंबर 3 के जरिए 50 करोड़ रुपये डेबिट किए गए। जांच में सामने आया कि यह चेक एचपीजीसीएल की ओर से जारी ही नहीं किया गया था।

इस मामले में मेकर अनुज कौशल और चेकर सीमा धीमान की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सीबीआई का आरोप है कि इन लोगों ने फर्जी ट्रांजेक्शन को आगे बढ़ाने में मदद की। वहीं, रिभव रिषी पर कॉल वेरिफिकेशन के जरिए इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने का आरोप लगाया गया है।

सीबीआई अब मामले में शामिल अन्य आरोपितों और उनकी भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि घोटाले में कितने सरकारी विभागों के खाते प्रभावित हुए और रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई।

657 करोड़ रुपये के इस बैंक घोटाले ने बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

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