Haryana हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेवाड़ी जिले के खरखड़ा गांव में खुले में कूड़ा फेंकने और अपशिष्ट जल को हरित पट्टी में छोड़े जाने की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए धारूहेड़ा के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) पर 25,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया है। बोर्ड के रेवाडी स्थित क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से जारी आदेश में अधिकारी को सात दिन के भीतर राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया है.
इस बीच, खरखड़ा गांव के सरपंच को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) द्वारा बनाए गए ग्रीन बेल्ट में अपशिष्ट जल के निर्वहन को रोकने का निर्देश दिया गया है। यह कार्रवाई खरखरा गांव के निवासी प्रकाश यादव द्वारा खुले में कचरा फेंकने और जलाने और अपशिष्ट जल को ग्रीन बेल्ट में छोड़ने की शिकायत के बाद की गई है। शिकायत के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक फील्ड अधिकारी ने 7 अक्टूबर को साइट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान गांव में खुले में ठोस कचरा डंप करने के साक्ष्य मिले। गांव का गंदा पानी भी एचएसवीपी ग्रीन बेल्ट में बहाया जाता पाया गया। 7 अक्टूबर को बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, धारूहेड़ा बीडीपीओ पर 25,000 रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। अधिकारी को सात दिनों के अंदर राशि बोर्ड के खाते में जमा करने का निर्देश दिया गया है.
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशों का हवाला देते हुए, बोर्ड ने अधिकारियों को उचित अपशिष्ट निपटान सुनिश्चित करने और ग्रीन बेल्ट में सीवेज के निर्वहन को रोकने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि अनुपालन न करने की स्थिति में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
खरखरा गांव में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को लेकर गांववासी पहले भी नाराजगी जता चुके हैं। आरोप है कि 2 अक्टूबर को गांधी जयंती कार्यक्रम के दौरान गांव में कूड़े के बड़े ढेर को जला दिया गया, जिससे धुआं और दुर्गंध की शिकायत हुई. गांव में कूड़ा निस्तारण और खुले में कूड़ा फेंकने को लेकर एक ग्रामीण की याचिका एनजीटी की प्रधान पीठ के समक्ष लंबित है। एनजीटी ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, गांव के सरपंच और रेवाड़ी के उपायुक्त से जवाब मांगा है. मामले में अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होनी है.
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