हरियाणा में ACB की बड़ी कार्रवाई, मेडिकल कॉलेज का कर्मचारी 22 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार
नूंह, हरियाणा। प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी की नूंह सब-यूनिट ने बलिदानी हसन खान राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ में तैनात एक सहायक को 22 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार करने की जानकारी दी है। आरोपी की पहचान सकरुद्दीन के रूप में हुई है, जो मेडिकल कॉलेज के डीन कार्यालय में सहायक के पद पर कार्यरत है। आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता से छह दिनों की अतिरिक्त ड्यूटी की हाजिरी पूरी कराने के बदले रिश्वत की मांग की थी। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने नियमानुसार जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ लिया।
इस कार्रवाई के बाद सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की हाजिरी और अतिरिक्त ड्यूटी से जुड़े प्रशासनिक कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
छह दिनों की अतिरिक्त ड्यूटी की हाजिरी के बदले मांगे 22 हजार रुपये
एसीबी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने ब्यूरो को दी गई शिकायत में आरोप लगाया था कि मेडिकल कॉलेज के डीन कार्यालय में तैनात सहायक सकरुद्दीन उससे छह दिनों की अतिरिक्त ड्यूटी की हाजिरी पूरी कराने के लिए 22 हजार रुपये मांग रहा था।
शिकायतकर्ता का कहना था कि अतिरिक्त ड्यूटी करने के बावजूद हाजिरी संबंधी काम पूरा कराने के लिए उससे रिश्वत मांगी जा रही थी। सरकारी कार्यालय में सामान्य प्रशासनिक कार्य के बदले इस तरह की मांग से परेशान होकर उसने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से संपर्क किया।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी की नूंह सब-यूनिट ने मामले को गंभीरता से लिया और आरोपों की प्रारंभिक जांच शुरू की। ब्यूरो ने शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई करने का निर्णय लिया।
एसीबी ने जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ा
जानकारी के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद एसीबी की टीम ने नियमानुसार ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की। इसका उद्देश्य रिश्वत मांगने के आरोप की जांच करना और कथित लेनदेन के दौरान आवश्यक साक्ष्य जुटाना था।
ब्यूरो की टीम ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी सहायक सकरुद्दीन को 22 हजार रुपये लेते समय पकड़ने की जानकारी दी है।
इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि गिरफ्तारी किस समय हुई, मौके पर कौन-कौन अधिकारी मौजूद थे और बरामद राशि के संबंध में क्या दस्तावेज तैयार किए गए, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
मेडिकल कॉलेज के डीन कार्यालय में तैनात है आरोपी
गिरफ्तार आरोपी सकरुद्दीन बलिदानी हसन खान राजकीय मेडिकल कॉलेज, नल्हड़ के डीन कार्यालय में सहायक के पद पर तैनात है।
डीन कार्यालय किसी भी मेडिकल कॉलेज की प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इस कार्यालय से कर्मचारियों के सेवा संबंधी दस्तावेज, प्रशासनिक पत्राचार और विभिन्न विभागीय प्रक्रियाओं से जुड़े कार्य किए जाते हैं।
ऐसे में हाजिरी से संबंधित काम के बदले रिश्वत मांगने का आरोप सरकारी संस्थानों में प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंता पैदा करता है।
हालांकि यह स्पष्ट होना बाकी है कि आरोपी के पास शिकायतकर्ता की हाजिरी पूरी कराने का प्रत्यक्ष अधिकार था या वह किसी अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया में सहायता करने के नाम पर पैसे मांग रहा था।
अतिरिक्त ड्यूटी की हाजिरी से जुड़ा है पूरा मामला
इस मामले का मुख्य विवाद छह दिनों की अतिरिक्त ड्यूटी की हाजिरी पूरी कराने से संबंधित है।
सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों की हाजिरी का रिकॉर्ड उनके कार्यदिवस, ड्यूटी और अन्य सेवा संबंधी मामलों के लिए महत्वपूर्ण होता है। विशेष परिस्थितियों में कर्मचारियों से अतिरिक्त ड्यूटी भी कराई जा सकती है, जिसका रिकॉर्ड संबंधित संस्थान के निर्धारित नियमों के अनुसार रखा जाता है।
यदि किसी कर्मचारी की अतिरिक्त ड्यूटी दर्ज नहीं होती है या रिकॉर्ड में त्रुटि रहती है, तो उसे ठीक कराने के लिए संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जाती है।
ऐसी स्थिति में रिश्वत की कथित मांग का मामला गंभीर माना जाता है, क्योंकि इससे कर्मचारियों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था की निष्पक्षता पर असर पड़ सकता है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई का प्रावधान
भारत में सरकारी कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगने या स्वीकार करने के मामलों में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।
अधिनियम की धारा 7 के तहत लोक सेवक द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त करने से संबंधित अपराधों में दोष सिद्ध होने पर तीन से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
हालांकि सकरुद्दीन के खिलाफ किन धाराओं में मामला दर्ज किया गया है, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि आरोपी को अदालत में पेश किया जा चुका है या नहीं।
जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
नूंह में पहले भी सामने आए हैं रिश्वतखोरी के मामले
नूंह जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से पहले भी रिश्वतखोरी के आरोपों पर कार्रवाई की गई है।
12 अक्टूबर 2026 को एसीबी ने अकेड़ा थाने में तैनात सहायक उपनिरीक्षक अशोक को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस मामले में शिकायतकर्ता और उसकी पत्नी के नाम आपराधिक मामले से हटवाने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप था।
इसी तरह अगस्त 2026 में नूंह जिले के पिनगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े एक मामले में मेडिकल अधिकारी और स्वास्थ्यकर्मी की गिरफ्तारी की खबर सामने आई थी। उस मामले में मेडिकल रिपोर्ट से संबंधित कार्य के बदले ढाई लाख रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था।
हालांकि ये सभी अलग-अलग मामले हैं और इनके बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
आरोपी की भूमिका और शिकायत की जांच महत्वपूर्ण
मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच में यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायतकर्ता की अतिरिक्त ड्यूटी की हाजिरी किस प्रक्रिया के तहत पूरी की जानी थी।
इसके अलावा आरोपी की प्रशासनिक भूमिका, शिकायतकर्ता से हुई बातचीत और कथित रिश्वत के लेनदेन से संबंधित साक्ष्य भी जांच के महत्वपूर्ण पहलू हो सकते हैं।
यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि मामला केवल एक कर्मचारी द्वारा कथित रिश्वत मांगने तक सीमित है या प्रशासनिक व्यवस्था में किसी प्रकार की अन्य अनियमितता भी मौजूद थी।
फिलहाल उपलब्ध सूचना में किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की संलिप्तता का उल्लेख नहीं है। इसलिए बिना प्रमाण किसी अन्य व्यक्ति को इस मामले से जोड़ना उचित नहीं होगा।
सरकारी कर्मचारियों की जवाबदेही पर उठे सवाल
नल्हड़ मेडिकल कॉलेज में हुई इस कार्रवाई ने सरकारी संस्थानों में छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता को रेखांकित किया है।
कर्मचारियों की हाजिरी, अतिरिक्त ड्यूटी और सेवा संबंधी रिकॉर्ड का समय पर निपटारा होना जरूरी है, ताकि किसी कर्मचारी को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
डिजिटल हाजिरी प्रणाली, कार्यों के निपटारे की समयसीमा और शिकायतों की प्रभावी निगरानी जैसी व्यवस्थाएं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने में सहायक हो सकती हैं।
वहीं, भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
फिलहाल एसीबी द्वारा सकरुद्दीन को 22 हजार रुपये की कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने का मामला चर्चा में है। आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही घटना से जुड़े सभी तथ्य स्पष्ट हो सकेंगे।