सिरसा : हरियाणा के सिरसा जिले में मेडिकल नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अलग-अलग स्थानों से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कुल 8,460 कथित प्रतिबंधित नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद किए गए हैं। पुलिस ने बरामद दवाओं को जांच और आगे की कार्रवाई के लिए औषधि नियंत्रण विभाग के सुपुर्द कर दिया है। तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित थानों में अलग-अलग मामले दर्ज कर नशीली दवाओं की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पहली कार्रवाई सीआईए ऐलनाबाद की टीम ने रानियां क्षेत्र के गांव बणी में की। सीआईए ऐलनाबाद प्रभारी संदीप सिंह ने बताया कि पुलिस टीम क्षेत्र में गश्त कर रही थी। इसी दौरान एक युवक पैदल आता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम को सामने देखकर वह कथित रूप से घबरा गया और वापस मुड़कर भागने का प्रयास करने लगा।
उसकी गतिविधि संदिग्ध लगने पर पुलिसकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए पीछा किया और उसे मौके पर काबू कर लिया। नियमानुसार तलाशी लेने पर उसके कब्जे से 1,770 गोलियां और कैप्सूल मिलने का दावा किया गया। पुलिस पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति ने अपनी पहचान मंगा लाल के रूप में बताई। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि आरोपी को दवाओं की यह खेप कहां से मिली थी और वह इसे किसे बेचने या पहुंचाने जा रहा था।
दूसरी कार्रवाई गांव हारनी खुर्द क्षेत्र में की गई। पुलिस की एक अन्य टीम ने संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर एक युवक को हिरासत में लेकर उसकी तलाशी ली। पुलिस के अनुसार, उसके कब्जे से 2,190 कथित नशीली गोलियां और कैप्सूल बरामद हुए। पकड़े गए आरोपी की पहचान राजू के रूप में हुई है। उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी से दवाओं की खरीद, बिक्री और संभावित ग्राहकों के संबंध में पूछताछ की जा रही है।
तीसरी और सबसे बड़ी बरामदगी बड़ागुढ़ा थाना क्षेत्र में हुई। थाना प्रभारी लाभ सिंह के मुताबिक, पुलिस टीम इलाके में गश्त कर रही थी। इसी दौरान रास्ते में पैदल आ रहा एक युवक पुलिसकर्मियों को देखकर कथित तौर पर वापस मुड़ गया और भागने लगा। शक होने पर पुलिस टीम ने उसका पीछा किया और कुछ दूरी पर उसे पकड़ लिया।
पुलिस ने जब युवक की तलाशी ली तो उसके पास से 4,500 प्रतिबंधित बताई जा रही गोलियां और कैप्सूल बरामद हुए। आरोपी की पहचान दलबीर सिंह के रूप में की गई है। पुलिस ने दवाओं से संबंधित बिल, चिकित्सकीय पर्चा अथवा वैध लाइसेंस मांगा, लेकिन वह तत्काल कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
तीनों कार्रवाइयों में बरामद गोलियों और कैप्सूलों को औषधि नियंत्रण विभाग को सौंपा गया है। विभाग इनकी संरचना, बैच नंबर, निर्माता कंपनी और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगा। यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित दवाएं किस श्रेणी में आती हैं और क्या उनका भंडारण एवं परिवहन वैध अनुमति के बिना किया जा रहा था।
पुलिस का कहना है कि जांच का दायरा आरोपियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उनसे पूछताछ कर मेडिकल नशे की आपूर्ति करने वाले व्यक्तियों, थोक विक्रेताओं और स्थानीय नेटवर्क की पहचान की जाएगी। कॉल रिकॉर्ड, लेनदेन और अन्य संपर्कों की भी जांच की जा सकती है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि बरामद खेप जिले में खपाई जानी थी या उसे किसी दूसरे क्षेत्र में भेजा जाना था।
पुलिस अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री या मेडिकल नशे से संबंधित कोई जानकारी मिलने पर तत्काल नजदीकी थाने अथवा पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचित करें। आरोपियों पर लगे आरोपों की सत्यता जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगी।