पानीपत में श्रद्धालुओं की खरीदारी से बाजार गुलजार, परिवहन सेवाओं को भी फायदा
पानीपत: समालखा के भोड़वाल माजरी स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित समागम ने स्थानीय कारोबार और परिवहन सेवाओं को आर्थिक गतिविधियों का अवसर दिया। देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं की आवाजाही से बाजारों में रौनक बढ़ी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं ने करीब चार करोड़ रुपये के कंबल खरीदे, जबकि रेलवे और रोडवेज की संयुक्त आय लगभग 1.32 करोड़ रुपये बताई गई है। हालांकि, इन दोनों आंकड़ों का विस्तृत विभागीय या कारोबारी ब्योरा उपलब्ध नहीं है। समागम जैसे बड़े आयोजन में श्रद्धालुओं की जरूरतें धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहतीं। यात्रा, सामान की खरीद और स्थानीय आवाजाही से अलग-अलग सेवाओं की मांग बनती है। पानीपत और समालखा के बाजारों में कंबल तथा चादर की खरीदारी पहले के समागमों में भी दर्ज की गई है। इस बार सामने आई जानकारी स्थानीय कारोबार पर आयोजन के इसी प्रभाव को रेखांकित करती है।
कंबल और हैंडलूम उत्पादों के लिए मिला बाजार
पानीपत के कारोबारियों के लिए समागम बाहर से आने वाले ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर बनता है। कंबल और चादर ऐसे उत्पाद हैं जिन्हें श्रद्धालु घर लौटते समय अपने साथ ले जाते हैं। पूर्व आयोजनों की रिपोर्टों में पानीपत, समालखा और भोड़वाल माजरी के अस्थायी बाजारों में इन वस्तुओं की खरीदारी का उल्लेख मिलता है। करीब चार करोड़ रुपये के कंबलों की बिक्री का प्रस्तुत आंकड़ा कारोबार की राशि दर्शाता है। इसे व्यापारियों का शुद्ध मुनाफा नहीं माना जा सकता। बिक्री में माल की लागत, परिवहन, दुकान संचालन और अन्य खर्च शामिल होते हैं। किस बाजार में कितना कारोबार हुआ और यह राशि कितने दिनों की बिक्री से संबंधित है, इसका अलग विवरण मिलने पर आर्थिक तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी। फिलहाल कंबलों की कुल संख्या, औसत कीमत और खुदरा तथा थोक खरीद का अनुपात उपलब्ध नहीं है। इसलिए बिक्री की राशि के आधार पर खरीदारों या बेचे गए कंबलों की संख्या निकालना उचित नहीं होगा।
समालखा और आसपास के विक्रेताओं को अवसर
समागम स्थल तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के कारण आसपास के बाजारों का महत्व बढ़ जाता है। खरीदारों को नजदीक सामान मिल जाता है और विक्रेताओं को ग्राहक तक पहुंचने का अवसर मिलता है। पिछले वर्षों की खबरों में समागम के आसपास अस्थायी दुकानों तथा हैंडलूम सामान के लिए अतिरिक्त जगह की व्यवस्था का उल्लेख रहा है। इस गतिविधि का लाभ केवल बड़े शोरूम तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। छोटे विक्रेताओं और सामान पहुंचाने वाले लोगों को भी मांग बढ़ने से काम मिल सकता है। हालांकि, वर्तमान आयोजन में कितने विक्रेताओं ने दुकान लगाई या कितने लोगों को अतिरिक्त रोजगार मिला, इसका प्रमाणित आंकड़ा सामने नहीं है। ऐसे आयोजनों के कारोबारी प्रभाव का आकलन करते समय वास्तविक बिक्री और भविष्य में मिलने वाले संभावित ऑर्डर अलग रखना भी जरूरी है। अभी उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से आयोजन के दौरान हुई खरीदारी से संबंधित है।
रेलवे और रोडवेज की आय का आंकड़ा
प्राप्त विवरण में रेलवे और रोडवेज को मिलाकर 1.32 करोड़ रुपये की आय बताई गई है। दोनों सेवाओं के अलग-अलग हिस्से, यात्रियों की संख्या और गणना की अवधि का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इस राशि को किसी एक स्टेशन, डिपो या विशेष सेवा की आय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए आयोजन से पहले परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया था। अमर उजाला की तैयारी संबंधी रिपोर्ट में पानीपत डिपो से भोड़वाल माजरी के लिए विशेष ई-बसें चलाने की योजना बताई गई थी। मांग के अनुसार बसों की संख्या बढ़ाने की बात भी कही गई थी। परिवहन से प्राप्त किराया आय और शुद्ध लाभ अलग होते हैं। संचालन में कर्मचारियों, ऊर्जा, रखरखाव और अन्य व्यवस्थाओं का खर्च आता है। इसलिए 1.32 करोड़ रुपये के प्रस्तुत आंकड़े को खर्च घटाने के बाद बची कमाई बताना सही नहीं होगा।
भीड़ के लिए पहले से की गई थीं तैयारियां
हरियाणा सरकार की 16 अक्टूबर की विज्ञप्ति के अनुसार, समागम के लिए जीटी रोड पर यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सुविधाओं की समीक्षा की गई थी। भिगान टोल प्लाजा पर आने वाले वाहनों के लिए दो लेन आरक्षित रखने और सड़क पर जलभराव रोकने के निर्देश दिए गए थे। विज्ञप्ति में आयोजन की तारीख 23 से 26 अक्टूबर बताई गई थी। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखना था। बड़े आयोजन में खरीदारी और परिवहन की मांग बढ़ने के साथ भीड़ प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। बाजार तक पहुंच, सामान लेकर लौटने की सुविधा और सुरक्षित यात्रा, सभी पहलू एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दिखा आयोजन का प्रभाव
निरंकारी समागम से जुड़ी खरीदारी की खबर पानीपत के स्थानीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। श्रद्धालुओं की मांग ने कंबल और हैंडलूम उत्पादों को अतिरिक्त ग्राहक दिए। परिवहन सेवाओं के उपयोग से संबंधित आय की जानकारी भी आयोजन के आर्थिक प्रभाव की ओर इशारा करती है। अब बिक्री और परिवहन आय के विस्तृत रिकॉर्ड मिलने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस क्षेत्र को कितना लाभ हुआ। प्रस्तुत आंकड़ों के आधार पर कुल 5.32 करोड़ रुपये की गतिविधि का उल्लेख बनता है, लेकिन इसे पूरे समागम का कुल कारोबार नहीं कहा जा सकता। अन्य वस्तुओं और सेवाओं का हिसाब इसमें शामिल होने की पुष्टि नहीं है।