फूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (FCI) को लगभग 1.65 लाख मीट्रिक टन कस्टम-मिल्ड चावल (CMR) की डिलीवरी अभी भी बाकी है। इसे लेकर राइस मिलर्स और ज़िला प्रशासन के बीच स्टॉक की फिजिकल वेरिफिकेशन (मौके पर जाकर जांच) को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मिलर्स ने इस जांच को उन्हें परेशान करने की कोशिश बताया है और चेतावनी दी है कि अगर यह मुद्दा हल नहीं हुआ तो वे मौजूदा मिलिंग सीज़न का बहिष्कार कर सकते हैं।
हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के बैनर तले राज्य भर के राइस मिलर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक (DG) अंशज सिंह से मुलाकात की और उनसे तुरंत दखल देने की मांग की। उन्होंने बताया कि अधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार या तो FCI को बकाया चावल की डिलीवरी करने या उसकी नीलामी करने पर विचार कर रही है। नीलामी से मिली रकम को CMR पॉलिसी के तहत आवंटित धान के बदले जमा किया जा सकता है।
एसोसिएशन के चेयरमैन ज्वेल सिंगला ने कहा कि मिलर्स महीनों से बचे हुए चावल की डिलीवरी का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन उन्हें 59 लाख मीट्रिक टन की तय सीमा से ज़्यादा सप्लाई करने की इजाज़त नहीं मिली है।
सिंगला ने कहा, "हम बकाया चावल की डिलीवरी करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कोई भी हमें संतोषजनक जवाब नहीं दे रहा है। इस स्टेज पर फिजिकल वेरिफिकेशन करना मंज़ूर नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि DG ने उन्हें भरोसा दिलाया कि वेरिफिकेशन के दौरान मिलर्स को परेशान नहीं किया जाएगा। करनाल राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट सौरभ गुप्ता ने कहा, "हमारे पास बकाया चावल का पूरा स्टॉक है। अगर प्रशासन हमारी मिलों की जांच करना चाहता है, तो उसे यह काम रेगुलर काम के घंटों के दौरान करना चाहिए ताकि हम सहयोग कर सकें।"