बहादुरगढ़। औद्योगिक नगरी बहादुरगढ़ में पीएनजी की कीमतों में बार-बार हो रही बढ़ोतरी ने उद्योग जगत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहले से ही वैश्विक परिस्थितियों, बाजार में उतार-चढ़ाव, कच्चे माल की बढ़ती लागत और मांग में अस्थिरता जैसी चुनौतियों से जूझ रहे उद्यमियों के सामने अब प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतें नया संकट बनकर खड़ी हो गई हैं। उद्योगों में ईंधन के रूप में पीएनजी का इस्तेमाल करने वाली इकाइयों का कहना है कि गैस के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि तैयार माल के दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ पा रहे हैं।

उद्यमियों के मुताबिक उद्योगों के लिए ऊर्जा लागत उत्पादन प्रक्रिया का अहम हिस्सा होती है। ऐसे में पीएनजी के दाम में होने वाला मामूली इजाफा भी बड़ी औद्योगिक इकाइयों से लेकर छोटे और मध्यम उद्योगों तक पर सीधा असर डालता है। लगातार बढ़ती लागत के कारण मुनाफे का मार्जिन घट रहा है और कई इकाइयों के सामने उत्पादन को पहले की तरह जारी रखना चुनौती बनता जा रहा है।

लगातार बढ़ती लागत ने बढ़ाई चिंता

बहादुरगढ़ में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां अलग-अलग क्षेत्रों में उत्पादन करती हैं। इनमें कई उद्योग ऐसे हैं, जिनमें मशीनरी और उत्पादन प्रक्रिया के लिए गैस की आवश्यकता होती है। इन इकाइयों के लिए पीएनजी एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। गैस की कीमत बढ़ने के साथ ही इन उद्योगों की कुल उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है।

उद्यमियों का कहना है कि केवल गैस ही नहीं, बल्कि पिछले कुछ समय से बिजली, श्रम, परिवहन और कच्चे माल की लागत में भी दबाव बना हुआ है। ऐसे में पीएनजी की कीमतों में बार-बार होने वाली बढ़ोतरी ने उद्योगों के लागत ढांचे को और प्रभावित किया है।

वैश्विक हालात का भी असर

औद्योगिक क्षेत्र पहले से ही वैश्विक स्तर पर बने आर्थिक और कारोबारी हालात से प्रभावित है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग की स्थिति, कच्चे माल की कीमतों में बदलाव और निर्यात से जुड़ी चुनौतियों का असर स्थानीय उद्योगों पर भी पड़ता है। कई उद्यमियों का कहना है कि ऐसे समय में ऊर्जा लागत बढ़ने से प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और मुश्किल हो जाता है।

विशेषकर वे उद्योग जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करते हैं, उनके लिए लागत बढ़ना गंभीर चिंता का विषय है। यदि उत्पादन लागत बढ़ती है तो तैयार उत्पाद की कीमत बढ़ानी पड़ सकती है। लेकिन बाजार में प्रतिस्पर्धा अधिक होने के कारण हर बार उत्पाद की कीमत बढ़ाना संभव नहीं होता। इसका सीधा असर उद्योगों के मुनाफे पर पड़ता है।

छोटे उद्योगों पर अधिक दबाव

पीएनजी की बढ़ती कीमतों का असर छोटे और मध्यम उद्योगों पर अपेक्षाकृत अधिक पड़ने की आशंका है। बड़ी कंपनियां कुछ हद तक बढ़ी लागत को अपने संचालन में समायोजित कर सकती हैं, लेकिन सीमित पूंजी और कम मार्जिन पर काम करने वाली छोटी औद्योगिक इकाइयों के लिए ऊर्जा लागत में बढ़ोतरी बड़ी चुनौती बन जाती है।

उद्यमियों के मुताबिक छोटे उद्योगों में लागत बढ़ने के साथ कामकाजी पूंजी की जरूरत भी बढ़ती है। उत्पादन जारी रखने के लिए अधिक पैसा लगाना पड़ता है, जबकि बिक्री और भुगतान की स्थिति हमेशा स्थिर नहीं रहती। इससे नकदी प्रवाह पर दबाव पड़ता है और कारोबार चलाना कठिन हो जाता है।

उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

उद्योग जगत में यह चिंता भी बढ़ रही है कि यदि पीएनजी की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो कुछ इकाइयां उत्पादन में कटौती करने पर मजबूर हो सकती हैं। कुछ उद्योग वैकल्पिक ईंधन के विकल्प तलाश सकते हैं, लेकिन हर उत्पादन प्रक्रिया में ऐसा करना आसान नहीं है।

मशीनरी में बदलाव, वैकल्पिक ईंधन के लिए नए उपकरण लगाना और उत्पादन प्रणाली को दोबारा तैयार करना अपने आप में महंगा काम है। ऐसे में उद्यमियों के सामने सीमित विकल्प रह जाते हैं। वे बढ़ी हुई लागत को सहन करें या फिर उसका कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डालें।

सरकार से राहत की उम्मीद

उद्योग जगत अब सरकार और संबंधित एजेंसियों से राहत की उम्मीद कर रहा है। उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए ऊर्जा लागत को नियंत्रित करना जरूरी है। यदि उद्योगों को प्रतिस्पर्धी दरों पर गैस उपलब्ध हो तो उत्पादन लागत को संतुलित करने में मदद मिल सकती है।

उद्यमियों का यह भी कहना है कि उद्योगों को केवल रोजगार देने वाले क्षेत्र के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में उनकी अहम भूमिका है। उद्योगों पर लागत का दबाव बढ़ने का असर रोजगार, निवेश और सरकार को मिलने वाले राजस्व पर भी पड़ सकता है।

प्रतिस्पर्धा में बने रहना चुनौती

बहादुरगढ़ के उद्योग पहले से ही कई स्तरों पर प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ऊर्जा लागत बढ़ने से यहां निर्मित उत्पाद अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के उत्पादों की तुलना में महंगे पड़ सकते हैं। इसका असर ऑर्डर हासिल करने की क्षमता पर भी पड़ सकता है।

उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए उत्पादन लागत को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। यदि लागत लगातार बढ़ती रही तो नए निवेश पर भी असर पड़ सकता है और मौजूदा इकाइयों के विस्तार की योजनाएं टल सकती हैं।

फिलहाल पीएनजी की बढ़ती कीमतों ने बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। उद्यमी पहले से मौजूद आर्थिक और वैश्विक चुनौतियों के बीच गैस के बढ़ते दाम को अतिरिक्त बोझ मान रहे हैं। उद्योग जगत की नजर अब इस बात पर है कि आने वाले समय में पीएनजी की कीमतों में क्या बदलाव होता है और सरकार की ओर से बढ़ती उत्पादन लागत को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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