चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके ‘मोहब्बत की दुकान’ वाले नारे पर सवाल उठाए। उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों और 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए पूछा कि उस समय कांग्रेस की ‘मोहब्बत की दुकान’ कहां थी, जब लोग हिंसा और दमन का सामना कर रहे थे। सैनी ने कहा कि राहुल गांधी को देश के इतिहास के इन अध्यायों को भी स्वीकार करना चाहिए।यह बयान ऐसे समय में आया है, जब विपक्षी गठबंधन INDIA ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने की घोषणा की है।
1984 के सिख-विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस पर सवाल
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राहुल गांधी सार्वजनिक मंचों से प्रेम, सद्भाव और एकता की बात करते हैं, लेकिन कांग्रेस को अपने राजनीतिक इतिहास से जुड़े सवालों का भी जवाब देना चाहिए।उन्होंने 1984 के सिख-विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब हिंसा में सिख समुदाय के लोग मारे जा रहे थे और परिवार अपने प्रियजनों को खो रहे थे, तब ‘मोहब्बत की दुकान’ कहां थी? सैनी ने कहा कि उस समय प्रभावित परिवारों के लिए भी ऐसी संवेदना और सहयोग दिखाई देना चाहिए था।1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली सहित कई शहरों में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा हुई थी। इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोग मारे गए और हजारों परिवार प्रभावित हुए। यह घटना आज भी देश के इतिहास का एक संवेदनशील अध्याय है।सैनी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने इस घटना से जुड़े सवालों और पीड़ित परिवारों की मांगों पर पर्याप्त जवाबदेही नहीं दिखाई। ये आरोप भाजपा नेता की राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा हैं।
इमरजेंसी का जिक्र कर भी घेरा
हरियाणा के मुख्यमंत्री ने 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाए गए, विपक्षी नेताओं को जेलों में बंद किया गया और लोगों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।सैनी ने सवाल किया कि जब देश में आपातकाल लागू था और लोग अपने लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित हो रहे थे, तब कांग्रेस की ‘मोहब्बत की दुकान’ कहां थी?भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक आपातकाल लागू रहा। इस अवधि में नागरिक स्वतंत्रताओं और राजनीतिक विरोध पर व्यापक प्रतिबंध लगे थे। सैनी ने इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम का हवाला देते हुए कांग्रेस से अपने अतीत पर जवाब देने की मांग की।
1 नवंबर की INDIA गठबंधन रैली भी निशाने पर
सैनी की टिप्पणी का राजनीतिक संदर्भ विपक्षी गठबंधन की आगामी रैली से भी जुड़ा है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दल 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में मतदाता सूची पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।भाजपा नेताओं ने रैली की तारीख पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 1 नवंबर की तारीख 1984 के सिख-विरोधी दंगों की बरसी से जुड़ी है और इस दिन बड़े राजनीतिक आयोजन से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हो सकती हैं।दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन ने रैली को मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ अपना लोकतांत्रिक विरोध बताया है।
कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ी बयानबाजी
राहुल गांधी का ‘मोहब्बत की दुकान’ संदेश कांग्रेस की ओर से सद्भाव और नफरत के विरोध में इस्तेमाल किया जाता रहा है। भाजपा नेता इसके जवाब में कांग्रेस के ऐतिहासिक कार्यकाल और उससे जुड़े विवादों का उल्लेख करते रहे हैं।नायब सिंह सैनी ने इसी तर्क के आधार पर राहुल गांधी से सवाल किया कि प्रेम और सद्भाव की बात करते समय कांग्रेस को 1984 की हिंसा और आपातकाल जैसे अध्यायों पर भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।आगामी रैली से पहले दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज होने के संकेत हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कांग्रेस इन आरोपों का क्या जवाब देती है और 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाले कार्यक्रम में कौन-कौन से मुद्दे प्रमुखता से उठाए जाते हैं।