17 घंटे भिगोया, 7 कुकर सीटी... फिर भी सख्त रहा मिड-डे-मील का राजमा

Update: 2026-07-24 09:23 GMT

हिसार। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे-मील (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हिसार जिले के बयाना खेड़ा गांव स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति प्राइमरी विद्यालय ने मिड-डे-मील के तहत आपूर्ति किए गए राजमा और मसालों की घटिया गुणवत्ता को लेकर शिक्षा विभाग से शिकायत की है। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि करीब 17 घंटे तक पानी में भिगोने और कुकर में सात सीटी लगाने के बाद भी राजमा पूरी तरह सख्त रहा और गला ही नहीं। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए इस खाने को नहीं परोसा गया।

विद्यालय की रसोई में तैनात स्टाफ और स्कूल प्रबंधन समिति के अनुसार, राजमा पकाने की पूरी मानक प्रक्रिया अपनाई गई थी। राजमा को पकाने से पहले रात भर यानी लगभग 17 घंटे तक पानी में भिगोकर रखा गया ताकि वह अच्छी तरह फूल जाए। इसके बाद जब सुबह रसोई में कुकर चढ़ाकर सात सीटियां लगवाई गईं, तो भी राजमा का दाना-दाना पहले की तरह ही कड़ा और अधपका रहा। इस स्थिति में बच्चों को खाना परोसना उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना होता, इसलिए इस भोजन को बच्चों को नहीं दिया गया। घटना के तुरंत बाद विद्यालय ने हरियाणा एग्रो की ओर से सप्लाई किए गए राजमा और मसालों की गुणवत्ता पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बरवाला के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को लिखित शिकायत भेजी है।

विद्यालय प्रशासन और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) ने केवल राजमा ही नहीं, बल्कि हरियाणा एग्रो द्वारा भेजे गए मसालों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। स्कूल प्रबंधन समिति के प्रधान पवन कुमार ने बताया कि राजमा को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पकाने का प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं गला। साथ ही जो मसाले सप्लाई किए गए थे, उनकी गुणवत्ता और गंध भी संतोषजनक नहीं थी। उन्होंने कहा कि मिड-डे-मील बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी योजना है, इसलिए इसमें घटिया सामग्री की आपूर्ति बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

गौरतलब है कि हरियाणा के स्कूलों में मिड-डे-मील की सामग्री की गुणवत्ता को लेकर विवाद का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी प्रदेश के कई स्कूलों से गुड़, चीनी और अन्य खाद्य सामग्रियों की घटिया क्वालिटी को लेकर शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। उस समय लगातार शिकायतों के बाद मौलिक शिक्षा निदेशालय ने संज्ञान लेते हुए कुछ सामग्री स्थानीय स्तर पर खरीदने की अनुमति दी थी और आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार के कड़े निर्देश जारी किए थे। हालांकि, इसके बावजूद बयाना खेड़ा के स्कूल का यह ताजा मामला प्रशासनिक दावों की पोल खोलता दिख रहा है।

विद्यालय के मुख्य शिक्षक जगमेंद्र ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता है। इस मामले की शिकायत में दर्ज सभी बिंदुओं की जांच कराकर घटिया सामग्री भेजने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, इस शिकायत के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच की बात कह रहा है।

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