Sirsa सिरसा के घोरानवाली गाँव की रहने वाली एक महिला और राजस्थान के भादरा की रहने वाली दूसरी महिला—इन दो महिला उद्यमियों ने धान की पराली से सालाना 7-8 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा किया है। घोरानवाली में उनकी फैक्ट्री खेती से निकलने वाले कचरे को पावर प्लांट के लिए फ्यूल पेलेट्स (ईंधन की गोलियों) में बदलती है और 20 से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देती है। घोरानवाली की ग्रेजुएट संजना और उनकी दोस्त व बिज़नेस पार्टनर सोनिका (जो भादरा की रहने वाली हैं) ने 2024 में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) स्कीम के तहत लगभग 2.5 करोड़ रुपये के निवेश से यह फैक्ट्री शुरू की।
सस्टेनेबल बिज़नेस
सोनिका ने बताया कि उन्हें यह आइडिया धान की कटाई के बाद आसमान में छाने वाले घने धुएँ को देखकर आया। पराली जलाने से पर्यावरण और लोगों की सेहत पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित होकर, उन्होंने फसल के बचे हुए हिस्से (पराली) का सही इस्तेमाल करने के तरीके खोजने शुरू किए। उनका मकसद पर्यावरण की सुरक्षा में योगदान देना और साथ ही आर्थिक रूप से फायदेमंद बिज़नेस खड़ा करना था। सोनिका ने कहा कि सरकार की नीतियों और पराली मैनेजमेंट को बढ़ावा देने की कोशिशों से भी मदद मिली।
यह यूनिट हर साल लगभग 1 लाख से 1.5 लाख क्विंटल धान की पराली का इस्तेमाल करती है। कच्चा माल सिरसा और आस-पास के इलाकों में बेलर ऑपरेटरों से लिया जाता है। कटाई के मौसम में इकट्ठा की गई पराली को स्टोर करके रखा जाता है ताकि साल भर प्रोडक्शन चलता रहे। तैयार पेलेट्स को पावर प्लांट में ईंधन के तौर पर सप्लाई किया जाता है। इस काम से उन लोगों के लिए भी बिज़नेस के मौके बने हैं जो फसल के बचे हुए हिस्से को इकट्ठा करने और सप्लाई करने का काम करते हैं।