जनसंख्या मानदंड पर नगर निगमों की वैधता सवालों में

Update: 2026-07-26 09:19 GMT

हरियाणा: अंबाला और मानेसर नगर निगम एक बार फिर कानूनी विवादों में घिर गए हैं। दोनों नगर निगमों के वैधानिक अस्तित्व को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, क्योंकि हरियाणा नगर निगम अधिनियम-1994 के तहत नगर निगम बनाने के लिए निर्धारित न्यूनतम जनसंख्या मानदंड पूरा नहीं होने का दावा किया गया है। नियमों के अनुसार किसी क्षेत्र को नगर निगम का दर्जा देने के लिए वहां कम से कम तीन लाख की आबादी होना जरूरी है, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अंबाला और मानेसर इस सीमा से नीचे हैं।

कानून विशेषज्ञ और पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अधिवक्ता हेमंत कुमार ने इस मामले को लेकर पहले भी आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया है कि दोनों नगर निगमों का गठन निर्धारित कानूनी प्रावधानों के विपरीत किया गया है। उनके अनुसार, मानेसर नगर निगम की जनसंख्या करीब 1.62 लाख है, जबकि अंबाला नगर निगम में लगभग 2.58 लाख लोग रहते हैं। ऐसे में दोनों ही नगर निगम तीन लाख की अनिवार्य जनसंख्या सीमा पूरी नहीं करते हैं।

हेमंत कुमार ने बताया कि उन्होंने मार्च 2025 में मानेसर नगर निगम के पहले आम चुनाव से पहले राज्य निर्वाचन आयोग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों और संबंधित विभागों को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद मई 2026 में अंबाला नगर निगम चुनाव से पहले भी उन्होंने अधिकारियों को इसी मुद्दे पर नोटिस भेजा। उनका कहना है कि चुनाव से पहले दोनों नगर निगमों की आधिकारिक जनसंख्या को कानून के अनुरूप सुनिश्चित किया जाना चाहिए था, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके नोटिस का अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। इसी कारण उन्होंने नगर निगमों के गठन और चुनाव प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी संस्था का गठन कानून में तय मानकों को पूरा किए बिना किया गया है तो उसके निर्णयों और चुनाव प्रक्रिया की वैधानिकता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

हरियाणा में नगर निगमों की जनसंख्या पर नजर डालें तो कई बड़े शहर निर्धारित सीमा से काफी ऊपर हैं। फरीदाबाद नगर निगम की आबादी करीब 20.42 लाख, गुरुग्राम की 11.31 लाख, पानीपत की 6.97 लाख, यमुनानगर की 5.47 लाख, रोहतक की 4.66 लाख और करनाल की 4.12 लाख है। वहीं हिसार, सोनीपत और पंचकूला भी तीन लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगम हैं। इसके मुकाबले अंबाला और मानेसर की आबादी काफी कम बताई जा रही है।

मानेसर नगर निगम का गठन औद्योगिक और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए किया गया था। यहां बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां और आवासीय परियोजनाएं हैं। वहीं अंबाला एक ऐतिहासिक शहर होने के साथ-साथ व्यापार और सैन्य गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि विकास और महत्व के बावजूद नगर निगम का दर्जा देने के लिए निर्धारित नियमों का पालन जरूरी है।

अब इस मामले में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि कानूनी चुनौती आगे बढ़ती है तो राज्य सरकार और संबंधित विभागों को नगर निगमों के गठन से जुड़े दस्तावेज, जनसंख्या आंकड़े और कानूनी प्रावधानों का जवाब देना पड़ सकता है। फिलहाल अंबाला और मानेसर नगर निगमों का भविष्य कानूनी प्रक्रिया और सरकार के रुख पर निर्भर करता है।

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