नारनौल। हरियाणा के नारनौल में सोमवार को आयोजित जिला लोक शिकायत एवं कष्ट निवारण समिति (ग्रीवेंस कमेटी) की बैठक में समय की पाबंदी को लेकर विवाद खड़ा हो गया। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री विपुल गोयल की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में उनके देर से पहुंचने पर भाजपा नेता और हरियाणा एग्रो के पूर्व चेयरमैन गोविंद भारद्वाज नाराज हो गए। उन्होंने बैठक का बहिष्कार करते हुए मंत्री की कार्यशैली और समय पालन को लेकर सवाल उठाए।
गोविंद भारद्वाज बैठक स्थल से बाहर निकल आए और उन्होंने कहा कि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन और समय की पाबंदी सभी के लिए समान होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई अधिकारी किसी मंत्री की बैठक में कुछ मिनट देर से पहुंचता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाती है, लेकिन जब मंत्री स्वयं तय समय पर नहीं पहुंचते तो इस पर कोई सवाल नहीं उठाया जाता।
भाजपा नेता ने कहा कि नियम और जिम्मेदारी केवल अधिकारियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों को भी जनता और अधिकारियों के समय का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार में जवाबदेही की व्यवस्था तभी मजबूत होगी, जब सभी लोग नियमों का समान रूप से पालन करेंगे।
जानकारी के अनुसार, नारनौल में जिला लोक शिकायत एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इसमें जिले से जुड़े लोगों की शिकायतों और समस्याओं पर चर्चा होनी थी। बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा जनप्रतिनिधि और अन्य सदस्य भी मौजूद थे। इसी दौरान मंत्री विपुल गोयल के पहुंचने में देरी हुई, जिसके बाद गोविंद भारद्वाज ने विरोध जताते हुए बैठक से दूरी बना ली।
गोविंद भारद्वाज ने कहा कि जनता अपनी समस्याओं को लेकर बैठकों में पहुंचती है और अधिकारियों को भी तय समय पर उपस्थित रहने के निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में समय का पालन सभी के लिए जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर व्यवस्था में सुधार लाना है तो जवाबदेही का पैमाना सबके लिए एक जैसा होना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की छवि और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए समय की कीमत समझनी होगी। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी बैठकों में समय पालन को लेकर सख्ती बरती जाए, ताकि आम लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक स्थल पर मौजूद लोगों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा होती रही। हालांकि, मंत्री विपुल गोयल की ओर से इस मामले पर तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने बैठक की कार्यवाही को आगे बढ़ाया।
गौरतलब है कि जिला लोक शिकायत एवं कष्ट निवारण समिति की बैठकें आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए आयोजित की जाती हैं। इनमें जमीन, प्रशासनिक सेवाओं, सरकारी योजनाओं और अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतों पर सुनवाई की जाती है। इन बैठकों में मंत्री और अधिकारी शिकायतों का निपटारा करने का प्रयास करते हैं।
भाजपा नेता गोविंद भारद्वाज के विरोध के बाद अब यह मुद्दा राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पद बड़ा होने से नियम अलग नहीं हो जाते। उन्होंने दोहराया कि समय की पाबंदी और अनुशासन हर व्यक्ति के लिए जरूरी है, चाहे वह अधिकारी हो या जनप्रतिनिधि।
इस पूरे मामले को लेकर अब आगे की प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं, भाजपा नेता के विरोध के बाद जिला स्तर पर आयोजित होने वाली बैठकों में समय पालन को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है।