धर्मशाला। तिब्बती बौद्ध परंपरा में महिला सशक्तिकरण और धार्मिक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में बुधवार, 21 अक्टूबर को आयोजित विशेष समारोह में 33 तिब्बती बौद्ध भिक्षुणियों को प्रतिष्ठित 'गेशेमा' डिग्री प्रदान की गई। यह उपाधि बौद्ध दर्शन में डॉक्टरेट के समकक्ष मानी जाती है। गेशेमा स्नातकों के नौवें बैच के सम्मान में आयोजित समारोह में प्रसिद्ध तिब्बती धर्मगुरु लिंग रिम्पोछे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस उपलब्धि को तिब्बती मठ परंपरा में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और नेतृत्व के नए अवसर खुलने के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
33 भिक्षुणियों को मिली प्रतिष्ठित उपाधि
धर्मशाला में आयोजित समारोह के दौरान 33 भिक्षुणियों को उनकी वर्षों की कठिन साधना, अध्ययन और बौद्ध दर्शन में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए गेशेमा डिग्री से सम्मानित किया गया।यह डिग्री तिब्बती बौद्ध शिक्षा प्रणाली की सर्वोच्च शैक्षणिक योग्यताओं में से एक है। इसे प्राप्त करने के लिए भिक्षुणियों को लंबे समय तक धार्मिक ग्रंथों, तर्कशास्त्र, बौद्ध दर्शन और आध्यात्मिक विषयों का गहन अध्ययन करना पड़ता है।समारोह में मौजूद धार्मिक गुरुओं ने भिक्षुणियों की उपलब्धि को महत्वपूर्ण बताया। यह अवसर उन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से मठों की उच्च शिक्षा प्रणाली में पुरुषों के समान अवसर नहीं मिलते थे।
दलाई लामा से लिया आशीर्वाद
डिग्री वितरण समारोह से पहले सभी 33 भिक्षुणियों ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।दलाई लामा लंबे समय से तिब्बती बौद्ध परंपरा में महिलाओं की शिक्षा और धार्मिक अध्ययन में समान अवसरों का समर्थन करते रहे हैं। उनके प्रयासों से भिक्षुणियों के लिए उच्च धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने का रास्ता खुला।वर्ष 1995 में महिलाओं को बौद्ध दार्शनिक वाद-विवाद में भाग लेने के अवसर मिलने लगे थे। इसके बाद उच्च शिक्षा में उनकी भागीदारी बढ़ी और गेशेमा परीक्षा व्यवस्था को विकसित किया गया।
16 से 17 वर्षों की कठिन पढ़ाई के बाद सफलता
डिग्री प्राप्त करने वाली भिक्षुणियों में हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले की आराधना भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनका इस डिग्री को पूरा करने का इरादा नहीं था, लेकिन बौद्ध दर्शन में रुचि बढ़ने के साथ उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।आराधना के अनुसार, उन्होंने लगभग 16 से 17 वर्षों तक मठ में अध्ययन किया और इसके बाद चार वर्षों की विशेष परीक्षा प्रक्रिया पूरी की।उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी उपलब्धि अन्य महिलाओं को भी उच्च शिक्षा और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए प्रेरित करेगी।नेपाल के कोपन मठ से जुड़ी सांगे चिनजोम ने कहा कि इस शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करना नहीं, बल्कि अर्जित ज्ञान के माध्यम से समाज और दुनिया के लोगों की सहायता करना भी है।
पहले पुरुष भिक्षुओं तक सीमित थी उच्च शिक्षा
तिब्बती बौद्ध मठों में लंबे समय तक सर्वोच्च धार्मिक शैक्षणिक उपाधियां मुख्य रूप से पुरुष भिक्षुओं को ही प्रदान की जाती थीं। महिलाओं के लिए समान स्तर की औपचारिक शिक्षा और मान्यता प्राप्त करना कठिन था।वर्ष 2012 में दलाई लामा और केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रयासों से गेशेमा डिग्री महिलाओं के लिए औपचारिक रूप से उपलब्ध कराई गई।इसके बाद वर्ष 2016 में पहली बार 20 तिब्बती बौद्ध भिक्षुणियों को यह प्रतिष्ठित उपाधि प्रदान की गई। यह तिब्बती धार्मिक शिक्षा के इतिहास में महत्वपूर्ण बदलाव था।
अब धार्मिक शिक्षा में निभा सकेंगी नेतृत्व की भूमिका
गेशेमा डिग्री प्राप्त करने वाली भिक्षुणियां अब बौद्ध दर्शन की शिक्षिका बनने, धार्मिक चर्चाओं में भाग लेने और मठों की शैक्षणिक गतिविधियों का नेतृत्व करने के लिए अधिक अवसर प्राप्त कर सकेंगी।इसके अलावा उन्हें तिब्बती भाषा, धार्मिक ग्रंथों, सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।इस वर्ष 33 नई भिक्षुणियों को डिग्री मिलने के बाद दुनिया भर में गेशेमा उपाधिधारक महिलाओं की संख्या 150 से अधिक हो गई है।धर्मशाला में आयोजित यह समारोह केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि महिलाओं की धार्मिक शिक्षा, समान अवसर और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
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