शिमला : हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) शिमला में कैंसर मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। अस्पताल में कीमोथेरेपी से जुड़ी जरूरी दवाओं का स्टॉक खत्म होने के कारण कई मरीजों को मजबूरी में बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों का आरोप है कि इलाज के लिए जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कैंसर मरीजों के लिए कीमोथेरेपी का हर चक्र समय पर होना बेहद जरूरी होता है। लेकिन दवाओं की कमी के कारण कई मरीजों को अस्पताल की बजाय मेडिकल स्टोर का रुख करना पड़ रहा है। कुछ मरीजों के परिजनों का कहना है कि जो दवा अस्पताल में मुफ्त या कम कीमत पर मिलनी चाहिए, उसे बाहर से खरीदने में हजारों रुपये खर्च हो रहे हैं।
मरीजों के अनुसार, कुछ कीमोथेरेपी दवाओं की कीमत करीब 6000 रुपये तक पहुंच रही है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना बेहद मुश्किल हो रहा है। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में इलाज पहले ही काफी महंगा होता है, ऐसे में दवाओं की कमी ने मरीजों की परेशानी और बढ़ा दी है।
IGMC हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है और यहां राज्यभर से कैंसर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में अस्पताल में जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इससे पहले भी IGMC में कैंसर मरीजों को जरूरी इंजेक्शन और दवाएं नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं।
विपक्ष ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। आरोप लगाया गया है कि प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में अगर कैंसर मरीजों को दवाओं के लिए भटकना पड़ रहा है तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि महंगी और विशेष श्रेणी की दवाओं की खरीद प्रक्रिया अलग होती है। सरकार ने भविष्य में जरूरी दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कदम उठाने की बात कही है। कैंसर मरीजों और उनके परिवारों की मांग है कि सरकारी अस्पतालों में ऐसी दवाओं का पर्याप्त स्टॉक हमेशा उपलब्ध रखा जाए, ताकि इलाज में देरी न हो और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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