प्राइड ऑफ हिल्स योजना को केंद्र की सौगात

Update: 2026-07-26 12:20 GMT

हिमाचल प्रदेश: राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद आर्थिक दबाव से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार की प्राइड ऑफ हिल्स योजना के तहत बड़ी राहत मिली है। केंद्र ने योजना के अंतर्गत स्वीकृत 3920 करोड़ रुपये की विशेष वित्तीय सहायता में से पहली किश्त के रूप में 2395 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। यह राशि अनटाइड ग्रांट के रूप में दी गई है, जिसका उपयोग राज्य सरकार अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार विकास कार्यों और वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में कर सकेगी।

हिमाचल प्रदेश सरकार लंबे समय से राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के कारण आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही थी। ऐसे समय में केंद्र से मिली यह सहायता राज्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्राइड ऑफ हिल्स योजना के तहत केंद्र ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए हिमाचल को कुल 3920 करोड़ रुपये की विशेष सहायता देने की मंजूरी दी है। इसमें 60 प्रतिशत राशि यानी 2395 करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी कर दी गई है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि नवंबर में दूसरी और अंतिम किश्त के रूप में मिलने की उम्मीद है।

राज्य सरकार इस राशि का इस्तेमाल विकास योजनाओं को गति देने, जरूरी वित्तीय दायित्वों को पूरा करने और प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में करेगी। अनटाइड ग्रांट होने के कारण सरकार इस धनराशि को अपनी जरूरतों के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में खर्च कर सकती है।

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश को पहले राजस्व घाटा अनुदान के तहत केंद्र से बड़ी आर्थिक सहायता मिलती रही थी। आरडीजी के अंतिम वर्ष में प्रदेश को करीब 3300 करोड़ रुपये मिले थे। इससे पहले शुरुआती वर्षों में यह सहायता राशि लगभग 11 हजार करोड़ रुपये तक रही थी। हालांकि, समय के साथ इसमें लगातार कमी आई और 16वें वित्त आयोग के बाद यह अनुदान बंद कर दिया गया।

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने के फैसले का हिमाचल प्रदेश सरकार ने विरोध भी किया था। राज्य विधानसभा में विशेष प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से इसे जारी रखने की मांग की गई थी। सरकार का तर्क था कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियां अलग हैं और यहां विकास कार्यों की लागत मैदानी राज्यों की तुलना में अधिक आती है।

प्राइड ऑफ हिल्स योजना को इसी वित्तीय चुनौती के बीच राज्य के लिए अहम सहायता के तौर पर देखा जा रहा है। प्रदेश सरकार का कहना है कि इस राशि से विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी और आर्थिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

हिमाचल प्रदेश पर वर्तमान में करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। कर्ज के बढ़ते बोझ और आय के सीमित साधनों के कारण राज्य सरकार लगातार वित्तीय प्रबंधन की चुनौती से गुजर रही है। ऐसे में केंद्र से मिली यह सहायता राज्य के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, इस राशि का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं और अन्य जरूरी कार्यों में किया जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सुविधाओं के विस्तार के लिए भी इस वित्तीय सहायता से मदद मिलने की उम्मीद है।

वहीं, नवंबर में मिलने वाली दूसरी किश्त के बाद प्रदेश की वित्तीय स्थिति को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का प्रयास है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर विकास योजनाओं को आगे बढ़ाया जाए और राज्य की आर्थिक स्थिति को स्थिर किया जा सके।

प्राइड ऑफ हिल्स योजना के तहत मिली यह सहायता हिमाचल प्रदेश के लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि वित्तीय दबाव के दौर में एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है। केंद्र से मिली इस राशि के बाद अब राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि वह इसका उपयोग प्रभावी तरीके से कर प्रदेश के विकास को नई गति दे।

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