चिंतपूर्णी मंदिर विकास पर सरकार को हाईकोर्ट की चेतावनी

Update: 2026-07-28 15:20 GMT

हिमाचल प्रदेश: हाईकोर्ट ने प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर परिसर के विकास कार्यों में हो रही देरी को लेकर राज्य सरकार पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा है कि यदि तय समय सीमा में आदेशों का पालन नहीं किया गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू की जा सकती है। कोर्ट की इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक स्तर पर मंदिर विकास कार्यों को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।

मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने की। यह सुनवाई चिंतपूर्णी मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण, विस्तार और पार्किंग व्यवस्था से जुड़ी जनहित याचिका और अन्य संबंधित मामलों में हुई। अदालत ने कहा कि पहले दिए गए आदेशों का समय पर पालन नहीं किया गया है, जो गंभीर विषय है।

सुनवाई के दौरान ऊना के उपायुक्त की ओर से हाईकोर्ट में एक हलफनामा पेश किया गया। इसमें प्रशासन ने बताया कि मंदिर परिसर के आसपास उपलब्ध पार्किंग स्थलों की पहचान कर ली गई है। इसके अलावा भारी वाहनों के लिए मंदिर परिसर से करीब दो किलोमीटर दूर सरकारी भूमि भी चिन्हित की गई है। प्रशासन के अनुसार इस जमीन को माता श्री चिंतपूर्णी जी मंदिर ट्रस्ट के नाम स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। भूमि हस्तांतरण पूरा होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

प्रशासन ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि मंदिर परिसर के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आसपास की जमीन अधिग्रहित करने की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए स्थानीय दुकानदारों और अन्य संबंधित लोगों से बातचीत की जा रही है। प्रस्तावित विकास योजना में श्रद्धालुओं के लिए विश्राम गृह, पेयजल सुविधा, शौचालय, नई पार्किंग व्यवस्था और अन्य जरूरी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

हालांकि याचिकाकर्ता और मामले में जुड़े मध्यस्थों ने प्रशासन की रिपोर्ट पर सवाल उठाए। याचिकाकर्ता रजनीश खोसला ने कहा कि कई महीने बीतने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई खास प्रगति नजर नहीं आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि काम केवल कागजों तक सीमित है और वास्तविक स्थिति में बदलाव दिखाई नहीं दे रहा।

अन्य मध्यस्थों ने भी ऊना प्रशासन की स्टेटस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि यदि सरकार आदेशों का पालन नहीं करती है तो उसके खिलाफ अवमानना की प्रक्रिया शुरू की जाए। उनका कहना था कि मंदिर विकास जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक और जनसुविधा से जुड़े प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी श्रद्धालुओं के हितों को प्रभावित कर रही है।

इन दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की। अदालत ने कहा कि 30 दिसंबर 2024 को जारी किए गए आदेशों का निर्धारित समय में पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासन की ओर से दाखिल हलफनामे में भूमि अधिग्रहण और विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो संबंधित अधिकारियों को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंदिर विकास योजना को गंभीरता से लिया जाए और आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। अब सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती है कि इससे पहले विकास कार्यों की प्रगति रिपोर्ट और ठोस कार्रवाई कोर्ट के सामने पेश की जाए। चिंतपूर्णी मंदिर हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर के आधुनिकीकरण और सुविधाओं के विस्तार को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

Tags:    

Similar News