जनजातीय इलाकों में ड्यूटी से बचना पड़ेगा भारी, ACS ने तलब की रिपोर्ट, CM करेंगे समीक्षा
हिमाचल के जनजातीय क्षेत्रों में ड्यूटी से बचने वालों पर होगी सख्ती
Shimla: हिमाचल प्रदेश सरकार जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में नियुक्ति के बावजूद ड्यूटी से बचने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। इस संबंध में अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) ने संबंधित विभागों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट मिलने के बाद पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा, ताकि आवश्यक प्रशासनिक और नीतिगत निर्णय लिए जा सकें।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, कई विभागों से यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ अधिकारी और कर्मचारी जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती से बचने के लिए विभिन्न कारणों का सहारा ले रहे हैं या निर्धारित अवधि तक सेवाएं नहीं दे रहे हैं। इससे इन इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सरकारी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
इसी को देखते हुए सरकार ने सभी संबंधित विभागों से ऐसे मामलों का पूरा ब्यौरा मांगा है। रिपोर्ट में यह जानकारी शामिल होगी कि किन अधिकारियों और कर्मचारियों ने जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती से छूट ली, किस आधार पर राहत दी गई और वर्तमान में वहां कितने पद रिक्त हैं।
सरकार का मानना है कि जनजातीय क्षेत्रों में भी नागरिकों को अन्य क्षेत्रों की तरह गुणवत्तापूर्ण सरकारी सेवाएं मिलनी चाहिए। इसलिए वहां पर्याप्त संख्या में कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। यदि जांच में यह पाया जाता है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने बिना उचित कारण के ड्यूटी से बचने का प्रयास किया है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके आधार पर जनजातीय क्षेत्रों में तैनाती नीति को और प्रभावी बनाने, रिक्त पदों को भरने तथा आवश्यक होने पर नए दिशा-निर्देश जारी करने पर भी विचार किया जा सकता है।
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में नियमित रूप से कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, राजस्व और अन्य सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा। वहीं, सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य कर्मचारियों को अनावश्यक रूप से दंडित करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।