श्रीनगर, यहाँ की एक अदालत ने चेक बाउंस के एक मामले में एक व्यक्ति को एक साल की साधारण कैद की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत ने उसे निर्देश दिया है कि वह शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर चेक की रकम से दोगुनी राशि का भुगतान करे। श्रीनगर के सब-जज जुनैद इम्तियाज मीर की अदालत ने नेहरू पार्क, श्रीनगर के बशीर अहमद बुजल को 46.50 लाख रुपये के चेक बाउंस होने के मामले में दोषी ठहराते हुए यह सजा सुनाई। यह मामला निशात के नसीर अहमद रट्टा द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा था कि संपत्ति से जुड़े उनके व्यावसायिक लेन-देन के निपटारे के बाद, आरोपी पर उसके 46.50 लाख रुपये बकाया थे।
बुजल ने 46.50 लाख रुपये का एक चेक दिया था, जिसे बैंक ने "पेमेंट स्टॉप्ड बाय ड्रॉअर" (भुगतानकर्ता द्वारा भुगतान रोका गया) टिप्पणी के साथ बाउंस कर दिया। इसके बाद एक कानूनी नोटिस भेजा गया, लेकिन आरोपी तय समय के भीतर भुगतान करने में विफल रहा। आरोपी ने अपनी जिम्मेदारी से इनकार करते हुए दावा किया कि उसने अपने व्यावसायिक संबंधों के दौरान शिकायतकर्ता को एक हस्ताक्षरित (साइन किया हुआ) खाली चेक दिया था, जिसका बाद में गलत इस्तेमाल किया गया। हालांकि, अदालत ने माना कि बचाव पक्ष, चेक पर मौजूद स्वीकार किए गए हस्ताक्षर और चेक सौंपे जाने से जुड़ी कानूनी धारणा (presumption) को गलत साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने कहा कि यदि चेक पाने वाला व्यक्ति (payee) किसी हस्ताक्षरित चेक में विवरण भरता है, तो इससे न तो वह चेक अमान्य हो जाता है और न ही इससे कानूनी धारणा खत्म होती है। अदालत ने कहा कि आरोपी ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो सके कि चेक का गलत इस्तेमाल हुआ था या उस पर कोई बकाया राशि नहीं थी। अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता ने अपराध के सभी जरूरी तत्वों को साबित कर दिया है, और इसके आधार पर बुजल को 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया।