नेहरू मार्केट में जर्जर क्वार्टरों से खतरा 54 दुकानों पर मंडरा रहा संकट
15 साल से सिर पर मंडरा रहा खतरा
जम्मू: शहर के व्यस्त नेहरू मार्केट में जर्जर हो चुके सरकारी क्वार्टर लंबे समय से दुकानदारों और यहां आने वाले लोगों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। करीब 15 वर्षों से इन भवनों की स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि इन जर्जर क्वार्टरों के नीचे करीब 54 दुकानें संचालित हो रही हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।
समय बीतने के साथ भवनों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पुराने निर्माण में कई जगह टूट-फूट और कमजोरी दिखाई देती है। ऐसे में दुकानदारों को आशंका है कि समय रहते मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश और खराब मौसम के दौरान खतरा और बढ़ने की आशंका रहती है। नेहरू मार्केट जम्मू के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में शामिल है। यहां दिनभर ग्राहकों और व्यापारियों की आवाजाही बनी रहती है। जर्जर सरकारी क्वार्टरों के ठीक नीचे दुकानें होने के कारण भवनों की सुरक्षा केवल वहां रहने वाले लोगों तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि दुकानदारों, कर्मचारियों और बाजार आने वाले ग्राहकों से भी जुड़ी हुई है।
बताया जा रहा है कि भवनों की स्थिति को लेकर वर्षों से संबंधित विभागों और प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया जाता रहा है। दुकानदार चाहते हैं कि भवनों की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि ये रहने या व्यावसायिक गतिविधियों के लिहाज से असुरक्षित पाए जाते हैं तो तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं। व्यापारियों के सामने दूसरी चुनौती उनकी आजीविका की है। यदि भवन को खाली कराने या तोड़ने का फैसला होता है तो नीचे चल रही 54 दुकानों के भविष्य और व्यापारियों के पुनर्वास का सवाल भी सामने आएगा। ऐसे में दुकानदार चाहते हैं कि किसी भी कार्रवाई से पहले उनके हितों और सुरक्षा दोनों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट योजना बनाई जाए।
पुराने और जर्जर भवनों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी संरचनात्मक मजबूती का आकलन है। विशेषज्ञों की जांच से यह निर्धारित किया जा सकता है कि इमारत की मरम्मत संभव है या इसे पूरी तरह हटाकर नए सिरे से निर्माण करने की आवश्यकता है। लंबे समय तक निर्णय नहीं होने से जोखिम बढ़ सकता है।
करीब डेढ़ दशक से समाधान का इंतजार कर रहे नेहरू मार्केट के व्यापारियों को अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद है। उनकी मांग है कि जर्जर सरकारी क्वार्टरों की सुरक्षा जांच जल्द कराकर समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि बाजार में किसी संभावित हादसे से पहले ही खतरे को दूर किया जा सके।