श्रीनगर, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को सऊदी अरब में आम नागरिकों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे (जिसमें किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भी शामिल है) पर यमन से सक्रिय हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए भयानक हमलों की निंदा की। उन्होंने इन दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों और घायल हुए लोगों के प्रति गहरा दुख व्यक्त किया। एक बयान में, डॉ. फारूक ने कहा कि आम नागरिकों, हवाई अड्डों और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना बेहद चिंताजनक है। "इस तरह की हरकतें न केवल क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा हैं, बल्कि इनके पूरी दुनिया पर दूरगामी परिणाम भी हो सकते हैं।"
डॉ. फारूक ने कहा कि मक्का मुकर्रमा और मदीना मुनव्वरा सहित 'हरमैन शरीफैन' (पवित्र स्थल) की पवित्रता दुनिया भर के मुसलमानों की आस्था और श्रद्धा का केंद्र है। "इन पवित्र स्थानों और इनसे जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी संबंधित पक्षों की नैतिक जिम्मेदारी है।" उन्होंने उम्मीद जताई कि अल्लाह 'हरमैन शरीफैन' की हिफाजत करेगा और मुस्लिम जगत को शांति, एकता और सुरक्षा प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक शांति, आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है। "इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एक बड़ा संघर्ष वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को बाधित कर सकता है, ईंधन की कीमतें बढ़ा सकता है, व्यापार पर असर डाल सकता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। ऐसी स्थितियों का सबसे ज्यादा बोझ अक्सर आम नागरिकों और समाज के कम आय वाले वर्गों को उठाना पड़ता है।"
डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पश्चिम एशिया पहले से ही कई जटिल मुद्दों और संघर्षों से जूझ रहा है, और ऐसी उकसावे वाली हरकतें पहले से ही अस्थिर स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से संयम, समझदारी और जिम्मेदारी बरतने की अपील की, और तनाव कम करने तथा शांतिपूर्ण तरीकों से विवादों को सुलझाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा। हर हाल में आम नागरिकों की जान, उनकी संपत्ति और जरूरी बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी आग्रह किया कि वे इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को खत्म करने, आम नागरिकों की रक्षा करने और स्थायी शांति स्थापित करने के लिए अपने राजनयिक प्रयासों को तेज करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र में और अधिक तबाही को रोकने तथा एक बड़े मानवीय और आर्थिक संकट को टालने के लिए मिलकर प्रयास करना बहुत जरूरी है।
इससे पहले, डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने प्रसिद्ध दरगाह हजरतबल में जुमे की नमाज अदा की। हजारों श्रद्धालुओं के साथ, उन्होंने जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने इस्लाम की शान, मुसलमानों की सफलता और भलाई, जम्मू-कश्मीर के लोगों की समृद्धि और कल्याण, शांति और सुकून, प्रगति और विकास, फिलिस्तीनी लोगों, तथा हरमैन शरीफैन की सुरक्षा और हिफाजत के लिए भी दुआ की।