जम्मू-कश्मीर : लद्दाख में पर्यटन गतिविधियों के लगातार विस्तार के बीच प्रमुख पर्यटन स्थलों और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत पर संसदीय समिति ने जोर दिया है। समिति ने इन क्षेत्रों में व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार करने की सिफारिश की है, जिसमें सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर व्यापक CCTV कवरेज, सेंट्रलाइज़्ड मॉनिटरिंग सुविधाएं, नियमित रूप से सुरक्षा कमजोरियों की पहचान और समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट शामिल हैं।

समिति के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में पर्यटन स्थलों की संख्या और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ सुरक्षा चुनौतियों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। ऐसे में केवल पारंपरिक सुरक्षा व्यवस्था पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक तकनीक, खुफिया सूचनाओं के बेहतर इस्तेमाल और निगरानी क्षमताओं को एकीकृत करने की आवश्यकता है।

सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुरक्षा समीक्षा

संसदीय समिति के सदस्यों ने मई में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा कर वहां मौजूद सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया था। समिति ने इसके अलावा द्रास और कारगिल में स्थित ऊंचाई वाले सैन्य प्रतिष्ठानों और चौकियों का भी दौरा किया।

दौरे के दौरान समिति ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, सीमावर्ती क्षेत्रों की संवेदनशीलता और पर्यटन स्थलों पर बढ़ती भीड़ को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। समिति का मानना है कि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्यटन स्थलों पर निगरानी तंत्र को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत किया जाना जरूरी है।

CCTV नेटवर्क और केंद्रीकृत निगरानी पर जोर

समिति ने प्रमुख पर्यटन स्थलों पर व्यापक CCTV कवरेज स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। इसका उद्देश्य केवल घटनाओं की रिकॉर्डिंग करना नहीं, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी और समय रहते प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है।

इसके लिए सेंट्रलाइज़्ड मॉनिटरिंग सुविधाएं विकसित करने की सिफारिश की गई है। ऐसी व्यवस्था में विभिन्न पर्यटन स्थलों से आने वाले CCTV और अन्य सुरक्षा सेंसरों के इनपुट को एक केंद्रीकृत नियंत्रण केंद्र में मॉनिटर किया जा सकता है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को किसी संदिग्ध गतिविधि या आपात स्थिति की स्थिति में तेजी से कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि CCTV और निगरानी प्रणाली को केवल एक बार स्थापित करके छोड़ने के बजाय उसकी नियमित समीक्षा की जानी चाहिए। तकनीकी खामियों, ब्लाइंड स्पॉट और अन्य कमजोरियों की समय-समय पर पहचान कर उन्हें दूर करने की जरूरत है।

नियमित सुरक्षा ऑडिट की सिफारिश

सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने के लिए समिति ने नियमित सुरक्षा ऑडिट पर भी जोर दिया है। पर्यटन स्थलों पर समय के साथ नए प्रवेश मार्ग, पार्किंग क्षेत्र, होटल, बाजार और अन्य सुविधाएं विकसित होती रहती हैं। इससे सुरक्षा व्यवस्था में नए गैप पैदा हो सकते हैं।

इसी वजह से समिति ने सुझाव दिया है कि संवेदनशील और प्रमुख पर्यटन स्थलों का समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट किया जाए। ऑडिट के दौरान CCTV कवरेज, प्रवेश और निकास बिंदु, आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था, संचार प्रणाली और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की समीक्षा की जा सकती है।

इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस और सर्विलांस सिस्टम

समिति ने बदलते सुरक्षा खतरों को देखते हुए इंटीग्रेटेड इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR) क्षमताओं में लगातार निवेश की आवश्यकता बताई है। इसका उद्देश्य अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच सूचना और निगरानी तंत्र को बेहतर तरीके से जोड़ना है।

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भूगोल, मौसम और सीमावर्ती परिस्थितियां सुरक्षा एजेंसियों के सामने अलग तरह की चुनौतियां पेश करती हैं। ऐसे में जमीन पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ आधुनिक निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल सुरक्षा प्रतिक्रिया को और प्रभावी बना सकता है।

समिति का मानना है कि खुफिया सूचनाओं, निगरानी और टोही क्षमताओं के बेहतर एकीकरण से संभावित खतरों की पहचान पहले की जा सकती है और सुरक्षा एजेंसियों को कार्रवाई के लिए अधिक समय मिल सकता है।

काउंटर-ड्रोन तकनीक पर भी जोर

सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समिति ने काउंटर-ड्रोन सिस्टम में निवेश की भी सिफारिश की है। ड्रोन तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों, सीमावर्ती इलाकों और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों की हवाई निगरानी को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।

काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के माध्यम से अनधिकृत या संदिग्ध ड्रोन की पहचान और उनसे उत्पन्न संभावित खतरे से निपटने की क्षमता विकसित की जा सकती है। समिति ने इस क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ स्वदेशी प्रणालियों के विकास और इस्तेमाल को भी महत्वपूर्ण बताया है।

सुरक्षित कम्युनिकेशन नेटवर्क की जरूरत

समिति ने सुरक्षा एजेंसियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद संचार नेटवर्क को भी प्राथमिकता देने की बात कही है। दूरदराज के पहाड़ी इलाकों और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सामान्य संचार व्यवस्था कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

ऐसे में सुरक्षा बलों और संबंधित एजेंसियों के बीच निर्बाध और सुरक्षित संचार व्यवस्था जरूरी है। विशेष रूप से आपात स्थिति में सूचनाओं के तेजी से आदान-प्रदान और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए मजबूत कम्युनिकेशन नेटवर्क महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

हाई-एल्टीट्यूड तकनीक में स्वदेशी निवेश

समिति ने स्वदेशी हाई-एल्टीट्यूड टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश की जरूरत पर भी जोर दिया है। द्रास और कारगिल जैसे अत्यधिक ऊंचाई वाले इलाकों में काम करने वाले सुरक्षा बलों के सामने मौसम, ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड और दुर्गम भूभाग जैसी चुनौतियां रहती हैं।

ऐसे क्षेत्रों के लिए निगरानी उपकरण, संचार प्रणालियां, सेंसर और अन्य तकनीकी समाधान सामान्य परिस्थितियों से अलग जरूरतों के अनुरूप विकसित करने पड़ते हैं। समिति का मानना है कि स्वदेशी तकनीक के विकास से इन इलाकों में सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता बढ़ाई जा सकती है और विदेशी तकनीक पर निर्भरता भी कम की जा सकती है।

पर्यटन और सुरक्षा के बीच संतुलन

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश के प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में शामिल हैं। यहां प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और साहसिक पर्यटन की भी बड़ी संभावनाएं हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बन गई है।

संसदीय समिति की सिफारिशों का उद्देश्य पर्यटन को प्रभावित किए बिना सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। व्यापक CCTV निगरानी, केंद्रीकृत मॉनिटरिंग, नियमित सुरक्षा ऑडिट, आधुनिक ISR क्षमताएं, काउंटर-ड्रोन सिस्टम और सुरक्षित संचार नेटवर्क जैसी व्यवस्थाओं को एक साथ लागू करके जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अधिक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार किया जा सकता है।

समिति के सुझाव ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं जब दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में पर्यटन और रणनीतिक गतिविधियां समानांतर रूप से बढ़ रही हैं। आने वाले समय में इन सिफारिशों को किस स्तर तक लागू किया जाता है, यह वहां के पर्यटन स्थलों, सीमावर्ती क्षेत्रों और संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा क्षमता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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