श्रीनगर, एक बड़े साइबर फ्रॉड की जांच में सामने आया है कि गरीबी रेखा से नीचे (BPL) राशन कार्ड रखने वाले गरीब परिवारों को उनके बैंक खाते उपलब्ध कराने के बदले 10,000 रुपये तक का मासिक कमीशन देने का लालच दिया गया था। इन खातों का इस्तेमाल फर्जी ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट और गेमिंग प्लेटफॉर्म के जरिए पैसे के लेन-देन के लिए किया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस पूरे रैकेट में 209 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान गांदरबल से जुड़ा एक लिंक सामने आया है, जिसमें लगभग 2.5 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर से जुड़े करीब 200 बैंक खातों की भी जांच की जा रही है, क्योंकि शक है कि ये भी इस बड़े नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।
अधिकारी ने KNO को बताया कि गांदरबल के एक स्थानीय व्यक्ति से संपर्क किया गया और उसे कमीशन के बदले अपने बैंक खाते की जानकारी देने के लिए राजी किया गया। बाद में, इन लेन-देनों पर गांदरबल पुलिस की नजर पड़ी, जिसने इन संदिग्ध संपर्कों की जांच की। अधिकारी के अनुसार, इस रैकेट के मुख्य संचालक माने जाने वाले हरियाणा के एक MBBS डॉक्टर, जिसकी पहचान एकांत योगदत्त (उर्फ 'डॉ. मॉर्फिन') के रूप में हुई है, को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI) पर उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वह चीन से लौट रहा था।
उन्होंने बताया कि इस डॉक्टर ने फिलीपींस से MBBS की पढ़ाई की थी और विदेश (चीन सहित) में रहने के दौरान ही उसने इस तरह के वित्तीय नेटवर्क को चलाने के तरीके सीखे थे। जांचकर्ताओं को पता चला है कि डॉक्टर और उसकी पत्नी के नाम पर लगभग 20 बैंक खाते चलाए जा रहे थे, जिनमें से 10-10 खाते दोनों से जुड़े थे। ऑनलाइन गेमिंग और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लेन-देन करने और कई खातों के जरिए पैसे इधर-उधर भेजने के लिए किया जाता था। इससे पहले, इस साल 16 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गांदरबल के SSP खलील अहमद पोसवाल ने बताया था कि पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े 835 संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है। इनमें से 290 खातों में 209 करोड़ रुपये के लेन-देन की पुष्टि हुई है।
उन्होंने कहा था कि बाकी खातों की जांच पूरी होने के बाद, इस मामले में शामिल कुल रकम 400 करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है। पुलिस ने इस मामले के सिलसिले में हरियाणा के उस डॉक्टर समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। पोसवाल ने बताया कि आरोपी कथित तौर पर BPL राशन कार्ड धारकों को निशाना बनाते थे। वे उनसे उनके बैंक खाते और ATM कार्ड ले लेते थे और बदले में उन्हें हर महीने 8,000 से 10,000 रुपये का कमीशन देने का लालच देते थे। अधिकारियों ने बताया कि कुछ बैंक कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है, क्योंकि उन पर इन लेन-देन में मदद करने का संदेह है। पुलिस ने लोगों को आगाह किया है कि वे कमीशन के लालच में आकर अनजान लोगों के साथ अपने बैंक खाते, ATM कार्ड, QR कोड या बैंकिंग क्रेडेंशियल (जैसे पासवर्ड या पिन) साझा न करें। पुलिस ने चेतावनी दी है कि ऐसा करने से वे संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का हिस्सा बन सकते हैं।