Jammu : उड़ी के ऐतिहासिक जैतून बाग को मिलेगी नई जिंदगी, झेलम के पानी से होगी सिंचाई

Update: 2026-07-12 08:52 GMT

बारामुला : जम्मू-कश्मीर के उत्तरी कश्मीर स्थित नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे उड़ी सेक्टर के सलामाबाद क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक जैतून का बाग वर्षों की उपेक्षा और पानी की कमी के कारण अपनी पहचान खोता जा रहा है। कभी बेहतर उत्पादन और हरियाली के लिए प्रसिद्ध यह बाग अब सूखे पेड़ों और घटती उत्पादकता का प्रतीक बन गया है। हालांकि अब इस ऐतिहासिक बाग को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। बागवानी विभाग ने बाग तक झेलम नदी का पानी पहुंचाने के लिए लिफ्ट इरिगेशन योजना तैयार करने का निर्णय लिया है, जिससे इस बाग को फिर से जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।

जानकारी के अनुसार, सलामाबाद स्थित जैतून का यह बाग लंबे समय से पर्याप्त सिंचाई सुविधा के अभाव से जूझ रहा है। प्राकृतिक परिस्थितियों, अनियमित वर्षा और सरकारी स्तर पर वर्षों तक प्रभावी सिंचाई व्यवस्था विकसित नहीं होने के कारण यहां लगे बड़ी संख्या में जैतून के पेड़ सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं। पानी की कमी का सीधा असर फलों के उत्पादन और पेड़ों के विकास पर पड़ा है, जिससे बाग की आर्थिक उपयोगिता भी लगातार घटती गई।

बागवानी विभाग ने अब इस स्थिति को बदलने की दिशा में कदम उठाया है। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, झेलम नदी से पानी उठाकर जैतून के बाग तक पहुंचाने के लिए लिफ्ट इरिगेशन परियोजना पर काम शुरू किया जा रहा है। इसके लिए सबसे पहले विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। डीपीआर में परियोजना की तकनीकी व्यवहार्यता, लागत, पाइपलाइन नेटवर्क, पंपिंग स्टेशन और पानी की उपलब्धता जैसे सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजना को स्वीकृति के लिए संबंधित विभागों के पास भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू होगा। इस योजना के लागू होने से बाग को वर्षभर नियमित सिंचाई उपलब्ध कराई जा सकेगी, जिससे सूख चुके और कमजोर पड़ चुके पेड़ों को फिर से विकसित होने का अवसर मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि जैतून की खेती के लिए नियंत्रित और नियमित सिंचाई बेहद आवश्यक होती है। लंबे समय तक पानी की कमी रहने से पेड़ों की वृद्धि रुक जाती है और फल उत्पादन में भारी गिरावट आती है। यदि झेलम नदी से स्थायी जलापूर्ति सुनिश्चित हो जाती है तो बाग की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। इससे न केवल पेड़ों का संरक्षण होगा, बल्कि भविष्य में क्षेत्र के किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलने की संभावना है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सलामाबाद का जैतून बाग क्षेत्र की ऐतिहासिक और कृषि विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कभी यहां बड़ी संख्या में जैतून के पेड़ लहलहाते थे, लेकिन वर्षों तक सिंचाई व्यवस्था मजबूत नहीं होने के कारण धीरे-धीरे इसकी स्थिति खराब होती चली गई। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय पर प्रभावी कदम उठाए गए होते तो बाग को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

लिफ्ट इरिगेशन परियोजना को स्थानीय लोग सकारात्मक पहल मान रहे हैं। उनका कहना है कि यदि योजना समय पर पूरी हो जाती है तो न केवल पुराने बाग को नया जीवन मिलेगा, बल्कि भविष्य में जैतून की खेती का विस्तार भी संभव हो सकेगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और क्षेत्र में बागवानी गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

बागवानी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य केवल सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि ऐतिहासिक जैतून बाग का संरक्षण करना भी है। विभाग भविष्य में पेड़ों के रखरखाव, आधुनिक बागवानी तकनीकों के उपयोग और उत्पादन बढ़ाने के लिए भी योजनाएं तैयार कर सकता है। इससे जैतून की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में सुधार आने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में जैतून की खेती की अपार संभावनाएं हैं। यदि आधुनिक सिंचाई व्यवस्था, वैज्ञानिक प्रबंधन और किसानों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए तो यह फसल किसानों के लिए आय का बेहतर स्रोत बन सकती है। जैतून से प्राप्त तेल और अन्य उत्पादों की बाजार में लगातार मांग बढ़ रही है, ऐसे में इस क्षेत्र का विकास स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।

फिलहाल बागवानी विभाग लिफ्ट इरिगेशन योजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया में जुटा है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। स्थानीय लोगों और किसानों को उम्मीद है कि वर्षों से सूखते जा रहे इस ऐतिहासिक जैतून बाग में एक बार फिर हरियाली लौटेगी और यह क्षेत्र अपनी पुरानी पहचान वापस हासिल कर सकेगा। यह पहल न केवल एक बाग के पुनर्जीवन की कहानी होगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्र में कृषि और बागवानी विकास की नई शुरुआत भी साबित हो सकती है।

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