NH-44 पर बार-बार रुकावटों से कश्मीर के फल उत्पादक परेशान सेब सीजन में बढ़ी चिंता
श्रीनगर। मानसून के दौरान श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर बार-बार यातायात बाधित होने से कश्मीर घाटी के फल उत्पादकों और कारोबारियों की चिंता बढ़ गई है। घाटी में फलों की कटाई का मौसम शुरू हो चुका है और आने वाले हफ्तों में बड़ी मात्रा में सेब समेत अन्य फलों को जम्मू-कश्मीर से देश के विभिन्न हिस्सों में भेजे जाने की उम्मीद है। ऐसे में राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगातार रुकावटों ने किसानों और व्यापारियों के सामने परिवहन और समय पर बाजार तक उपज पहुंचाने की चुनौती खड़ी कर दी है।
कश्मीर का फल उद्योग क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर सेब की खेती से बड़ी संख्या में किसान, मजदूर, व्यापारी, परिवहन कारोबारी और अन्य लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। ऐसे में फसल के सीजन में सड़क संपर्क बाधित होने का असर पूरी आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।
सेब उद्योग कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़
कश्मीर घाटी में सेब की खेती लंबे समय से ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल सेब उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी करीब 75 प्रतिशत बताई जाती है। यही वजह है कि सेब का सीजन शुरू होते ही घाटी से बाहर फलों की आवाजाही बढ़ जाती है।
कटाई के बाद सेब को जल्द से जल्द मंडियों और देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंचाना जरूरी होता है। लंबे समय तक सड़क पर फंसे रहने से परिवहन में देरी होती है और फल की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है।
फल उत्पादकों के लिए यह चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सेब एक जल्दी खराब होने वाला कृषि उत्पाद है। किसान अपनी उपज को लंबे समय तक खेत या स्थानीय भंडारण में नहीं रोक सकते। समय पर परिवहन और बाजार तक पहुंच उनकी आय के लिए महत्वपूर्ण है।
मानसून में बढ़ जाती है NH-44 पर चुनौती
श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला प्रमुख सड़क मार्ग है। घाटी से बाहर जाने वाली बड़ी मात्रा में कृषि उपज और अन्य सामान इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़क क्षतिग्रस्त होने जैसी घटनाओं के चलते राजमार्ग पर यातायात प्रभावित हो सकता है। कई बार सड़क पर लंबा जाम लग जाता है और वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ती है।
फल उत्पादकों के लिए ऐसी स्थिति सामान्य माल ढुलाई की तुलना में अधिक गंभीर होती है, क्योंकि सेब को निर्धारित समय के भीतर बाजार तक पहुंचाना जरूरी होता है। राजमार्ग पर लंबे समय तक रुकावट आने से ट्रकों में लदी उपज के खराब होने का जोखिम बढ़ सकता है।
आने वाले हफ्तों में बढ़ेगा फलों का परिवहन
कश्मीर में फसल कटाई का मौसम शुरू होने के साथ आने वाले हफ्तों में फल लदे ट्रकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। जैसे-जैसे सेब की विभिन्न किस्में तैयार होंगी, घाटी से बाहर भेजे जाने वाली उपज की मात्रा भी बढ़ती जाएगी।
इस दौरान NH-44 पर यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। यदि मानसून के कारण मार्ग में लगातार रुकावटें आती रहीं तो किसानों और व्यापारियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
फल कारोबार से जुड़े लोगों के लिए समय पर परिवहन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के विभिन्न राज्यों में कश्मीर के सेब की मांग बनी रहती है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य बड़े बाजारों तक फल पहुंचाने के लिए सुचारु परिवहन व्यवस्था जरूरी है।
किसानों की आय पर पड़ सकता है असर
राजमार्ग पर रुकावटों का असर केवल परिवहन लागत तक सीमित नहीं रहता। यदि ट्रक लंबे समय तक रास्ते में फंसे रहें तो ईंधन और अन्य खर्च बढ़ सकते हैं। साथ ही फल की गुणवत्ता प्रभावित होने पर किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने का खतरा रहता है।
किसानों के लिए फसल तैयार करने में पूरे साल मेहनत और खर्च होता है। इसलिए कटाई के बाद उपज को सुरक्षित और समय पर बाजार तक पहुंचाना उनकी आय सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण चरण है।
यदि परिवहन में देरी होती है तो मंडियों में आपूर्ति की योजना भी प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए अनिश्चितता पैदा हो सकती है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
सेब सीजन के दौरान NH-44 को सुचारु बनाए रखना प्रशासन और सड़क प्रबंधन एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती होगी। मानसून के कारण संवेदनशील हिस्सों पर लगातार निगरानी रखना, भूस्खलन वाले क्षेत्रों में तत्काल मलबा हटाना और यातायात को व्यवस्थित करना जरूरी होगा।
इसके अलावा फल लदे वाहनों की आवाजाही को प्राथमिकता देने और संभावित जाम की स्थिति में वैकल्पिक प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने से किसानों को राहत मिल सकती है।
फल उत्पादकों की चिंता को देखते हुए राजमार्ग पर यातायात की स्थिति को लेकर नियमित और समय पर सूचना उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा। इससे ट्रांसपोर्टर और व्यापारी अपनी आवाजाही की योजना बेहतर तरीके से बना सकेंगे।
भंडारण और परिवहन सुविधाओं की जरूरत
राजमार्ग पर निर्भरता कम करने के लिए कश्मीर में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और नियंत्रित वातावरण वाले भंडारण केंद्रों का विस्तार भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है। ऐसी सुविधाओं से किसान अपनी उपज को कुछ समय के लिए सुरक्षित रख सकेंगे और सड़क की स्थिति सामान्य होने के बाद उसे बाजार भेज सकेंगे।
हालांकि, बड़ी मात्रा में सेब की आवाजाही के लिए सड़क परिवहन अभी भी प्रमुख माध्यम है। इसलिए NH-44 का सुरक्षित और निर्बाध संचालन फल उद्योग के लिए बेहद जरूरी है।
सेब सीजन में निगरानी बढ़ाना जरूरी
कश्मीर का सेब उद्योग केवल किसानों की आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि इससे जुड़े हजारों परिवारों और व्यवसायों की आर्थिक गतिविधियां भी इसी पर निर्भर हैं। देश के कुल सेब उत्पादन में करीब 75 प्रतिशत हिस्सेदारी होने के कारण कश्मीर के फल उद्योग का राष्ट्रीय बाजार पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव है।
ऐसे में मानसून के दौरान NH-44 पर बार-बार होने वाली रुकावटों को लेकर उत्पादकों की चिंता स्वाभाविक है। आने वाले हफ्तों में जब घाटी से फलों की आवाजाही अपने चरम पर पहुंचेगी, तब राजमार्ग की स्थिति और भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
फल उत्पादकों की उम्मीद अब यही है कि प्रशासन मानसून के दौरान संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाए, सड़क बाधित होने पर जल्द से जल्द यातायात बहाल करे और सेब सीजन के दौरान फलों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाए। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले फल उद्योग को भी बड़ी परेशानी से बचाया जा सकेगा।