जम्मू। जम्मू-कश्मीर के अंतिम डोगरा शासक महाराजा हरि सिंह की 131वीं जयंती बुधवार को जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में मनाई गई। जम्मू में तवी पुल स्थित उनकी प्रतिमा के पास बड़ी संख्या में लोग जुटे और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए गए। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी महाराजा हरि सिंह को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी और उनके सामाजिक सुधारों तथा जनकल्याण से जुड़े कार्यों को याद किया।
महाराजा हरि सिंह की जयंती 23 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में सरकारी अवकाश के रूप में मनाई जाती है। प्रदेश सरकार ने सितंबर 2022 में 23 सितंबर को हर साल सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों के लिए अवकाश घोषित किया था।
इस बार जयंती ऐसे समय मनाई जा रही है, जब एक दिन पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा में महाराजा हरि सिंह और नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती से जुड़े अवकाश को लेकर सदन में तीखी बहस हुई थी।
तवी पुल पर जुटे लोग
जम्मू में महाराजा हरि सिंह की प्रतिमा के पास बुधवार को अलग-अलग वर्गों के लोग पहुंचे। लोगों ने प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। जयंती के अवसर पर डोगरा संस्कृति और महाराजा के जीवन से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
महाराजा हरि सिंह की जयंती पर जम्मू में हर साल विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस वर्ष भी जयंती समारोह को लेकर कई कार्यक्रमों की तैयारी की गई थी। युवा राजपूत सभा ने भी 131वीं जयंती के अवसर पर महारैली और डोगरा संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों की घोषणा की थी।
LG मनोज सिन्हा ने दी श्रद्धांजलि
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बुधवार को महाराजा हरि सिंह की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अपने संदेश में उन्होंने महाराजा हरि सिंह को जनकल्याण और सामाजिक सुधारों से जुड़े कार्यों के लिए याद किया।
उपराज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी संदेश में उन्हें प्रगतिशील विचारों वाला शासक बताते हुए कहा गया कि उनके सार्वजनिक सेवा, समानता और समावेशी विकास से जुड़े आदर्श आज भी प्रासंगिक हैं।
जम्मू-कश्मीर में सरकारी अवकाश
महाराजा हरि सिंह की जयंती पर 23 सितंबर को जम्मू-कश्मीर में सरकारी अवकाश रहता है। वर्ष 2022 में जारी सरकारी आदेश के मुताबिक 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह की जयंती के अवसर पर केंद्र शासित प्रदेश के सरकारी कार्यालयों और शिक्षण संस्थानों में अवकाश घोषित किया गया था।
विधानसभा के इस वर्ष के अस्थायी कैलेंडर में भी 23 सितंबर को महाराजा हरि सिंह की जयंती के कारण अवकाश रखा गया था। इसी वजह से विधानसभा के शरदकालीन सत्र में 23 सितंबर को बैठक निर्धारित नहीं थी।
एक दिन पहले विधानसभा में उठा था मुद्दा
महाराजा हरि सिंह की जयंती से एक दिन पहले मंगलवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सरकारी अवकाश को लेकर विवाद हुआ। सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक अब्दुल मजीद लार्मी ने शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर सरकारी अवकाश बहाल करने की मांग की।
लार्मी ने कहा कि यदि शेख अब्दुल्ला की जयंती पर अवकाश बहाल नहीं किया जाता है तो महाराजा हरि सिंह की जयंती पर दिए जा रहे अवकाश को भी वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। इस मांग पर भाजपा विधायकों ने विरोध जताया और सदन में हंगामा हुआ।
BJP विधायकों ने किया विरोध
मंगलवार की कार्यवाही के दौरान भाजपा सदस्यों ने महाराजा हरि सिंह की जयंती के अवकाश को वापस लेने की मांग का विरोध किया। भाजपा विधायकों ने महाराजा के समर्थन में नारे लगाए और इस मांग पर आपत्ति जताई।
वहीं पीडीपी विधायक वहीद पारा ने भी चर्चा में हिस्सा लिया और शेख अब्दुल्ला की जयंती के साथ 13 जुलाई को मनाए जाने वाले शहीद दिवस से जुड़े अवकाश को बहाल करने की मांग उठाई।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने स्पष्ट किया कि अवकाश घोषित करने या वापस लेने का अधिकार उनके पास नहीं है। उन्होंने कहा कि सदन में सदस्य अपनी राय रख सकते हैं, लेकिन अवकाश को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सरकार के स्तर पर होता है।
महाराजा हरि सिंह कौन थे?
महाराजा हरि सिंह जम्मू-कश्मीर रियासत के अंतिम शासक थे। उनका जन्म 23 सितंबर 1895 को हुआ था। 1925 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभाली थी। वे वर्ष 1961 में निधन तक सार्वजनिक जीवन में रहे।
1947 में भारत की आजादी के बाद जम्मू-कश्मीर रियासत पर पाकिस्तान समर्थित कबायली हमले के बाद महाराजा हरि सिंह ने भारत के साथ विलय के दस्तावेज यानी इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद भारतीय सैन्य सहायता जम्मू-कश्मीर पहुंची।
विलय और उसके बाद के घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर के आधुनिक राजनीतिक इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
सामाजिक सुधारों के लिए भी याद किए जाते हैं
महाराजा हरि सिंह के शासनकाल को विभिन्न सामाजिक सुधारों के लिए भी याद किया जाता है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी अपने जयंती संदेश में उनके जनकल्याण और सामाजिक सुधारों से जुड़े कार्यों का उल्लेख किया।
उनके समर्थक उन्हें शिक्षा, सामाजिक समानता और जनकल्याण से जुड़े सुधारों के लिए याद करते हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर के इतिहास को लेकर अलग-अलग राजनीतिक धाराओं और संगठनों की अपनी-अपनी ऐतिहासिक व्याख्याएं हैं।
डोगरा विरासत से जुड़ा आयोजन
जम्मू में महाराजा हरि सिंह की जयंती को डोगरा विरासत और संस्कृति से भी जोड़कर देखा जाता है। तवी पुल स्थित उनकी प्रतिमा के आसपास आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही।
युवा राजपूत सभा की ओर से जयंती पर महारैली आयोजित करने की जानकारी भी दी गई थी। संगठन ने इसे डोगरा विरासत, संस्कृति और इतिहास के प्रति सम्मान से जुड़ा आयोजन बताया था।
राजनीतिक बहस के बीच मनाई गई जयंती
इस बार महाराजा हरि सिंह की जयंती का आयोजन विधानसभा में हुई राजनीतिक बहस की पृष्ठभूमि में हुआ। एक ओर जम्मू में लोगों ने उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि दी और विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए, वहीं दूसरी ओर विधानसभा में उनके नाम पर सरकारी अवकाश को लेकर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने आए।
महाराजा हरि सिंह की जयंती पर सरकारी अवकाश को लेकर फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। 23 सितंबर का अवकाश सरकारी रिकॉर्ड में जारी है।
जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक इतिहास में महाराजा हरि सिंह की भूमिका को लेकर अलग-अलग विचार मौजूद हैं। ऐसे में उनकी जयंती हर साल सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बनती है।
बुधवार को जम्मू समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने महाराजा हरि सिंह को श्रद्धांजलि दी। तवी पुल पर उनकी प्रतिमा के पास हुए कार्यक्रमों में लोगों ने उनकी विरासत को याद किया, जबकि उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी जनकल्याण और सामाजिक सुधारों में उनके योगदान को रेखांकित किया।