श्रीनगर: कश्मीर के पुलवामा जिले की करेवा जमीन पर फैले सेब और बादाम के बागों के लिए भरोसेमंद सिंचाई व्यवस्था महत्वपूर्ण सवाल बनी हुई है। रहमू और आसपास के क्षेत्र को लेकर उपलब्ध सरकारी जवाब में बताया गया था कि यहां अलग से समर्पित सिंचाई योजना नहीं है। किसान अपने संसाधनों से नाले का पानी उठाते हैं, जबकि कुछ हिस्सों में बोरवेल और गुरुत्व आधारित सिंचाई व्यवस्था का उपयोग होता है। ऐसे में बागवानों के सामने पानी की उपलब्धता के साथ उसे बागों तक पहुंचाने की चुनौती भी है।
हालांकि, लिफ्ट इरिगेशन योजना की स्थिति को लेकर तारीख का ध्यान रखना जरूरी है। इस क्षेत्र से संबंधित स्पष्ट जानकारी 12 मार्च 2025 के विधानसभा जवाब में मिली थी। उस समय सरकार ने कहा था कि संबंधित करेवा भूमि के लिए लिफ्ट सिंचाई योजना बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। इसे वर्तमान में स्वीकृत लेकिन अटकी परियोजना बताने की पुष्टि उपलब्ध सामग्री से नहीं होती।
रहमू के करेवा क्षेत्र का क्या है मामला?
कश्मीर लाइफ में प्रकाशित सरकारी जवाब के अनुसार, पुलवामा में कमराजीपोरा से रहमू और आगे नौपोरा-नौगाम तक करेवा भूमि फैली हुई है। इस क्षेत्र में बादाम की खेती होती रही है, जबकि इसके बड़े हिस्से में अब सेब के बाग लगाए गए हैं। सरकार ने स्वीकार किया था कि इस जमीन के लिए स्वतंत्र सिंचाई योजना उपलब्ध नहीं है। किसान खांची नाले से पंप और मोटर के जरिए पानी उठाते हैं। सरकारी जवाब में इसका उपयोग मुख्य रूप से बागों में कीटनाशक छिड़काव के लिए पानी जुटाने के संदर्भ में बताया गया था। इसलिए नाले से पानी उठाने की मौजूदा व्यवस्था को पूरे क्षेत्र में नियमित सिंचाई उपलब्ध होने के बराबर नहीं समझना चाहिए।
किसी जलस्रोत में पानी होना और हर बाग तक पर्याप्त मात्रा में पहुंचना दो अलग परिस्थितियां हैं। इसके लिए पानी उठाने, पहुंचाने और जरूरत के समय वितरण की व्यवस्था भी आवश्यक है।
दस बोरवेल दिए गए थे, पांच चालू होने की जानकारी
मार्च 2025 के जवाब में सरकार ने बताया था कि बागवानी विभाग ने किसानों को दस गहरे बोरवेल और 62 सिंचाई पंप सेट उपलब्ध कराए थे। उस समय पांच बोरवेल ही काम कर रहे थे। बाकी बोरवेल के काम नहीं करने का प्रमुख कारण भूजल स्तर में गिरावट बताया गया था। ये उसी समय की स्थिति दर्शाने वाले आंकड़े हैं; उनकी वर्तमान कार्यशीलता का नया विवरण उपलब्ध नहीं मिला है। इस अनुभव से बोरवेल आधारित सिंचाई की सीमा भी सामने आती है। केवल नया बोरवेल खोद देना स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। स्थानीय जल उपलब्धता और भूजल की स्थिति समझना जरूरी है। जिन क्षेत्रों में जलस्तर घट रहा हो, वहां पानी निकालने के साथ वर्षाजल संचित करने और उपलब्ध जल का सावधानी से उपयोग करने पर भी ध्यान देना होगा।
खांची नाला और मौजूदा नहर व्यवस्था विकल्प
सरकारी जवाब में खांची नाले को संबंधित करेवा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता वाला स्रोत बताया गया था। साथ ही जानकारी दी गई थी कि ठोकरपोरा से रहमू के बीच के एक हिस्से में नोवखुल-मीरगुंड गुरुत्व आधारित योजना से सिंचाई होती है। इससे पूरे करेवा क्षेत्र को लाभ मिलने का दावा नहीं किया गया था। उपलब्ध जानकारी के आधार पर मौजूदा स्रोतों और वितरण व्यवस्था का आकलन एक व्यावहारिक कदम हो सकता है। किन बागों तक पानी पहुंचता है, कहां पंप की जरूरत है और किस हिस्से में पाइप या चैनल की व्यवस्था उपयोगी होगी, इसका स्थानीय तकनीकी सर्वेक्षण जरूरी होगा। किसी नई योजना की लागत और उपयोगिता भी इसी आकलन से स्पष्ट हो सकेगी।
ड्रिप सिंचाई और नमी संरक्षण से मिल सकती है मदद
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जम्मू-कश्मीर की कृषि के लिए वर्षा और बर्फ पिघलने से मिलने वाले पानी का संग्रह, उचित भंडारण तथा बागों में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी प्रणालियों को उपयोगी उपायों में शामिल किया है। ड्रिप व्यवस्था उपलब्ध पानी को पौधों की जड़ों के आसपास पहुंचाने का विकल्प देती है। हालांकि, उसके लिए भी भरोसेमंद जलस्रोत और रखरखाव जरूरी है। बादाम के वर्षा आधारित बागों में मिट्टी की नमी बचाना भी मददगार हो सकता है। आईसीएआर की पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में जल संचयन की छोटी संरचनाओं और घास जैसी मल्च के उपयोग से नमी संरक्षण तथा उपज में सुधार का उल्लेख है। ये उपाय स्थानीय जमीन, ढलान और विशेषज्ञ सलाह के अनुसार अपनाए जाने चाहिए। इन्हें हर परिस्थिति में नियमित सिंचाई का पूर्ण विकल्प नहीं माना जा सकता।
वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए नई पहल की समीक्षा
इस बीच, 27 अक्टूबर 2026 को कृषि विभाग ने कश्मीर के वर्षा आधारित क्षेत्रों में प्रस्तावित बोरवेल पहल की समीक्षा की। कश्मीर इमेजेज के अनुसार, कृषि निदेशक सरताज अहमद शाह की बैठक में बागवानी और कमांड एरिया डेवलपमेंट विभाग सहित संबंधित अधिकारी शामिल हुए। इसमें समन्वय, योजना और निगरानी पर जोर दिया गया। यह व्यापक पहल है। उपलब्ध रिपोर्ट में रहमू के लिए किसी विशेष बोरवेल या लिफ्ट परियोजना की मंजूरी घोषित नहीं की गई है। फिलहाल क्षेत्र की जरूरत स्पष्ट करने वाला सर्वेक्षण, मौजूदा सुविधाओं की कार्यशीलता की जांच और जल संरक्षण के साथ सिंचाई व्यवस्था विकसित करना महत्वपूर्ण है। नई स्वीकृति या समयसीमा का दावा संबंधित विभाग की स्पष्ट सूचना के बाद ही किया जा सकेगा।
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