जम्मू : मादक पदार्थ तस्करी (एनडीपीएस) मामले में गिरफ्तार जल शक्ति (पीएचई) विभाग के कर्मचारी अभिकांत शर्मा को जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभागीय जांच में आरोप गंभीर पाए जाने के बाद सरकार ने यह कार्रवाई की। जल शक्ति विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कर्मचारी के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के बाद सेवा से हटाने का निर्णय लिया गया।
सरकार की इस कार्रवाई को नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी सेवकों से अनुशासन और कानून का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। यदि किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला सामने आता है तो नियमों के तहत कार्रवाई की जाती है।
उधमपुर में तैनात था अभिकांत शर्मा
सरकारी आदेश के अनुसार, अभिकांत शर्मा जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर जिले के रहने वाले हैं। वह जल शक्ति विभाग के पीएचई डिवीजन उधमपुर में टर्नकॉक के पद पर तैनात थे।
उनके खिलाफ थाना माजलता में एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला एफआईआर संख्या 43/2026 के तहत दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने हेरोइन बरामदगी का किया था दावा
पुलिस के अनुसार, अभिकांत शर्मा के कब्जे से करीब 32 ग्राम हेरोइन बरामद की गई थी। बरामदगी के आधार पर उनके खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई की गई और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
मामले की जांच आगे बढ़ने के बाद विभाग ने भी इस प्रकरण को गंभीरता से लिया। सरकारी कर्मचारी होने के कारण विभागीय स्तर पर भी जांच शुरू की गई, जिसमें आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की समीक्षा की गई।
विभागीय जांच में आरोप पाए गए गंभीर
जल शक्ति विभाग की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि विभागीय जांच के दौरान कर्मचारी के खिलाफ लगे आरोप गंभीर पाए गए। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद सक्षम प्राधिकारी ने सेवा नियमों के तहत बर्खास्तगी का फैसला लिया।
सरकार का मानना है कि सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों का आचरण जनता के विश्वास से जुड़ा होता है। ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई करना जरूरी हो जाता है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन बना रहे।
एनडीपीएस मामलों पर सरकार का सख्त रुख
जम्मू-कश्मीर में मादक पदार्थों की तस्करी और इसके नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं। प्रशासन की ओर से भी नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
सरकार समय-समय पर यह स्पष्ट करती रही है कि नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या संलिप्तता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
सेवा से बर्खास्तगी के बाद बढ़ी प्रशासनिक सख्ती
अभिकांत शर्मा की बर्खास्तगी को विभागीय अनुशासन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकारी सेवा में रहते हुए किसी कर्मचारी के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला सामने आने पर विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस मामले में भी विभाग ने आपराधिक जांच के साथ-साथ अपने स्तर पर जांच प्रक्रिया पूरी की और उसके बाद सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया।
आगे न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी
सरकारी सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद भी एनडीपीएस मामले की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी। पुलिस की ओर से दर्ज मामले में अदालत के स्तर पर आगे की सुनवाई होगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
फिलहाल सरकार ने विभागीय कार्रवाई पूरी करते हुए अभिकांत शर्मा को सेवा से हटा दिया है। यह कार्रवाई प्रशासन की ओर से सरकारी कर्मचारियों के आचरण और जवाबदेही को लेकर अपनाए जा रहे सख्त रुख को दर्शाती है।
नशे के खिलाफ अभियान को मिलेगा संदेश
प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से नशे के कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ स्पष्ट संदेश जाता है। खासकर सरकारी विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह संकेत है कि किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल पाए जाने पर सेवा नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
जम्मू-कश्मीर सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब प्रदेश में नशीले पदार्थों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए विभिन्न एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।