जम्मू-कश्मीर : कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडितों को कथित तौर पर लक्षित हमलों की धमकी मिलने के बाद प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। बताया जा रहा है कि ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ नाम से जारी एक कथित धमकी भरे संदेश में कश्मीरी पंडित समुदाय के कुछ कर्मचारियों के नाम, फोन नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारियां साझा की गई हैं। इस घटनाक्रम के बाद सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गई हैं और घाटी में अल्पसंख्यक कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाई गई है।
कश्मीरी पंडित संगठन पनुन कश्मीर के एक प्रवक्ता के अनुसार, 7 अगस्त 2026 को जारी बताए जा रहे संदेश में कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों को विशेष रूप से निशाना बनाने की धमकी दी गई। संगठन का आरोप है कि यह संदेश आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कथित मुखौटा संगठन की ओर से जारी किया गया है। हालांकि, इस धमकी पत्र की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस और प्रशासन की ओर से भी इस संबंध में सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
धमकी की सूचना के बाद घाटी में तैनात कई कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सुरक्षा कारणों से दफ्तर नहीं आने की सलाह दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ कर्मचारियों को 25 अगस्त तक वर्क फ्रॉम होम करने या छुट्टी पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। स्वतंत्रता दिवस से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों में उनकी ड्यूटी भी फिलहाल नहीं लगाने की बात सामने आई है। इस कदम का उद्देश्य किसी संभावित खतरे को टालना और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
कथित धमकी में व्यक्तिगत जानकारियां सार्वजनिक किए जाने को सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। सामान्य तौर पर आतंकवाद से जुड़ी धमकियों में सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध नेटवर्क और उसके स्थानीय संपर्कों की पहचान करने पर ध्यान देती हैं। इस मामले में भी यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदेश कहां से जारी हुआ, इसके पीछे कौन लोग हैं और इसमें जिन कर्मचारियों का उल्लेख किया गया है, उनकी जानकारी किस तरह हासिल की गई।
इस बीच, घाटी में सुरक्षा बलों का अभियान भी जारी है। रिपोर्टों के अनुसार, 22 जुलाई से चल रहे सुरक्षा अभियान के दौरान 3,000 से अधिक संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस की ओर से इनमें कुछ लोगों को आतंकियों के मददगार या ओवर ग्राउंड वर्कर्स के तौर पर संदिग्ध बताया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य संभावित आतंकी नेटवर्क और उसके स्थानीय सपोर्ट सिस्टम पर कार्रवाई करना है।
जम्मू-कश्मीर में मौजूदा सुरक्षा स्थिति के बीच अमरनाथ यात्रा को भी निर्धारित समय से पहले रोक दिया गया है। प्रशासन ने 9 अगस्त को यात्रा स्थगित करने का फैसला लिया। इसके पीछे सुरक्षा चिंताओं के साथ मौसम संबंधी परिस्थितियां और यात्रियों की संख्या में कमी जैसे कारण भी बताए गए हैं। यात्रा स्थगित होने और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी सलाह दिए जाने के बाद घाटी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा नया नहीं है। वर्ष 2010 में शुरू किए गए प्रधानमंत्री विशेष रोजगार पैकेज के तहत बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी में सरकारी नौकरियां दी गई थीं। इसके बाद कई कर्मचारी दोबारा कश्मीर में बसकर सरकारी सेवाओं में कार्य करने लगे। हालांकि, 2022 में आतंकवादियों द्वारा लक्षित हमलों में कुछ कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की हत्या के बाद समुदाय में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हुई थी। इसके विरोध में कर्मचारियों ने लंबे समय तक प्रदर्शन भी किया था।
हाल के घटनाक्रम ने उस पुराने डर को फिर से सामने ला दिया है। अनंतनाग में पुलिसकर्मी की हत्या और कुलगाम में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाए जाने जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। घाटी में अल्पसंख्यक समुदाय के कर्मचारियों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के साथ गश्त भी तेज की गई है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात कथित धमकी की वास्तविकता और उसके स्रोत का पता लगाना है। सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल माध्यमों से जारी संदेश की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इसके पीछे वास्तविक आतंकी नेटवर्क है या किसी ने डर पैदा करने के उद्देश्य से फर्जी संदेश तैयार किया है। जांच पूरी होने के बाद ही इसकी वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासन के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक ओर घाटी में सामान्य प्रशासनिक कामकाज जारी रखना है, वहीं दूसरी ओर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों सहित सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है। स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और बढ़ने की संभावना है। सरकार की ओर से उठाए गए एहतियाती कदमों का उद्देश्य संभावित खतरे को रोकना और कर्मचारियों में सुरक्षा का भरोसा बनाए रखना है।