Srinagar: फर्जी 10+2 प्रमाणपत्र से सरकारी नौकरी, आरोपी को मिली कानूनी सजा

सरकारी नौकरी में फर्जीवाड़ा, आईआरपी कांस्टेबल को अदालत ने दंडित किया

Update: 2026-07-29 08:19 GMT

श्रीनगर: कश्मीर की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने बुधवार को कहा कि उसने बडगाम के एक व्यक्ति को दोषी ठहरवाया है जिसने फर्जी 10+2 योग्यता प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करके भारतीय रिजर्व पुलिस (आईआरपी) की 9वीं बटालियन में कांस्टेबल की नौकरी हासिल की थी।

जारी एक बयान में प्रवक्ता ने कहा कि कश्मीर की अपराध शाखा (अब आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) कश्मीर) ने लंबे समय से लंबित भर्ती धोखाधड़ी मामले में दोषसिद्धि हासिल की।

उन्होंने बताया कि एक महत्वपूर्ण फैसले में श्रीनगर स्थित 13वें वित्त आयोग/रेलवे मजिस्ट्रेट के विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने बनपोरा त्रेहगाम कुपवाडा निवासी अब्दुल अजीज मलिक के पुत्र नजीर अहमद मलिक को फर्जी 10+2 योग्यता प्रमाण पत्र का उपयोग करके भारतीय रिजर्व पुलिस की 9वीं बटालियन में कांस्टेबल के पद पर धोखाधड़ी से नियुक्ति प्राप्त करने के लिए दोषी ठहराया है।

प्रवक्ता ने कहा कि जांच के दौरान जाली प्रमाण पत्र जब्त कर सत्यापन के लिए जम्मू और कश्मीर स्कूल शिक्षा बोर्ड (जेकेबीओएसई) को भेजा गया। बोर्ड ने पुष्टि की कि प्रमाण पत्र जाली था। तदनुसार अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया और धारा 420 आरपीसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए तीन साल के कठोर कारावास और 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना न भरने पर दोषी को 15 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा।

उन्होंने बताया कि अदालत ने धारा 471 आरपीसी के तहत दंडनीय अपराध के लिए आरोपी को दो साल के साधारण कारावास की सजा भी सुनाई है। दोनों मुख्य सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

ईओडब्ल्यू कश्मीर नागरिकों को सलाह देता है कि वे रोजगार या किसी भी आधिकारिक कार्य के लिए जाली या मनगढ़ंत दस्तावेजों का उपयोग करने से बचें। ऐसे धोखाधड़ी वाले कृत्य कानून के तहत दंडनीय हैं और इनके परिणामस्वरूप कारावास, जुर्माना और प्रतिष्ठा एवं करियर को स्थायी नुकसान हो सकता है।

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